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मद्रास हाईकोर्ट: तमिलनाडु में 128 जगहों पर आरएसएस के मार्च को मंजूरी, पुलिस की ओर से बार-बार रोक पर क्या कहा?
Sat, 17 Oct 2026 10:50 AM IST
देवेश त्रिपाठी
एएनआई, चेन्नई
एएनआई, चेन्नई
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sat, 17 Oct 2026 10:50 AM IST
सार
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को 25 अक्तूबर और 1 नवंबर को 128 स्थानों पर रूट मार्च निकालने का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने पुलिस को 19 अक्तूबर तक मार्च के समय, मार्ग और स्थान तय करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने भविष्य में आयोजकों को समय से आवेदन देने और पुलिस को उन पर समयबद्ध फैसला करने की सलाह दी।
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मद्रास हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
मद्रास हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को तमिलनाडु में 25 अक्तूबर और 1 नवंबर को 128 स्थानों पर रूट मार्च निकालने की अनुमति देने का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने पुलिस की ओर से पहले खारिज किए जा चुके कारणों के आधार पर बार-बार अनुमति देने से इनकार करने पर नाराजगी जताई।
न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि पुलिस ने अनुमति देने से इनकार करने के लिए कोई नया कारण नहीं बताया है। अदालत के मुताबिक, पुलिस लगातार उन्हीं कारणों को दोहरा रही है, जिन्हें पहले न्यायालय ने कमजोर आधार बताया था। हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 19 अक्तूबर तक प्रस्तावित रूट मार्च और उसके साथ होने वाली जनसभाओं के समय, मार्ग और स्थान तय कर लें। स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर पुलिस जरूरी बदलाव कर सकती है।
विजयादशमी के अवसर पर मार्च निकालने की मांग
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार, 16 अक्तूबर को आरएसएस के स्थापना दिवस के अवसर पर रूट मार्च निकालने की अनुमति से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। संगठन की ओर से उत्तर तमिलनाडु के राज्य सचिव वी. जी. जगदीशन ने याचिका दायर की थी।
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याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि पुलिस ने संगठन को 18 अक्तूबर, 25 अक्तूबर, 1 नवंबर या किसी अन्य तारीख को वर्दी पहनकर और बैंड के साथ रूट मार्च निकालने तथा उसके बाद जनसभा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
याचिका में कहा गया कि आरएसएस देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे मार्च निकालता रहा है, लेकिन तमिलनाडु में 2022 से अनुमति नहीं दी जा रही थी। इस वजह से संगठन को बार-बार अदालत का रुख करना पड़ रहा था। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आयोजकों की ओर से दिए गए ज्ञापन और अन्य जानकारियों पर विचार करने के बाद पुलिस 19 अक्टूबर तक अनुमति देने का फैसला करेगी। इसके बाद अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया और मार्च की तारीखें 25 अक्तूबर तथा 1 नवंबर तय रखीं।
पुलिस को पुराने कारणों पर अनुमति रोकने से किया आगाह
अदालत ने कहा कि पहले की सुनवाइयों में न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन ने विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए थे, ताकि ऐसे विवादों को लेकर बार-बार मुकदमे दायर न करने पड़ें। इसके बावजूद मामला फिर अदालत के सामने आया। न्यायमूर्ति लक्ष्मीनारायणन ने पुलिस के अनुमति न देने वाले आदेश का भी जिक्र किया। इसमें दूसरे समुदायों के धार्मिक स्थलों की मौजूदगी, यातायात बाधित होने की आशंका और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की संभावना जैसे कारण बताए गए थे।
अदालत ने कहा कि इन कारणों पर पहले भी विचार किया जा चुका है और पुलिस को इन्हें अनुमति से इनकार करने का आधार नहीं बनाने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने अलग विचारधारा वाले संगठनों की मौजूदगी को भी रूट मार्च रोकने का उचित आधार मानने से इनकार किया। हाईकोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु पुलिस ने कोई नया कारण नहीं बताया है, बल्कि उन्हीं वजहों को दोहराया है जिन्हें अदालत पहले कमजोर बता चुकी है।
पुलिस कानून के इस्तेमाल पर भी सवाल
पुलिस ने रूट मार्च की अनुमति से इनकार करने के लिए तमिलनाडु पुलिस (सुधार) अधिनियम, 2013 का भी हवाला दिया था। अदालत ने कहा कि इस कानून पर पहले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विचार हो चुका है। न्यायमूर्ति लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत संगठन बनाने के मौलिक अधिकार पर प्रतिबंध केवल राज्य या संसद के कानून के जरिये लगाया जा सकता है। ऐसा कानून अनुच्छेद 19(3) की शर्तों के अनुरूप होना चाहिए।
अदालत ने कहा कि पहले की सुनवाइयों में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि राज्य के कानून का इस्तेमाल आरएसएस के रूट मार्च निकालने के अधिकार को पूरी तरह समाप्त करने के लिए नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने यह भी कहा कि पुलिस ने अदालत के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवेदनों पर विचार करने के बजाय उन्हीं दिशा-निर्देशों का हवाला देकर अनुमति रोक दी। अदालत ने इस रवैये की तुलना ऐसी स्थिति से की, जिसमें ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण का उपयोग मरीज का इलाज करने के बजाय उसे नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाए।
भविष्य में आवेदन पहले देने की सलाह
हाईकोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस से कहा कि भविष्य में आरएसएस के रूट मार्च की अनुमति को इसी तरह बार-बार खारिज नहीं किया जाना चाहिए, जिससे संगठन को फिर अदालत आना पड़े। अदालत ने आयोजकों से भी कहा कि वे विजयादशमी की तारीख पहले से जानते हैं, इसलिए अनुमति के लिए समय रहते आवेदन करें। पुलिस को निर्देश दिया गया कि भविष्य में आवेदन मिलने पर उन्हें लंबित न रखा जाए और तय दिशा-निर्देशों के अनुसार समय पर निर्णय लिया जाए।
महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 25 अक्तूबर और 1 नवंबर को प्रस्तावित मार्च स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पुलिस की ओर से किए जाने वाले बदलावों के अधीन हो सकते हैं। अदालत ने इस बात को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
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न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि पुलिस ने अनुमति देने से इनकार करने के लिए कोई नया कारण नहीं बताया है। अदालत के मुताबिक, पुलिस लगातार उन्हीं कारणों को दोहरा रही है, जिन्हें पहले न्यायालय ने कमजोर आधार बताया था। हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 19 अक्तूबर तक प्रस्तावित रूट मार्च और उसके साथ होने वाली जनसभाओं के समय, मार्ग और स्थान तय कर लें। स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर पुलिस जरूरी बदलाव कर सकती है।
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विजयादशमी के अवसर पर मार्च निकालने की मांग
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार, 16 अक्तूबर को आरएसएस के स्थापना दिवस के अवसर पर रूट मार्च निकालने की अनुमति से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। संगठन की ओर से उत्तर तमिलनाडु के राज्य सचिव वी. जी. जगदीशन ने याचिका दायर की थी।
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Madras High Court has permitted RSS route marches across 128 locations in Tamil Nadu on October 25 and November 1. Justice V Lakshminarayanan criticised Tamil Nadu Police for repeatedly denying permission on grounds already rejected by courts.
— ANI (@ANI) October 17, 2026
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि पुलिस ने संगठन को 18 अक्तूबर, 25 अक्तूबर, 1 नवंबर या किसी अन्य तारीख को वर्दी पहनकर और बैंड के साथ रूट मार्च निकालने तथा उसके बाद जनसभा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
याचिका में कहा गया कि आरएसएस देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे मार्च निकालता रहा है, लेकिन तमिलनाडु में 2022 से अनुमति नहीं दी जा रही थी। इस वजह से संगठन को बार-बार अदालत का रुख करना पड़ रहा था। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आयोजकों की ओर से दिए गए ज्ञापन और अन्य जानकारियों पर विचार करने के बाद पुलिस 19 अक्टूबर तक अनुमति देने का फैसला करेगी। इसके बाद अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया और मार्च की तारीखें 25 अक्तूबर तथा 1 नवंबर तय रखीं।
पुलिस को पुराने कारणों पर अनुमति रोकने से किया आगाह
अदालत ने कहा कि पहले की सुनवाइयों में न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन ने विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए थे, ताकि ऐसे विवादों को लेकर बार-बार मुकदमे दायर न करने पड़ें। इसके बावजूद मामला फिर अदालत के सामने आया। न्यायमूर्ति लक्ष्मीनारायणन ने पुलिस के अनुमति न देने वाले आदेश का भी जिक्र किया। इसमें दूसरे समुदायों के धार्मिक स्थलों की मौजूदगी, यातायात बाधित होने की आशंका और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की संभावना जैसे कारण बताए गए थे।
अदालत ने कहा कि इन कारणों पर पहले भी विचार किया जा चुका है और पुलिस को इन्हें अनुमति से इनकार करने का आधार नहीं बनाने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने अलग विचारधारा वाले संगठनों की मौजूदगी को भी रूट मार्च रोकने का उचित आधार मानने से इनकार किया। हाईकोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु पुलिस ने कोई नया कारण नहीं बताया है, बल्कि उन्हीं वजहों को दोहराया है जिन्हें अदालत पहले कमजोर बता चुकी है।
पुलिस कानून के इस्तेमाल पर भी सवाल
पुलिस ने रूट मार्च की अनुमति से इनकार करने के लिए तमिलनाडु पुलिस (सुधार) अधिनियम, 2013 का भी हवाला दिया था। अदालत ने कहा कि इस कानून पर पहले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विचार हो चुका है। न्यायमूर्ति लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत संगठन बनाने के मौलिक अधिकार पर प्रतिबंध केवल राज्य या संसद के कानून के जरिये लगाया जा सकता है। ऐसा कानून अनुच्छेद 19(3) की शर्तों के अनुरूप होना चाहिए।
अदालत ने कहा कि पहले की सुनवाइयों में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि राज्य के कानून का इस्तेमाल आरएसएस के रूट मार्च निकालने के अधिकार को पूरी तरह समाप्त करने के लिए नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने यह भी कहा कि पुलिस ने अदालत के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवेदनों पर विचार करने के बजाय उन्हीं दिशा-निर्देशों का हवाला देकर अनुमति रोक दी। अदालत ने इस रवैये की तुलना ऐसी स्थिति से की, जिसमें ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण का उपयोग मरीज का इलाज करने के बजाय उसे नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाए।
भविष्य में आवेदन पहले देने की सलाह
हाईकोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस से कहा कि भविष्य में आरएसएस के रूट मार्च की अनुमति को इसी तरह बार-बार खारिज नहीं किया जाना चाहिए, जिससे संगठन को फिर अदालत आना पड़े। अदालत ने आयोजकों से भी कहा कि वे विजयादशमी की तारीख पहले से जानते हैं, इसलिए अनुमति के लिए समय रहते आवेदन करें। पुलिस को निर्देश दिया गया कि भविष्य में आवेदन मिलने पर उन्हें लंबित न रखा जाए और तय दिशा-निर्देशों के अनुसार समय पर निर्णय लिया जाए।
महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 25 अक्तूबर और 1 नवंबर को प्रस्तावित मार्च स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पुलिस की ओर से किए जाने वाले बदलावों के अधीन हो सकते हैं। अदालत ने इस बात को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।