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जन्मस्थली में अवतरित हुए कान्हा, आरती में शामिल हुए लाखों श्रद्धालु
अमर उजाला ब्यूरो/मथुरा
Updated Fri, 26 Aug 2016 03:46 AM IST
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जन्माष्टमी
- फोटो : गिरीश कुमार/ अमर उजाला
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भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में कान्हा के जन्म लेते ही 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। मध्य रात्रि में ठीक 12 बजे भगवान का प्राकट्य हुआ। द्वापर युग की तरह ही यह मौका भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी का था और तब बने 10 योग में आठ योग इस बार भी रहे।
रत्नजड़ित माला पहनकर चांदी के कमल से कान्हा का प्राकट्य हुआ तो पूरा जन्मस्थान परिसर जयजयकार से गूंजने लगा। भक्तों में लाला के दर्शन की होड़ मच गई। अभिषेक और शृंगार आरती के बाद रात में दो बजे तक दर्शन का क्रम जारी रहा। जन्मस्थान पर श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही देश भर के मंदिरों में भगवान का प्राकट्योत्सव मनाया गया।
देखें लाइव वीडियो -
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर प्रभु के जन्म के दर्शन के लिए लाखों भक्त मथुरा पहुंच गए थे। गुरुवार को पूरे दिन सबकी चाहत रही कि कान्हा के जन्मोत्सव में शामिल हों, उनके बालरूप का दर्शन करें। सुबह से ही जन्मस्थान पर भक्तों आने का क्रम जारी रहा। शाम होते-होते पूरा जन्मस्थान परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया।
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प्रभु के प्राकट्योत्सव की शुरुआत रात को 11 बजे श्रीगणेश और नवग्रह पूजन के साथ हुई। रात 12 बजे जैसे ही नवरत्न जड़ित माला धारण किए पुष्पांबुज पोशाक में चांदी के कमल से भगवान का जन्म हुआ तो पूरा जन्मस्थान परिसर श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। यहां कान्हा के श्रीविग्रह का श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास महाराज और ट्रस्टी अनुराग डालमिया ने पंचामृत से महाभिषेक किया।
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रत्नजड़ित माला पहनकर चांदी के कमल से कान्हा का प्राकट्य हुआ तो पूरा जन्मस्थान परिसर जयजयकार से गूंजने लगा। भक्तों में लाला के दर्शन की होड़ मच गई। अभिषेक और शृंगार आरती के बाद रात में दो बजे तक दर्शन का क्रम जारी रहा। जन्मस्थान पर श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही देश भर के मंदिरों में भगवान का प्राकट्योत्सव मनाया गया।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर प्रभु के जन्म के दर्शन के लिए लाखों भक्त मथुरा पहुंच गए थे। गुरुवार को पूरे दिन सबकी चाहत रही कि कान्हा के जन्मोत्सव में शामिल हों, उनके बालरूप का दर्शन करें। सुबह से ही जन्मस्थान पर भक्तों आने का क्रम जारी रहा। शाम होते-होते पूरा जन्मस्थान परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया।
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प्रभु के प्राकट्योत्सव की शुरुआत रात को 11 बजे श्रीगणेश और नवग्रह पूजन के साथ हुई। रात 12 बजे जैसे ही नवरत्न जड़ित माला धारण किए पुष्पांबुज पोशाक में चांदी के कमल से भगवान का जन्म हुआ तो पूरा जन्मस्थान परिसर श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। यहां कान्हा के श्रीविग्रह का श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास महाराज और ट्रस्टी अनुराग डालमिया ने पंचामृत से महाभिषेक किया।
12.40 बजे हुई श्रृंगार आरती
कृष्ण जन्माष्टमी
- फोटो : गिरीश कुमार/ अमर उजाला
इस दौरान भगवान के दर्शनों के लिए भक्तों में होड़ रही। प्रभु पर फूलों की बरसात होने लगी। रात्रि में 12:40 बजे शृंगार आरती हुई। इसके बाद रात में दो बजे भगवान के दर्शन का क्रम जारी रहा। इस अवसर पर विशेष रूप से एडीजी रेलवे गोपाल गुप्ता, हाईकोर्ट इलाहाबाद के न्यायमूर्ति डीके अरोड़ा, अभिनेता राजपाल यादव आदि मौजूद रहे।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान में प्रवेश के लिए कतारबद्ध खडे़ भक्तों के पैर धूप में सड़क पर न जलें इसके लिए नगर पालिका की ओर से कारपेट बिछाई गई। पालिका के सफाई कर्मचारी शहर में स्वच्छता का संदेश देते हुए सफाई कार्य में जुटे रहे। इसका असर श्रीकृष्ण जन्मस्थान के आसपास और कोतवाली रोड, दरेसी रोड पर साफ नजर आया। इससे आम लोग भी गंदगी करने से परहेज करते हुए देखे गए। सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव और नगर पालिकाध्यक्ष मनीषा गुप्ता व्यवस्थाओं का जायजा लेती रहीं।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान में प्रवेश के लिए कतारबद्ध खडे़ भक्तों के पैर धूप में सड़क पर न जलें इसके लिए नगर पालिका की ओर से कारपेट बिछाई गई। पालिका के सफाई कर्मचारी शहर में स्वच्छता का संदेश देते हुए सफाई कार्य में जुटे रहे। इसका असर श्रीकृष्ण जन्मस्थान के आसपास और कोतवाली रोड, दरेसी रोड पर साफ नजर आया। इससे आम लोग भी गंदगी करने से परहेज करते हुए देखे गए। सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव और नगर पालिकाध्यक्ष मनीषा गुप्ता व्यवस्थाओं का जायजा लेती रहीं।
सिक्युरिटी के थें व्यापक इंतजाम
krishna
- फोटो : गिरीश कुमार/ अमर उजाला
अतिसंवेदनशील श्रीकृष्ण जन्मस्थान की तरफ जाने वाला हर मार्ग वाहनों के लिए सील दिखा। इन मार्गों पर चार पहिया और दोपहिया वाहनों पर पाबंदी रही। बैरियर एवं प्वाइंटों पर इस संबंध में पुलिस के जवान तैनात रहे। हालांकि दोपहर में दो बजे के करीब दोपहिया वाहनों के संबंध में कुछ ढिलाई दिखी लेकिन शाम चार बजे से पुलिसकर्मियों ने सख्ती कर दी। सवेरे दस बजे से लगाई गई ये रोक अजन्मे के जन्म के बाद ही हटी।