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Manipur Violence: राज्य परिवहन बस सेवाओं का कुकी समुदाय ने किया विरोध, निजी वाहनों को भी रोकने की कोशिश

Sun, 24 Dec 2023 12:23 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 24 Dec 2023 12:23 AM IST
सार

चुराचांदपुर स्थित स्वदेशी आदिवासी नेता मंच शुक्रवार को बताया था कि चुराचांदपुर और विष्णुपुर के सभी क्षेत्रों को सुरक्षा कारणों से 23 दिसंबर से पांच जनवरी तक सील कर दिया गया है। गैर-आदिवासियों को जिले के अंदर या बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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Kuki community protested against state transport bus services tried to stop private vehicles also
Highway - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मणिपुर राज्य परिवहन (एमएसटी) सेवाएं एक बार फिर बधित हो गईं। एमएसटी अधिकारियों का कहना है कि एक राज्य परिवहन बस एनएच-2 से सेनापति जिले के लिए रवाना हुई। वहीं, दूसरी बस चुराचांदपुर के लिए रवाना हुई। सेनापति जा रही बस कांगलाटोंगबी इलाके से ही वापस आ गई। वहीं, चुराचांदपुर जा रही बस विष्णुपुर जिले के फोगाकचाओ इखाई से आगे नहीं बढ़ सकी। कारण था कुकी समुदाय का विरोध प्रदर्शन। 
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स्वयंसेवक और महिलाएं सड़कों पर उतरे
अधिकारियों का मानें तो, बस सेवाओं की बहाली के विरोध में कांगपोकपी जिले में पूर्ण बंद का आह्वान किया गया। अधिकारी का कहना है कि एनएच-2 के निजी वाहनों को रोकने के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और महिलाएं सड़कों पर उतर गए। बता दें, दो दिन पहले राज्य के गृह विभाग ने नोटिस जारी कर कहा था कि राजमार्ग चालू है। सभी के इस्तेमाल के लिए खुला हुआ है। राजमार्गों का उपयोग करने वाले लोगों की सुविधा और सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है। 
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आदिवासी समुदाय ने किया नोटिस का विरोध
चुराचांदपुर स्थित स्वदेशी आदिवासी नेता मंच शुक्रवार को बताया था कि चुराचांदपुर और विष्णुपुर के सभी क्षेत्रों को सुरक्षा कारणों से 23 दिसंबर से पांच जनवरी तक सील कर दिया गया है। गैर-आदिवासियों को जिले के अंदर या बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आदिवासी एकता समिति (सीओटीयू) ने भी गृह विभाग के नोटिस का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि  हिंसा प्रभावित राज्य में सब कुछ सामान्य दिखाने के लिए नोटिस जारी किया गया। 
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यह है मामला
मणिपुर में इस साल तीन मई को कुकी और मैतई समुदाय के बीच जातीय हिंसा भड़क गई थी। हिंसा करीब तीन-चार महीने तक जारी रही। इसमें करीब 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। जबकि, कई लोग घायल हो गए थे। दरअसल, मेइतेई समुदाय अनुसूचित जनजाति (एसटी) की मांग कर रहा है, इस वजह से कुकी और मेइतेई समाज आपस में भिड़ गया। मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी, जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं, 40 प्रतिशत हैं और ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं।
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