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तमिलनाडुः मद्रास हाईकोर्ट ने 'शरिया कोर्ट' पर बैन लगाया
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 19 Dec 2016 04:26 PM IST
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तमिलनाडु की मस्जिदों में चलने वाली 'शरिया अदालतों' पर मद्रास हाईकोर्ट ने पाबंदी लगा दी है। कोर्ट ने अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा कि धार्मिक स्थान और अन्य जगहें केवल धार्मिक प्रार्थना के लिए होती हैं।
मद्रास हाईकोर्ट के पहली पीठ के न्यायाधीश संजय किशन कौल और न्यायाधीश एम. सुंदर ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार धार्मिक स्थानों पर शरिया कोर्ट के प्रचलन को रोके और चार हफ्ते के भीतर इस मसले पर स्टेटस रिपोर्ट फाइल करें।
अप्रवासी भारतीय अब्दुल रहमान की ओर दाखिल की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि चेन्नई के अन्ना सलाई मस्जिद में मक्का मस्जिद शरियत काउंसिल न्यायपालिका की तरह चल रही है।
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इन शरिया अदालतों में शादी विवाह के मामले, पार्टियों को समन दिए जाने और तलाक के मामलों पर सुनवाई होती है।
रहमान के वरिष्ठ वकील ए. सिराजुद्दीन ने कहा कि जनहित याचिका बड़ी संख्या में मासूम मुस्लिमों के हितों की रक्षा के लिए दाखिल की गई है। तमिलनाडु में हजारों की संख्या में मुस्लिम शरिया कोर्ट के हाथों उत्पीड़न झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 'मैं स्वयं काउंसिल के फैसले का भुक्तभोगी रहा हूं। मैं पत्नी के साथ दोबारा रहना चाहता था, लेकिन मुझसे तलाक के दस्तावेज पर जबरदस्ती हस्ताक्षर करवाया गया और तलाक का फैसला हो गया।'
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मद्रास हाईकोर्ट के पहली पीठ के न्यायाधीश संजय किशन कौल और न्यायाधीश एम. सुंदर ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार धार्मिक स्थानों पर शरिया कोर्ट के प्रचलन को रोके और चार हफ्ते के भीतर इस मसले पर स्टेटस रिपोर्ट फाइल करें।
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अप्रवासी भारतीय अब्दुल रहमान की ओर दाखिल की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि चेन्नई के अन्ना सलाई मस्जिद में मक्का मस्जिद शरियत काउंसिल न्यायपालिका की तरह चल रही है।
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इन शरिया अदालतों में शादी विवाह के मामले, पार्टियों को समन दिए जाने और तलाक के मामलों पर सुनवाई होती है।
रहमान के वरिष्ठ वकील ए. सिराजुद्दीन ने कहा कि जनहित याचिका बड़ी संख्या में मासूम मुस्लिमों के हितों की रक्षा के लिए दाखिल की गई है। तमिलनाडु में हजारों की संख्या में मुस्लिम शरिया कोर्ट के हाथों उत्पीड़न झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 'मैं स्वयं काउंसिल के फैसले का भुक्तभोगी रहा हूं। मैं पत्नी के साथ दोबारा रहना चाहता था, लेकिन मुझसे तलाक के दस्तावेज पर जबरदस्ती हस्ताक्षर करवाया गया और तलाक का फैसला हो गया।'