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Univform Civil Code: कानून मंत्री का बड़ा बयान, लोकसभा में बोले- समान नागरिक संहिता लाने का फिलहाल विचार नहीं
Sat, 23 Jul 2022 07:24 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 23 Jul 2022 07:24 PM IST
सार
रिजिजू ने कहा कि विधायी दखल से लैंगिक और धार्मिक रूप से निष्पक्ष समान कानून सुनिश्चित होते हैं। संविधान (Indian Constitution) का अनुच्छेद 44 कहता है कि राज्य (भारत) पूरे देश के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
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किरण रिजिजू
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विस्तार
समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) पर केंद्र सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा (Lok Sabha) में बड़ी जानकारी दी। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने शुक्रवार को कहा कि समान नागरिक संहिता से जुड़ी कुछ याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में सरकार ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। हालांकि, राज्य सरकारें ऐसा कानून लाने के लिए स्वतंत्र हैं।
रिजिजू ने कहा कि विधायी दखल से लैंगिक और धार्मिक रूप से निष्पक्ष समान कानून सुनिश्चित होते हैं। संविधान (Indian Constitution) का अनुच्छेद 44 कहता है कि राज्य (भारत) पूरे देश के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ में आने वाले विषय जैसे शादी, तलाक, वसीयत, संयुक्त परिवार एवं विभाजन, संविधान की समवर्ती सूची से संबंधित है। इसलिए, इस संबंध में राज्यों को भी कानून बनाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि 21वें विधि आयोग ने समान नागरिक संहिता से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की है।
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रिजिजू ने कहा कि विधायी दखल से लैंगिक और धार्मिक रूप से निष्पक्ष समान कानून सुनिश्चित होते हैं। संविधान (Indian Constitution) का अनुच्छेद 44 कहता है कि राज्य (भारत) पूरे देश के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
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उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ में आने वाले विषय जैसे शादी, तलाक, वसीयत, संयुक्त परिवार एवं विभाजन, संविधान की समवर्ती सूची से संबंधित है। इसलिए, इस संबंध में राज्यों को भी कानून बनाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि 21वें विधि आयोग ने समान नागरिक संहिता से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की है।
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