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बयान: सीबीआई अब 'पिंजरे में बंद तोता नहीं', कानून मंत्री रिजिजू बोले- सही मायने में निभा रही अपना कर्तव्य

Sun, 03 Apr 2022 07:32 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 03 Apr 2022 07:32 PM IST
सार

कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि सीबीआई अब 'पिंजरे का तोता' नहीं है, बल्कि वास्तव में भारत की शीर्ष आपराधिक जांच एजेंसी के रूप में अपना कर्तव्य निभा रही है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ भी की है। 

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Law Minister Kiren Rijiju says CBI is no more caged parrot but truly performing its duty
किरेन रिजिजू - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को सीबीआई को लेकर बड़ा बयान दिया है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ भी की है। उन्होंने कहा कि सीबीआई सही मायने में अब अपना कर्तव्य निभा रही है।  उन्होंने आगे कहा कि एक समय था जब सरकार में बैठे लोग इसका इस्तेमाल करते थे। जिसके कारण जांच में समस्या भी बन जाती थी। उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में अधिकारियों को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, वे चुनौतियां अब अस्तित्व में नहीं हैं।

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रविवार को एक ट्वीट में रिजिजू ने कहा कि सीबीआई अब 'पिंजरे का तोता' नहीं है, बल्कि वास्तव में भारत की शीर्ष आपराधिक जांच एजेंसी के रूप में अपना कर्तव्य निभा रही है। इस ट्वीट में उन्होंने सीबीआई के जांच अधिकारियों के पहले सम्मेलन में शनिवार को दिए गए अपने संबोधन का एक छोटा वीडियो भी साझा किया।
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किरेन रिजिजू ने अपने संबोधन में कहा कि मुझे अच्छी तरह याद है कि एक समय था जब जो लोग सरकार में बैठते हैं, वे कभी-कभी जांच में समस्या बन जाते थे। उन्होंने कहा कि आज एक ऐसा प्रधानमंत्री है जो खुद भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम में मुख्य भूमिका निभा रहा है।उन्होंने आगे कहा कि हमने अतीत में न्यायपालिका से कुछ भद्दी टिप्पणियां भी सुनी हैं। हम अब एक लंबा सफर तय कर इन मुश्किलों से बाहर निकल चुके हैं। 
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गौरतलब है कि 2013 में कोलफील्ड आवंटन मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 'पिंजरे का तोता' बताया था।

वहीं, 1 अप्रैल को सीबीआई के 19वें डी पी कोहली मेमोरियल लेक्चर को संबोधित करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना ने कहा था कि सीबीआई की विश्वसनीयता समय बीतने के साथ सार्वजनिक जांच के दायरे में आ गई है क्योंकि इसके कार्यों और निष्क्रियता ने कुछ मामलों में सवाल उठाए हैं। उन्होंने विभिन्न जांच एजेंसियों को एक छत के नीचे लाने के लिए एक स्वतंत्र संस्थान बनाने का भी आह्वान किया था।

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