माया की रैली में ‘एम’ फैक्टर हावी, मोदी से मोहन भागवत तक पर निशाना
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मैदान मीना बाजार का। मंडलीय रैली बसपा अध्यक्ष मायावती की। ‘एम’ फैक्टर का यह संयोग न केवल पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से जुड़ा, बल्कि पूरी रैली में यह ‘एम’ फैक्टर हावी भी रहा। मोदी, मुलायम, मोहन भागवत, मुस्लिम, मान सम्मान, मौर्य और मीडिया पर ही मायावती का फोकस रहा।
सर्वजन हिताय रैली में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने नौ बार मोदी, 15 बार भाजपा, 13 बार सपा, तीन बार मुलायम, एक बार अखिलेश, कांग्रेस का छह बार नाम लिया, लेकिन फोकस पूरी तरह से मोदी और मुलायम पर ही रहा। मोदी सरकार पर सबसे ज्यादा हमले के बाद बारी मुलायम की आई।
गेस्ट हाउस कांड का जिक्र कर कानून व्यवस्था पर मुलायम को घेरा तो महिला उत्पीड़न की घटनाओं को रैली में प्रमुखता से उठाया तो वहीं, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत से भी सवाल पूछे। माया ने मिशन मूवमेंट पर बसपा कार्यकर्ताओं से स्वामी प्रसाद मौर्य का नाम लिए बगैर कहा कि बड़े से बड़े नेता व्यक्तिगत स्वार्थ या विरोधी दलों के हाथों में खेलकर पार्टी से चले जाते हैं तो अकेले ही जाते हैं। समाज अपना नया नेता तैयार करता है।
मीडिया पर भी माया के हमले
मुस्लिम समाज को साथ जोड़ने पर जोर दिया तो मीडिया में बसपा छोड़कर जाने वालों की खबरें ज्यादा दिखाने पर हमले भी किए। बसपा में मची भगदड़ और टिकट बेचने के आरोप पर सफाई देते हुए माया ने कहा कि विरोधी दुष्प्रचार कर रहे हैं। अगर पार्टी में भगदड़ मची है, नेता छोड़ रहे हैं तो टिकट कौन खरीद रहा है।
माया ने कहा कि दलित वोटबैंक में सेंध लगाने के लिए भाजपा धर्म की घिनौनी राजनीति कर रही है। दलितों, पिछड़ों को हिंदू-हिंदू कहकर साथ जोड़ने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे तो बौद्ध धर्म की आड़ में धम्म चेतना यात्रा निकाली।
आरएसएस के लोगों को नकली दलित बनाया, सिर मुंडवाया और नकली बौद्ध भिक्षु बनाकर मोदी के इशारे पर भेजा, लेकिन उनके षड्यंत्र की पोल खुल गई। यात्रा को बीच में छोड़कर भागना पड़ा।