लक्ष्मीकांत वाजपेयी का कद बढ़ा, विरोधियों का मनोबल घटा
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निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का कद भाजपा में फिर से बढ़ गया है। प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने के बाद जिस तरह वह उपेक्षित नजर आ रहे थे, उससे विरोधी खुश थे। लेकिन राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह मिलने पर विरोधी खेमे को झटका लगा है। माना जा रहा है कि वाजपेयी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है। वाजपेयी मेरठ के पहले भाजपा नेता हैं, जिन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी में चुना गया है।
डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी करीब 44 माह प्रदेश अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने स्थानीय निकाय चुनावों के साथ ही लोकसभा चुनाव में प्रदेश भाजपा का प्रतिनिधित्व करते हुए आश्चर्यजनक परिणाम दिए। यही नहीं विपक्षी पार्टियों पर हल्ला बोलने में भी वह सबसे आगे नजर आये। लेकिन पार्टी के भीतर पनपी गुटबाजी को वह नहीं थाम सके।
प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि उन्हें दोबारा मौका दिया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद वाजपेयी के विरोधी खेमे ने उन्हें हाशिये पर लाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इसका ताजा उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहारनपुर रैली रहा, जहां मंच से उनका नाम तक नहीं पुकारा गया और मुख्य मंच तो दूर सहायक मंच पर भी उन्हें स्थान नहीं मिला। वाजपेयी इस रैली में भीड़ के बीच बैठे नजर आये।
मेरठ को पहली बार मिला प्रतिनिधित्व
वाजपेयी की इस उपेक्षा के बीच चर्चा थी कि अब संगठन स्तर पर उनका ग्राफ नीचे गिर रहा है। इसे लेकर विरोधी खेमा लगातार प्रचार भी कर रहा था। लेकिन इलाहाबाद में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पहली बैठक में डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह देना उनके समर्थकों को जहां ऊर्जा दे गया, वहीं विरोधी खेमे के लिए यह बड़ा झटका है।
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मेरठ से अभी तक कोई नेता नहीं जा पाया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने वाले भी वाजपेयी मेरठ से पहले थे। हालांकि भाजपा बनने से पहले जनसंघ पार्टी में जरूर मेरठ के पीतांबर दास राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। पीतांबर दास 1967 में जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।