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सुप्रीम कोर्ट: ईडी ने माना, आम्रपाली ग्रुप के पूर्व निदेशक की संपत्ति जब्त करने में हुई गलती
Mon, 11 Apr 2022 10:52 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 11 Apr 2022 10:52 PM IST
सार
अधिकारियों ने आम्रपाली समूह के पूर्व निदेशक प्रेम मिश्रा की करीब 4.79 करोड़ रुपये की गलत संपत्ति कुर्क की थी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष स्वीकार किया कि एजेंसी ने आम्रपाली समूह के एक पूर्व निदेशक की संपत्ति को अपराध की आय के रूप में अस्थायी रूप से कुर्क करने में वास्तविक त्रुटि की। ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ को बताया कि अधिकारियों ने आम्रपाली समूह के पूर्व निदेशक प्रेम मिश्रा की करीब 4.79 करोड़ रुपये की गलत संपत्ति कुर्क की। जैन ने कहा कि यह जांच एजेंसी की ओर से एक वास्तविक त्रुटि थी क्योंकि उसने इन संपत्तियों को अपराध की आय के रूप में माना था।
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उन्होंने अदालत से यह निर्देश देने की मांग की कि सक्षम प्राधिकारी को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग करके कुर्क की गई संपत्तियों को मिश्रा की निजी संपत्तियों से बदलने के लिए कहा जाए। पीठ ने इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह ऐसा कोई आदेश पारित नहीं कर सकती क्योंकि यह उचित नहीं होगा। जैन ने आग्रह किया कि एक और निर्देश पारित करने की आवश्यकता है, वह यह है कि जिन संपत्तियों को कुर्क किया गया है, वे अदालत के रिसीवर वरिष्ठ अधिवक्ता आर वेंकटरमणि की हिरासत में रहें। पीठ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख रही है और उचित आदेश पारित करेगी।
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राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे, ने कहा कि उन्हें अब तक 540 करोड़ रुपये में से 150 करोड़ रुपये दिए गए हैं। बैंकों द्वारा भुगतान किया जाना है और परियोजनाओं के आगे निर्माण के लिए धन की आवश्यकता है। वेंकटरमणि ने कहा कि यह बैंकों के कंसोर्टियम सात बैंकों को एनबीसीसी का भुगतान करने पर निर्भर है। पीठ ने कहा कि बैंकों द्वारा जताई गई आशंका को 4 अप्रैल को उसके आदेश द्वारा ध्यान में रखा गया है और अब एनबीसीसी के लिए जरूरी 540 करोड़ रुपये जारी करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।
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