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मध्यप्रदेश: सिंधिया समर्थक सभी 16 विधायकों का इस्तीफा मंजूर, बहुमत परीक्षण से पहले ही इस्तीफा दे सकते हैं सीएम कमलनाथ

Fri, 20 Mar 2020 12:14 AM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/भोपाल Published by: Amit Mandal Updated Fri, 20 Mar 2020 12:14 AM IST
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Madhya Pradesh: Supreme Court continued hearing the petition filed by BJP
मध्यप्रदेश राजनीतिक संकट - फोटो : ANI

मध्यप्रदेश की सियासत बीते 10 दिन में कई करवट ले चुकी है। ताजा घटनाक्रम में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। राज्य के सियासी गलियारों से खबर है कि वह बहुमत परीक्षण से पहले ही इस्तीफा भी दे सकते हैं। इसके साथ ही कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक कांग्रेस के सभी बागी 16 विधायकों के इस्तीफे भी मंजूर हो चुके हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा स्पीकर एनपी प्रजापति ने बताया कि कांग्रेस के बागी 16 विधायकों के इस्तीफे मंजूर किए जा चुके हैं। 10 मार्च को विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था।

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सुप्रीम कोर्ट ने दिया बहुमत परीक्षण का आदेश

इससे पहले मध्यप्रदेश संकट को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि कल सदन में बहुमत परीक्षण कराया जाए। शाम पांच बजे तक पूरी प्रक्रिया खत्म करने का आदेश दिया गया है। अदालत ने कहा कि अगर बागी विधायक विधानसभा आना चाहें तो कर्नाटक और मध्यप्रदेश के डीजीपी को उन्हें सुरक्षा देनी होगी। अदालत ने कहा कि बहुमत परीक्षण की वीडियोग्राफी भी कराई जाए। इस फैसले के बाद कांग्रेस और भाजपा की तरफ से सियासी बयानबाजियों का दौर तेज हो गया।
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विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने के बाद छलका स्पीकर का दर्द
कांग्रेस के बागी 16 विधायकों के इस्तीफे मंजूर करने के बाद विधानसभा स्पीकर एनपी प्रजापति का दर्द छलक गया है। स्पीकर एनपी प्रजापति ने कहा कि वे दुखी हैं। कहा कि और उन्होंने भारी मन से ये इस्तीफे इसलिए स्वीकार किए क्योंकि बागी विधायक मेरे खिलाफ ही कोर्ट में खड़े हो गये.. ये लोकतंत्र की बिडंबना है। 
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शिवराज बोले- सत्यमेव जयते
भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं। सत्यमेव जयते। कल सत्य की जीत होगी। अल्पमत की सरकार गिरेगी। ये न सिर्फ अल्पमत की सरकार है बल्कि जनता को धोखा देने वाली सरकार है। सीएम कमलनाथ ने लोगों को धोखा दिया है। आज अन्याय की पराजय हुई है। वहीं, नेता विपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि मैं इस फैसले का स्वागत करता हूं। बहुमत परीक्षण में सबकुछ साबित हो जाएगा।


कमलनाथ से मिलने पहुंचे जीतू पटवारी 
उधर, अदालत के फैसले के बाद भोपाल में सियासी हलचल तेज हो गई। मंत्री जीतू पटवारी मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलने उनके आवास पहुंचे। 
 
कांग्रेस ने जारी किया व्हिप
मध्यप्रदेश कांग्रेस विधायक दल ने व्हिप जारी करके विधायकों से विश्वासमत के दौरान कमलनाथ सरकार का समर्थन करने को कहा।

क्या-क्या दलीलें
राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने आज भी अदालत में दलीलें रखीं। उन्होंने दोहराया कि फ्लोर टेस्ट करवाना है या नहीं, यह स्पीकर के विवेक पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि विधायकों की गैरमौजूदगी से सदन में संख्याबल कम रह जाएगा। 

जब जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि ऐसे में क्या किया जाए, क्या स्पीकर को विधायकों के इस्तीफे पर फैसला नहीं लेना चाहिए। इसपर सिंघवी ने सुझाव दिया कि स्पीकर पर इस पर फैसला लेकिन के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। 

इसपर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि बागी विधायक अपनी इच्छा से काम कर रहे हैं या नहीं इस पर पर्यवेक्षक नियुक्त करने किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त करने से बागी विधायकों के किसी डर से कैद में रहने की बात की सच्चाई भी सामने आ जाएगी। विधायकों की तरफ से पेश हुए वकील मनिंदर सिंह भी इस बात पर राजी हो गए। 

बुधवार को क्या हुआ? 

मध्यप्रदेश के सियासी संकट पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को विधानसभा स्पीकर से पूछा कि वह कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे पर फैसला लेने में विलंब क्यों कर रहे हैं और इस पर फैसला कब तक होगा। इस पर स्पीकर के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, वह इस संबंध में गुरुवार को बता पाएंगे। भाजपा की ओर से कमलनाथ सरकार को तत्काल बहुमत परीक्षण का निर्देश देने के लिए दायर याचिका पर चार घंटे चली बहस के बाद गुरुवार सुबह 10:30 बजे फिर सुनवाई टाल दी गई।


जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने स्पीकर से पूछा, आपने 16 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार क्यों नहीं किए? संतुष्ट नहीं तो नामंजूर कर सकते थे। जस्टिस चंद्रचूड़ ने 16 मार्च को विधानसभा का बजट सत्र स्थगित करने हैरानी जताते हुए पूछा, बजट पास नहीं होगा तो राज्य का कामकाज कैसे होगा? पीठ ने कहा, हम यह तय नहीं कर सकते कि सदन में किसे बहुमत है। यह काम विधायिका का है। सांविधानिक अदालत के तौर पर हमें अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना है। 

याचिकाकर्ताओं के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा, इस्तीफे के बाद सरकार अल्पमत में है। वहीं, सिंघवी ने कहा, दलबदल कानून से बचने के लिए इस्तीफा एक चाल है। सभी विधायकों के इस्तीफे दो पंक्ति के थे। ज्यादातर एक व्यक्ति ने लिखे थे। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है, जिसमें कथित रूप से भाजपा द्वारा बंदी बनाए 16 बागी विधायकों तक पहुंच देने की मांग की गई है।

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