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Hindi In Maharashtra Row: हम हिंदी थोपे जाने के खिलाफ, महाराष्ट्र में भाषा विवाद पर बोले पूर्व CM उद्धव ठाकरे

Sat, 19 Apr 2025 02:50 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शुभम कुमार Updated Sat, 19 Apr 2025 02:50 PM IST
सार

महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लेकर जारी विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को जबरन लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि उन्हें हिंदी भाषा से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसका ज़बरदस्ती थोपना ठीक नहीं है।

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Maharashtra Compulsory Hindi Row Update Shiv Sena UBT NCP MNS and other maratha party leaders react hindi news
उद्धव ठाकरे, शिवसेना यूबीटी प्रमुख - फोटो : ANI

विस्तार

महाराष्ट्र में नई शिक्षा नीति को लेकर जारी विवाद के बीच शनिवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को जबरन लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि उन्हें हिंदी भाषा से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसका ज़बरदस्ती थोपना ठीक नहीं है। मुंबई में भारतीय कामगार सेना के एक कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने राज्य सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें हिंदी भाषा से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसे जबरन पढ़ाने का फैसला सही नहीं है।

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महाराष्ट्र की मातृभाषा मराठी तो हिंदी क्यों?-ठाकरे
ठाकरे ने कहा कि हमें हिंदी से कोई परहेज नहीं है, लेकिन इसे स्कूलों में जबरन क्यों पढ़ाया जा रहा है? यह भाषा की बात नहीं, बल्कि जबरदस्ती की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की मातृभाषा मराठी है और उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम हिंदी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे बच्चों पर क्यों थोपा जा रहा है? महाराष्ट्र की अपनी मातृभाषा मराठी है और उसे सबसे पहले प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
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एकनाथ शिंदे पर साधा निशाना
ठाकरे ने आगे कहा कि जो महाराष्ट्र में रहना चाहता है, उसे 'जय महाराष्ट्र' कहना चाहिए और मराठी भाषा सीखनी चाहिए। उन्होंने एकनाथ शिंदे और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग मराठी के साथ अन्याय कर रहे हैं, वे बाल ठाकरे की विरासत के वारिस नहीं हो सकते।


बता दें कि ठाकरे के इस बयान को राज्य सरकार के उस फैसले से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को अनिवार्य तीसरी भाषा के तौर पर पढ़ाने की बात कही गई थी। इस फैसले का विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है। उद्धव ठाकरे ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से मराठी भाषा, संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए एकजुट रहने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में भाषा के नाम पर किसी तरह की जबरदस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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वक्फ कानून पर भी जताई आपत्ति
इसके साथ ही उद्धव ठाकरे ने वक्फ अधिनियम 2025 पर भी ठाकरे ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जब वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम नियुक्त किए जा सकते हैं, तो क्या गारंटी है कि हिंदू धार्मिक संगठनों में भी ऐसा नहीं होगा? उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि उनकी सरकार इसलिए गिराई गई क्योंकि उन्होंने नई श्रम नीतियों को लागू करने से मना कर दिया था।

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