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बृहदेश्वर मंदिर में श्री श्री रविशंकर के कार्यक्रम पर रोक, तमिल संगठन कर रहे थे आयोजन का विरोध
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Updated Sat, 08 Dec 2018 04:32 AM IST
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श्री श्री रविशंकर
- फोटो : PTI
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मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने शुक्रवार को तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर के प्रांगण में श्री श्री रविशंकर के कार्यक्रम पर रोक लगा दी। आर्ट ऑफ लिविंग का दो दिवसीय कार्यक्रम शुक्रवार से ही शुरू होना था। यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल बृहदेश्वर मंदिर में निजी आयोजन प्रतिबंधित हैं।
कई तमिल संगठन आयोजन का विरोध कर रहे थे। संगठनों ने इसे रोकने के लिए कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि श्री श्री ने 2016 में यमुना किनारे विश्व कल्चरल फेस्टिवल का आयोजन किया था। इससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा था। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आर्ट ऑफ लिविंग पर 5 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था। मामला अब भी कोर्ट में चल रहा है।
याचिका में कहा गया कि 1000 साल पुराना मंदिर यूनेस्को द्वारा संरक्षित है। इसे बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने तंजोर के जिला कलेक्टर और तंजावुर के एसपी को सोमवार तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
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आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से शुरुआती मंजूरी मिली थी। ‘अनविलिंग इनफिनिटी’ नामक कार्यक्रम में करीब 2000 लोगों के जुटने का अनुमान था और उनके ठहरने के लिए मंदिर के प्रांगण में अस्थायी पंडाल लगाए जाने थे, जिसे लेकर सामाजिक संगठन विरोध कर रहे थे।
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कई तमिल संगठन आयोजन का विरोध कर रहे थे। संगठनों ने इसे रोकने के लिए कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि श्री श्री ने 2016 में यमुना किनारे विश्व कल्चरल फेस्टिवल का आयोजन किया था। इससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा था। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आर्ट ऑफ लिविंग पर 5 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था। मामला अब भी कोर्ट में चल रहा है।
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याचिका में कहा गया कि 1000 साल पुराना मंदिर यूनेस्को द्वारा संरक्षित है। इसे बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने तंजोर के जिला कलेक्टर और तंजावुर के एसपी को सोमवार तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
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आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से शुरुआती मंजूरी मिली थी। ‘अनविलिंग इनफिनिटी’ नामक कार्यक्रम में करीब 2000 लोगों के जुटने का अनुमान था और उनके ठहरने के लिए मंदिर के प्रांगण में अस्थायी पंडाल लगाए जाने थे, जिसे लेकर सामाजिक संगठन विरोध कर रहे थे।