कोर्ट पहुंचा बिहार में शराब बंदी का मामला
चौतरफा तारीफ के बीच बिहार में शराब बंदी का साइड इफेक्ट भी दिखने लगा है। शराब की लत से ग्रसित कोई पागलों की तरह साबुन खा रहा है तो कोई जनहित याचिका लेकर अदालत का दरवाजा खटखटा रहा है।
वहीं मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर शराब कारोबारियों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग की है। जदयू ने पूरे मामले पर बस इतना ही कहा है कि नीतीश जो संकल्प ले चुके हैं, उस पर अमल हो रहा है। सरकार सबका ध्यान रख रही है। नीतीश के फैसले के दूसरे दिन अफवाह उड़ती रही कि राज्य में झारखंड और नेपाल से शराब आ रही है। इस बीच शराब के लती ऊटपटांग हरकत करने लगे हैं।
बेतिया के गयासुद्दीन शराब नहीं मिलने पर घर में रखा साबुन ही खा गए। वहीं सीवान के संजय राय पागलों की तरह व्यवहार करने लगे हैं। दोनों को इलाज के लिए नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया है। राज्य के अन्य भागों से भी इस तरह की खबरें आ रही हैं। दूसरी ओर पूर्व वायु सैनिक ने शराब बंदी के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में पीआईएल दायर कर दी है।
राज्य में पुलिसिया शासन शुरू हो जायेगा
अवध नारायण सिंह नामक इस अधिकारी के अधिवक्ता भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने बहुत ही जल्दबाजी में शराब बंदी लागू की है। इसके लिए पहले से तैयारी की जानी चाहिए थी और पूरी व्यवस्था व्यवहारिक होनी चाहिए थी। इसमें किया गया सजा का प्रावधान बहुत सख्त है और इससे राज्य में पुलिसिया शासन शुरू हो जायेगा। याचिका के अनुसार सरकार का प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 22 का उल्लंघन है।
भाजपा ने भी सरकार पर जल्दी में फैसला लेने का आरोप लगाया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सरकार ने इस कारोबार से जुड़े लोगों का ख्याल किए बिना फैसला लागू कर दिया। शराब बनाने और बेचने वालों को सरकार ने लाइसेंस दिया था। उन्होंने इस कारोबार में काफी निवेश कर रखा है, लेकिन सरकार ने अब तक उनकी लाइसेंस फीस तक नहीं लौटाई है। मोदी ने कहा कि सरकार को फैसला लागू करने से पहले इस कारोबार से जुडे़ लोगों को उचित मुआवजा देना चाहिए था।