भारत में बना 'तेजस' एयर-शो में दिखाएगा अपना जलवा
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देसी तकनीक से बना लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट ‘तेजस’ पहली बार वायुसेना दिवस पर अपना जलवा दिखाएगा। देश के साथ ही विदेशी भी आठ अक्तूबर को एरोनॉटिक्स में भारत की ताकत का प्रदर्शन देखेंगे। ‘तेजस’ की स्क्वॉड्रन एयरफोर्स-डे के लिए तैयार है। वायु सैनिकों ने आठ अक्तूबर को हिंडन एयरबेस पर होने वाले एयरफोर्स-डे समारोह की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
इस एयरफोर्स-डे पर हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचसीएल) द्वारा निर्मित लड़ाकू विमान ‘तेजस’ आकर्षण का केंद्र रहेगा। एक जुलाई को बनी वायुसेना की 45वीं स्क्वॉड्रन ‘फ्लाइंग डैगर्स’ पहली बार देश के सामने तेजस की झलक दिखाएगी। शुरुआत में दो तेजस विमानों के वायुसेना में शामिल होने के बाद से अभी तक इसका सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि एयरफोर्स-डे पर मिराज, जगुआर और सुखोई के साथ तेजस भी उड़ान भरेगा। एयरफोर्स के पश्चिमी कमांड के पीआरओ ग्रुप कैप्टन संदीप मेहता ने बताया कि ‘फ्लाइंग डैगर्स’ एयरफोर्स-डे पर परफॉर्म करने के लिए पूरी तरह तैयार है। तेजस का बेस बंगलूरू में है, मगर स्क्वॉड्रन हिंडन आकर लगातार एयर-शो की रिहर्सल में जुटी है।
अपनी श्रेणी का सबसे छोटा और ताकतवर विमान है ‘तेजस’
लाइट कॉम्बेट एयरक्रॉफ्ट की श्रेणी में आने वाले अन्य विमानों की तुलना में तेजस सबसे छोटा और हल्का होते हुए भी सबसे ज्यादा ताकतवर है। विमान को हल्का रखने के लिए पूंछ रहित बनाया गया है। ‘रिलैक्स्ड स्टेटिक्स स्टैबिलिटी’ से लैस यह विमान दुश्मन पर सटीक हमला करने में सक्षम है।
जमीन पर दुश्मन को ध्वस्त करने के साथ ही यह आसमान में दुश्मन को मूक बम (साइलेंट बम) बनकर धराशायी करने की क्षमता रखता है। वायुसेना विशेषज्ञों की मानें तो इसकी संरचना ऐसी है कि वायुसेना के अलावा यह नौ सेना में शामिल होने के बाद समुद्री दुश्मन के लिए भी घातक साबित होगा।