{"_id":"572371cd4f1c1b3969a914f1","slug":"loosely-arranged-fund-book-in-mgnrega","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनरेगा में फंड के हिसाब -किताब की व्यवस्था लचर","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
मनरेगा में फंड के हिसाब -किताब की व्यवस्था लचर
राघवेंद्र नारायण मिश्र/ अमर उजाला,नई दिल्ली
Updated Fri, 29 Apr 2016 08:08 PM IST
सार
- सीएजी ने सामाजिक लेखा परीक्षा की पुख्ता व्यवस्था नहीं किए जाने पर जताया एतराज
- उत्तर प्रदेश में घोटालों के 444 मामले जांच के लिए लंबित
विज्ञापन
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने मनरेगा में फंड के हिसाब-किताब रखने की लचर व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। सामाजिक लेखा परीक्षा के पारदर्शिता लाने के महात्वाकांक्षी लक्ष्य को कई राज्यों में पूरा नहीं किया जा सका है। सीएजी ने लेखा परीक्षा के निष्कर्षों पर जनसुनवाई की उपेक्षा को भी रेखांकित किया है। उत्तर प्रदेश में गड़बड़ियों के मामले में सिर्फ सात एफआईआर दर्ज हुए जबकि 16 जिलों में जांच के लिए 444 मामले लंबित हैं।
विज्ञापन
सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत सात राज्यों में मनरेगा के बारे में सूचनाएं देने जनसंपर्क में भारी कमी पाई गई। प्रावदान के तहत घर-घर जाकर सूचनाएं दी जानी थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। स्वतंत्र लेखापरीक्षा इकाई गठित कि जाने के प्रावधान पर भी कई राज्यों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। सीएजी ने पाया कि हरियाणा, पंजाब और बिहार समेत 8 राज्यों में सामाजिक लेखा परीक्षा इकाई स्वतंत्र नहीं है अलबत्ता उसे राज्य सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के एक सेल के रूप में कार्यरत किया गया है। इन राज्यों में ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को ही जांच इकाई के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश समेत 10 राज्यों में समितियां और एनजीओ अपने अध्यक्ष के रूप में पूर्णकालिक निदेशक के साथ स्वतंत्र लेखा परीक्षा इकाई के रूप में काम कर रही हैं। हिमाचल प्रदेश, जम्मूकश्मीर, उत्तराखंड समेत चार राज्यों में प्रावधान का खुला उल्लंघन पाया गया। इन राज्यों में लेखा परीक्षा इकाई के रूप में कार्यान्वयन एजेंसी को ही अधिकृत कर दिया गया है। अरुणाचल प्रदेश में यह काम एक निजी एजेंसी को दे दिया गया और काम पूरा कराए बगैर भुगतान भी कर दिया गया।
विज्ञापन
सीएजी ने पाया कि देश के 15 राज्यों में सामाजिक लेखा परीक्षा के लिए स्वतंत्र इकाई गठित नहीं किया गया है। जिन 14 राज्यों में यह इकाई गठित हुई उनमें से चार राज्यों में अध्यक्षता विभागीय अधिकारी ही कर रहे हैं। प्रावधान के तहत रिर्सोस पर्सन की नियुक्ति की जानी थी और इसके लिए मापंदेड भी तय थे लेकिन उनका पालन नहीं हुआ। कुछ राज्यों ने इस मापदंड को दरकिनार कर दिया। सीएजी ने ग्रामीण विकास मंत्रालय को सुझाव दिया है कि वह स्वतंत्र लेखा परीक्षा इकाई के गठन के लिए राज्यों पर दबाव डाले। साथ ही पर्याप्त प्रशिक्षित रिसोर्स पर्सन की नियुक्ति भी सुनिश्चित की जाए।
सीएजी ने पाया कि उत्तर प्रदेश और जम्मू कश्मीर समेत 14 राज्यों में सामाजिक लेखा परीक्षा के लिए वार्षिक कलेंडर नहीं बनाए गए। हमिचल प्रदेश समेत छह राज्यों ने इस बारे में कोई सूचना नहीं दी। उत्तर प्रदेश में नमूने के तौर पर 50 ग्राम पंचायतों में जांच हुई तो पाया गया कि 50 में से 45 ग्राम पंचायतों में 15 दिन पहले रिकार्ड उपलब्ध नहीं कराए गए थे। तेरह ग्राम पंचायतों को उसी दिन रिकार्ड दिए गए जिस दिन बैठक थी। उत्तर प्रदेश समेत चार राज्यों में परियोजना स्थलों के प्रत्यक्ष सत्यापन का प्रमाण नहीं मिला। सीएजी ने हरियाणा और पंजाब की कमियों को भी रेखांकित किया है।