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शिवसेना का सरकार पर निशाना, 'जवानों का बदला तो ले लिया, खुदकुशी करने वाले किसानों का क्या?'
Wed, 06 Mar 2019 05:07 PM IST
ललित फुलारा
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ललित फुलारा
Updated Wed, 06 Mar 2019 05:07 PM IST
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शिवसेना प्रमुख उद्घव ठाकरे
- फोटो : amar ujala
महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सहयोगी शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय लेख के जरिए भाजपा पर निशाना साधा है। शिवसेना का कहना है कि एयर स्ट्राइक के जोश ने किसानों की खुदकुशी के मुद्दे को भुला दिया है। महाराष्ट्र के बीड में एक दिन में तीन किसानों ने खुदकुशी की है जो बेहद गंभीर है। संपादकीय लेख में लिखा गया है कि नांदेड़ में दो महीनों में 18 किसानों ने खुदकुशी की है। 350 तहसीलों में से 180 को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है। मराठवाड़ा और विदर्भ में हालात 1972 के सूखे से भी अधिक खराब हैं। यह संपादकीय लेख ‘सामना’ में शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने लिखा है जो कि मंगलवार को प्रकाशित हुआ है।
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'भारत लोकतांत्रिक देश है, हर किसी को है सवाल करने का अधिकार'
‘सामना’ के संपादकीय लेख में पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायुसेना के एयर स्ट्राइक को लेकर पूछे जा रहे सवालों के संदर्भ में लिखा गया है कि हर एक को सवाल करने का अधिकार है। हमारा देश लोकतांत्रिक देश है। लोगों को जानने का अधिकार है और इन सवालों से भारतीय सेनाओं का मनोबल नहीं गिरेगा। गौरतलब है कि पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर भारतीय वायुसेना के एयर स्ट्राइक के बाद विपक्ष ने मारे गए आतंकियों की संख्या पर सवाल उठाया था। इस पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच काफी जुबानी जंग भी चली।
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'जवानों का बदला तो ले लिया मारे गए किसानों को बदला कौन लेगा?'
संपादकीय में लिखा गया है कि ऐसी बातें सामने आ रही हैं कि चुनाव आयोग की तरफ से किसी भी वक्त आचार संहिता लागू हो जाएगी। चुनाव आचार संहिता से पहले उद्घाटनों में नई घोषणाओं के बारे में सुना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की अनेक रैलियों में भी हमने ऐसा ही सुना। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी पीछे नहीं हैं। हालात बहुत विकट हैं और किसान अपनी गाय बेचने को मजबूर हैं। बाद में उनका क्या होगा? सारे गौरक्षकों को पता लगाना चाहिए। संपादकीय में पुलवामा हमले में शहीद जवानों का बदला लेने के लिए सरकार की प्रशंसा की गई है लेकिन साथ ही किसानों के मारे जाने को लेकर सवाल भी पूछा गया है। संपादकीय में लिखा गया है कि जवानों की तरह ही हमारे किसानों के मारे जाने का बदला कौन लेगा?
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