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OBC में अनाथ बच्चे भी होंगे शामिल, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने प्रस्ताव किया पास
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 23 Sep 2016 03:05 PM IST
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- फोटो : getty
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राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने एक प्रस्ताव पास अनाथ बच्चों को भी अन्य पिछड़ा वर्ग(OBC) में शामिल करने को कहा है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो तो यह पहली बार होगा कि अन्य पिछड़ा वर्ग में कोई समूह बिना जाति की पहचान के शामिल होगा।
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक अगर 10 साल से कम उम्र के बच्चे जिनके माँ-बाप ना हो और ना ही उनकी देखभाल के लिए कोई हो और वो किसी सरकारी या सरकारी सहयता प्राप्त स्कूल में पढ़ते हैं तो उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करना चाहिए। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने कहा कि OBC में मौजूद O का एक मतलब Orphan (अनाथ) भी हो।
ओबीसी के तहत सरकारी स्कूल और नौकरियों में 27 फीसदी आरक्षण दिया जाता है। अगर अनाथ बच्चों को इस वर्ग में शामिल किया जाता है तो ये बच्चे भी इस आरक्षण का लाभ उठा पाएंगे।
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इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक अगर 10 साल से कम उम्र के बच्चे जिनके माँ-बाप ना हो और ना ही उनकी देखभाल के लिए कोई हो और वो किसी सरकारी या सरकारी सहयता प्राप्त स्कूल में पढ़ते हैं तो उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करना चाहिए। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने कहा कि OBC में मौजूद O का एक मतलब Orphan (अनाथ) भी हो।
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ओबीसी के तहत सरकारी स्कूल और नौकरियों में 27 फीसदी आरक्षण दिया जाता है। अगर अनाथ बच्चों को इस वर्ग में शामिल किया जाता है तो ये बच्चे भी इस आरक्षण का लाभ उठा पाएंगे।
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जाति पिछड़े होने का पैमाना नहीं हो सकती
हाल ही में न्यायाधीश वी इस्वरैआ की अध्यक्षता में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की एक बैठक हुई थी जिसमें अनाथ बच्चों को फैसला लिया गया। राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग ने अपने फैसले को केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय को भेज दिया है, जिसे इस मामले में आखिरी फैसला लेना है। राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग के सदस्य अशोक सैनी ने कहा कि ये फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को ध्यान में रखते हुए लिया गया है जिसमें कहा गया था कि सिर्फ जाति पिछड़े होने का पैमाना नहीं हो सकती।
हालांकि, राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग ने पहली बार मई 2015 में ही अनाथ को ओबीसी में शामिल करने के बारे में विचार किया था। इसके बाद सभी राज्यों से इस पर राय मांगी गई थी। तेलंगाना और राजस्थान सरकारें पहले से ही अनाथ बच्चों को ओबीसी में शामिल कर चुकी है। मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आयोग ने अनाथों को शामिल किए जाने की अनुशंसा की थी, लेकिन सरकार ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
हालांकि, राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग ने पहली बार मई 2015 में ही अनाथ को ओबीसी में शामिल करने के बारे में विचार किया था। इसके बाद सभी राज्यों से इस पर राय मांगी गई थी। तेलंगाना और राजस्थान सरकारें पहले से ही अनाथ बच्चों को ओबीसी में शामिल कर चुकी है। मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आयोग ने अनाथों को शामिल किए जाने की अनुशंसा की थी, लेकिन सरकार ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया।