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पीड़ितों ने पीएम को लिखी चिट्ठी, जल्द पारित कराएं ‘मानव तस्करी निरोधक विधेयक’
Sat, 05 Jan 2019 09:57 PM IST
Nilesh Kumar
भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली
Published by: Nilesh Kumar
Updated Sat, 05 Jan 2019 09:57 PM IST
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मानव तस्करी पीड़ितों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख ‘मानव तस्करी निरोधक विधेयक’ को अपना समर्थन दिया और राज्यसभा में उसके जल्द पारित कराए जाने की गुहार लगाई।
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पिछले वर्ष जुलाई में मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में यह पहले ही पारित हो चुका है। राज्यसभा में भी इसके पारित होने की पीड़ितों ने उम्मीद जताई है।
पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में मानव तस्करी पीड़ितों का समर्थन करने वाले संगठनों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में पीड़ितों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है की यह विधेयक राज्यसभा में जल्द पारित होगा।
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मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने अपना दुखड़ा सुनाया। लिख है कि उन्हें बेहतर जीवन की उम्मीद का लालच देकर शोषण किया गया। जबरन श्रम, पैसों के लिए यौन उत्पीड़िन, भीख मांगने और अन्य अमानवीय कामों के लिए हमारी तस्करी की गई।
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पीड़ितों ने आगे लिखा है कि वे भाग्यशाली रहे की इस गुलामी की जंजीरों से निकल पाए लेकिन अब भी लाखों लोग हैं जो तस्करों के इस दुष्चक्र में फंसे हैं। वे लोग इस विधेयक के समर्थन में हैं और राज्यसभा में सत्र चलने और विधेयक के पास होने की उम्मीद करते हैं।
क्या है मानव तस्करी निरोधी विधेयक
मानव तस्करी निरोध विधेयक 2018 तस्करी पर रोक, पीड़ितों के संरक्षण और पुनर्वास को लेकर बनाया गया है। यह विशेष अदालतों को त्वरित सुनवाई और विदेशी पीड़ितों के समय पर (संज्ञान में लेने से एक वर्ष के अंदर) प्रत्यर्पण का अधिकार देता है।
विधेयक में एक और बड़ी बात राष्ट्रीय तस्करी निरोधक ब्यूरो का गठन है, जो अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अधिकारियों के साथ समन्वय का करेगा और अंतर—राज्यीय और अंतर—राष्ट्रीय सबूतों के हस्तांतरण की सुविधा देगा।
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को भी भेजा था ज्ञापन
मालूम हो कि पिछले महीने मानव तस्करी के पीड़ितों ने कुछ सांसदों के साथ उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को एक ज्ञापन भेज संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक को पारित कराने का आश्वासन मांगा था। यह विधेयक इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में मानव तस्करी के कई मामले हैं।