विशेष: डॉ. हर्षवर्धन बोले, दिल्ली की जनता राष्ट्रवाद, मोदी और विकास के नाम पर वोट करेगी
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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन दिल्ली की चांदनी चौक सीट से एक बार फिर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। चांदनी चौक सीट व्यापारी बहुल है जिन्हें सीलिंग से बहुत नुकसान हुआ बताया जा रहा है। ऐसे में डॉ. हर्षवर्धन का चुनाव कैसा चल रहा है और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनकी क्या राय है, यह समझने के लिए अमर उजाला के संवाददाता अमित शर्मा ने उनसे मुलाकात की। प्रस्तुत है वार्ता के प्रमुख अंश-
-आपका लोकसभा क्षेत्र व्यापारी बहुल है। दिल्ली में हो रही सीलिंग के कारण व्यापारी बहुत नाराज बताए जा रहे हैं। आपका क्या कहना है?
व्यापारियों को सीलिंग की वजह से नुकसान हुआ है, यह सही है। लेकिन मैं आपको बहुत विश्वास के साथ बताना चाहता हूं कि उनमें सरकार के खिलाफ कोई भी गुस्सा नहीं है। इसका कारण यह है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 'व्यापारी आयोग' बनाने का वादा कर व्यापारियों की बड़ी मांग पूरी कर दी है। इसके अलावा छोटे व्यापारियों को पेंशन देने की व्यवस्था भी अभूतपूर्व योजना है। अनेक योजनाओं के कारण व्यापार करने में सुविधा हुई है, अनेक वर्गों को कुछ हजार रुपये से लेकर करोड़ों रुपये तक का कर्ज लेना आसान हुआ है, व्यापारी क्रेडिट कार्ड के जरिए भी उन्हें लाभ पहुंचाने की योजना है। यही कारण है कि व्यापारी इस बार भी एकजुट होकर भाजपा को वोट करने जा रहा है।
-पूरे देश में भाजपा नरेंद्र मोदी के ब्रांड नाम पर वोट मांग रही है। आपको क्या लग रहा है दिल्ली में किन मुद्दों पर वोटिंग होगी?
विकास और ब्रांड कभी अलग-अलग करके नहीं देखे जा सकते। जब आप काम करते हैं तभी आप एक ब्रांड बन सकते हैं। नरेंद्र मोदी सरकार की एक-एक योजना के पांच-सात से करोड़ों लोग लाभार्थी हुए हैं। अब इन लाभार्थियों के लिए नरेंद्र मोदी एक ब्रांड नहीं होंगे तो और क्या होंगे। जनता को लगता है कि मोदी ईमानदार आदमी हैं, लोगों को लगता है कि वह दिन रात हमारे लिए काम कर रहे हैं, गरीबों के हित के लिए ईमानदारी से काम कर रहे हैं, यही सब बातें हैं जिनकी वजह से चुनाव पूरी तरह उनके नाम पर हो गया है। इसके अलावा, मैं मानता हूं दिल्ली की जनता राष्ट्रवादी है। अपने हित के पहले राष्ट्र की बात सोचना इस जनता की सबसे बड़ी खासियत है। इसलिए मेरा मानना है कि दिल्ली की जनता भी राष्ट्रवाद, नरेंद्र मोदी और विकास के नाम पर वोट देने जा रही है।
-चांदनी चौक सीट पर इस बार आपका मुकाबला किससे है?
(हंसते हुए) यह बड़ा परंपरागत सवाल हो गया है कि आपका मुकाबला किससे है। लेकिन मेरा मानना है कि आप और कांग्रेस के बीच दूसरे और तीसरे नंबर के लिए मुकाबला हो रहा है।
-साल 2014 में नरेंद्र मोदी को सरकार बनाने में सबसे बड़ी भूमिका उत्तर प्रदेश ने निभाई थी। इस बार वहां गठबंधन बीजेपी के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। ऐसे में आपको क्या लगता है कि आप इस बार भी सरकार बनाने में सफल होंगे?
देखिए मैं एक डॉक्टर हूं। हमें ऑपरेशन के लिए चीजों को बिल्कुल माइक्रोस्कोपिक नजर से देखना पड़ता है जिससे कोई गलती न हो। मैं चार बार दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुका हूं तो मुझे राजनीति को भी थोड़ा-बहुत परखने की कला आ गई है। मैं आपसे बड़े भरोसे के साथ कहना चाहता हूं कि इस चुनाव के बाद महागठबंधन करने वाले 'गठबंधन' शब्द कहना भी भूल जाएंगे। यह अद्भुत चुनाव है जो सिर्फ एक व्यक्ति के नाम पर लड़ा जा रहा है। बल्कि मैं यह कहना चाहूंगा कि यह चुनाव आम जनता लड़ रही है। क्योंकि लोगों को लगता है कि नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनना चाहिए।
-अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में आयुष्मान योजना, गरीब सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण की योजना लांच नहीं की है। क्या इनका असर भी चुनाव पर पड़ेगा?
मैं एक राजनेता होने के नाते नहीं, एक सामान्य दिल्लीवासी होने के नाते कह सकता हूं कि भविष्य में जब भी इसकी स्वतंत्र समीक्षा की जाएगी, कोई भी दिल्लीवासी अरविंद केजरीवाल को माफ नहीं कर पाएगा। एक परिवार का सदस्य बीमार है, उसे लाखों का मुफ्त इलाज मिल सकता है, लेकिन अरविंद केजरीवाल की एक जिद के कारण उन्हें यह लाभ नहीं मिल पाया। जबकि पूरे देश से लगभग बीस लाख लोगों ने इस योजना का अब तक फायदा उठा लिया है। मेरे ट्विटर पर आप देखिए, कितने हिंदू-मुस्लिम परिवार मोदी सरकार का धन्यवाद कर रहे हैं कि उनके परिवार की जान बची। लेकिन दिल्ली में लोगों को यही लाभ नहीं मिल पाया। अब कौन परिवार होगा जो इसके लिए केजरीवाल को माफ कर पाएगा।
-अगर दिल्ली की बात करें, तो क्या ये चुनाव परिणाम कुछ महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को भी प्रभावित करेंगे। क्या इसे जनता की अरविंद केजरीवाल सरकार पर एक टिप्पणी के रूप में देखा जाना चाहिए?
इस बात में तो कोई शक नहीं है कि अरविंद केजरीवाल जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं। अगर ऐसा न होता तो 70 में 67 सीट जीतने वाले व्यक्ति को शून्य सीट वाली पार्टी के सामने गठबंधन के लिए इतना नीचे न झुकना पड़ता। मुझे बिल्कुल नहीं लगता कि केजरीवाल विधानसभा के चुनाव में बच पाएंगे।
-एक सवाल कांग्रेस पर, पूरे देश में प्रियंका गांधी के आने से और दिल्ली में शीला दीक्षित के आने के बाद कहा जा रहा है कि कांग्रेस दोबारा मजबूत हुई है। आपका क्या मानना है?
ईमानदारी से कहूं तो मैं आजकल चुनाव प्रचार में इतना अधिक व्यस्त हूं कि मुझे बहुत ज्यादा समय नहीं मिलता कि मैं इन सब बातों का आकलन करूं। सुबह छह बजे से रात बारह बजे तक लोगों से पैदल चलते हुए रोज मिल रहा हूं। ऐसे में मुझे दूसरी बातों के लिए समय नहीं मिल रहा है। लेकिन फिर भी, जितना समझ पाया हूं मुझे कांग्रेस कहीं से भी मजबूत होती नहीं दिख रही है। दिल्ली में भी मुझे कांग्रेस मजबूत होती नहीं दिख रही है। उनके नेतृत्व को अपनी नीतियों को लेकर दुबारा पुनर्विचार करना पड़ेगा।