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सीटों की शेयरिंग तक भाजपा और कांग्रेस को साधने में जुटी है जदयू, नीतीश के तेवर ने दिये संकेत

Mon, 09 Jul 2018 11:50 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 09 Jul 2018 11:50 AM IST
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loksabha election 2019  if bjp ignore Nitish Kumar it may be suicidal for them

राजनीतिक पार्टियां लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जोड़ तोड़ की राजनीति में जुटी हुई है। आम चुनाव वैसे तो 2019 में होने हैं लेकिन उसकी गरमाहट अभी से बिहार में दिखाई दे रही है। 

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चुनाव को नौ महीने या उससे भी कम का समय बचा है लेकिन जिस तरह से सीट बंटवारे को लेकर बिहार में जदयू, भाजपा, कांग्रेस, बीजेपी सहित क्षेत्रीय दलों के बीच घमासान मचा है उससे लगने लगा है कि इस बार का चुनाव बहुत ही रोचक होने वाला है।
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एक तरफ बिहार का नेतृत्व कर रही जदयू बिहार के बाहर चार राज्यों में अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने का एलान कर चुकी है। 2019 के चुनाव में सम्मानजनक सीट बंटवारे को लेकर पिछले कई महीनों बयानबाजी कर रही है।   
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 मुख्यमंत्री नीतीश क्यों बने हैं हॉट केक

 बिहार में नीतीश कुमार हॉट केक बने हुए हैं। राजद, कांग्रेस हो या फिर भाजपा हर कोई किसी तरह से नीतीश को अपने पाले में लाना चाहती है। लेकिन राजग के साथ गठबंधन को देखते हुए नीतीश अभी किसी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं। 

 2014 के चुनाव में मोदी लहर के बाद भी बिहार की जनता ने नीतीश का साथ दिया था पार्टी उसे अब भुनाना चाहती है। वहीं राजनीति के जानकार भी मान रहे हैं कि नीतीश ही फिलहाल बिहार का चेहरा हैं। 
जिसे बहाने बहाने से कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा अपने पाले में रखना चाहती है। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का 11 जुलाई का दौरा भी इसी जोड़ को और मजबूत करने के लिए है। रविवार को जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जिस तरह से पार्टी नेताओं ने अपनी बातें सामने रखीं हैं उससे यह स्पष्ट हो गया है कि इस बार गठबंधन जदयू अपनी शर्तों पर करने जा रहा है।

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नीतीश नहीं हैं जल्दबाजी में

बैठक में हुई बयानबाजी से साफ है कि नीतीश कुमार किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं है। वह इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि भाजपा उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए कितनी सीटों का ऑफर देती है। वहीं जदयू का एक धड़ा राहुल गांधी से भी बातचीत में जुटा है। केसी त्यागी इस बीच राहुल से मुलाकात भी कर चुके हैं।
 

कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश ने राहुल गांधी पर निशाना साधा हो लेकिन भाजपा को भी 2014 की याद दिला दी है कि किस तरह से पार्टी ने बुरी स्थिति में भी 17 फीसदी वोट हासिल किए थे। उन्होंने यह भी कहा कि  हमें कोई इग्नोर नहीं कर सकता। इग्नोर करने वाला खुद इग्नोर हो जाएगा।

नीतीश ने इस दौरान भ्रष्टाचार, अपराध और सांप्रदायिकता  के खिलाफ सख्ती से पेश आने की बात दुहराई और कहा सत्ता रहे या जाए वह इन तीन मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेंगे। हालांकि इस दौरान जदयू ने अगला लोकसभा चुनाव राजग के साथ लड़ने की भी घोषणा की। नीतीश ने कहा कि उनके महागठबंधन में जाने की बात फैलाई जा रही है। उन्हें किनारे करने केलिए साजिश के तहत ऐसी बातें फैलाई जा रही। सच्चाई यह है कि कोई उन्हें न तो अलग-थलग कर सकता है और न ही कोई नजरअंदाज ही कर सकता है।

क्यों बिहार में भाजपा के नेता नीतीश कुमार को अलग-थलग करने में जुटे हैं

लेकिन इसबार बिहार में गठबंधन इतना आसान नहीं होने जा रहा है। बताया जा रहा है कि बिहार भाजपा के नेता इसबार नीतीश कुमार को अलग-थलग कर चुनाव लड़ने का मन बना रही है। और ऐसा मान रही है कि नीतीश के गठबंधन से हटने का फायदा भाजपा को मिलेगा। हालांकि यह सब इतना आसान नहीं है।  बिहार भाजपा के पुराने नेताओं का कहना है कि जमीनी हकीकत इससे विपरीत है, नीतीश के बिना चुनाव में जाना आत्मघाती होगा। 

सीटों के तालमेल पर फिलहाल भाजपा की तरफ से ऑफर आने का इंतजार कर रहे नीतीश ने भले ही चालाकी से अपने पाले की गेंद भाजपा के पाले में डाल दी हो लेकिन पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेताओं का मानना कि अगर भाजपा सहयोगी के रूप में जदयू को चाहती है को सम्मानजनक सीटों की संख्या बताएं नहीं तो पार्टी अपने भविष्य के बारे में सोचेगी। 

 बिहार को करीब से देखने वालों का यह भी मानना है कि भले ही भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व वाला एक गुट जो नीतीश को अलग-थलग कर चुनाव में जाने कि तैयारी में लगा है, वह यह भी चाह रहा है कि लालू और नीतीश में किसी तरह से मिलाप न हो। वह बहाने बहाने से कभी तेज प्रताप तो कभी तेजस्वी के बहाने फूट डालने में लगी है। यही वजह है कि लालू के लाल के निशाने पर हमेशा नीतीश बने हुए हैं। 

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