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चोरबागान भगदड़: टीएमसी के ममता गुट का शुभेंदु अधिकारी पर निशाना, कहा- सीएम के भतीजे हैं समिति के मुख्य संरक्षक
Sun, 18 Oct 2026 01:53 PM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sun, 18 Oct 2026 01:53 PM IST
सार
कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत के बाद टीएमसी के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और कोलकाता पुलिस पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने आयोजन समिति के मुख्य संरक्षक के रूप में सूचीबद्ध मुख्यमंत्री के भतीजे देबदीप अधिकारी का भी जिक्र किया।
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कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और कोलकाता पुलिस पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने चोरबागान सार्वजनिन दुर्गोत्सव समिति के मुख्य संरक्षक के तौर पर सूचीबद्ध मुख्यमंत्री के भतीजे देबदीप अधिकारी का नाम भी उठाया है।
विपक्षी पार्टी ने घटना से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं। उसका आरोप है कि शनिवार शाम लोकप्रिय चोरबागान पूजा पंडाल में पर्याप्त भीड़ प्रबंधन, पुलिस की मौजूदगी और आपातकालीन इंतजामों की कमी ने इस त्रासदी में योगदान दिया।
सोशल मीडिया पोस्ट में पुलिस और आपात सेवाओं पर सवाल
ममता की पार्टी ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि जब पंडाल में हालात बेकाबू हुए, तब वहां पर्याप्त पुलिसकर्मी, नागरिक स्वयंसेवक और एंबुलेंस मौजूद नहीं थीं। पार्टी ने इन कथित कमियों को हादसे से जोड़ते हुए प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।
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बारिश, भ्रामक घोषणा और प्रशासनिक खामियों से बेकाबू हुई स्थिति
उत्तरी कोलकाता के एक सामुदायिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि अचानक हुई बारिश, एक भ्रामक घोषणा और पंडाल परिसर में मौजूद सुरक्षा एवं प्रबंधन संबंधी गंभीर खामियों के कारण स्थिति बेकाबू हो गई, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ।
कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "अचानक हुई बारिश से इंतजार कर रहे लोग भीगने से बचने के लिए जल्दी से पंडाल के अंदर जाने की कोशिश करने लगे। पंडाल के अंदर पहले से मौजूद लोग बारिश की वजह बाहर नहीं आ रहे थे। लेकिन इसे पूजा आयोजकों की ओर से कोई बहाना नहीं माना जा सकता। पूजा आयोजकों की ओर से भारी चूक हुई थी, जिसके कारण अफरा-तफरी मच गई।"
पंडाल गिरने की घोषणा से लोगों में फैली घबराहट
जब बारिश की वजह से अफरा-तफरी शुरू हुई, तो एक भ्रामक घोषणा की गई जिसमें लोगों से कहा गया कि पंडाल का ढांचा गिरने के डर से वे तुरंत बाहर निकल जाएं। शहर के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस घोषणा से वहां मौजूद लोगों में और ज्यादा घबराहट फैल गई। लोग बाहर निकलने के लिए तेजी से भागने लगे, और कुछ लोग तो बाहर जाने के लिए प्रवेश द्वार (एंट्री गेट) की तरफ दौड़ पड़े। इसी वजह से भगदड़ मच गई और इतनी बड़ी त्रासदी हो गई।
वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी बताया कि हालात और स्थानीय निवासियों तथा चश्मदीदों के बयानों से पता चलता है कि शनिवार शाम को पंडाल परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के इंतजाम नाकाफी थे, जिसने इस दुखद घटना में बड़ी भूमिका निभाई। जांच टीम ने यह भी पाया कि घटनास्थल पर पुलिसकर्मियों और निजी सुरक्षा गार्डों की संख्या जरूरत से बहुत कम थी, जिससे स्थिति और भी बिगड़ गई।
पुलिस ने सात लोगों को किया गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 'चोरबगान सर्वजनीन दुर्गा पूजा समिति' के शीर्ष पदाधिकारी और पंडाल परिसर में भीड़ प्रबंधन व सुरक्षा के प्रभारी लोग शामिल हैं। इन सभी पर 'भारतीय न्याय संहिता' (बीएनएस) 2023 के तहत गैर-इरादतन हत्या से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार के लिए अपने पूजा-संबंधी सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए। इसके बजाय, वे शहर के एक निजी अस्पताल गए, जहां 14 घायल लोग भर्ती थे। उन्होंने वहां घायलों का हाल-चाल जाना। हालांकि, उन्होंने इस घटना के बारे में मीडिया से कोई बात नहीं की। पता चला है कि निजी अस्पताल में भर्ती 14 लोगों में से एक को छोड़कर बाकी सभी की हालत काफी हद तक स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं।
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विपक्षी पार्टी ने घटना से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं। उसका आरोप है कि शनिवार शाम लोकप्रिय चोरबागान पूजा पंडाल में पर्याप्त भीड़ प्रबंधन, पुलिस की मौजूदगी और आपातकालीन इंतजामों की कमी ने इस त्रासदी में योगदान दिया।
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सोशल मीडिया पोस्ट में पुलिस और आपात सेवाओं पर सवाल
ममता की पार्टी ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि जब पंडाल में हालात बेकाबू हुए, तब वहां पर्याप्त पुलिसकर्मी, नागरिक स्वयंसेवक और एंबुलेंस मौजूद नहीं थीं। पार्टी ने इन कथित कमियों को हादसे से जोड़ते हुए प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।
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Guess who is closely associated with the Chorebagan Puja Pandal? @SuvenduWB’s BHAIPO. A @BJP4Bengal MLA also happens to be the Chairman of this Puja Committee! Where is the accountability? Who is responsible for all these deaths? When will the CM, who clearly has NO SHAME, resign?! https://t.co/OBvFvh15YQ
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) October 17, 2026
बारिश, भ्रामक घोषणा और प्रशासनिक खामियों से बेकाबू हुई स्थिति
उत्तरी कोलकाता के एक सामुदायिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि अचानक हुई बारिश, एक भ्रामक घोषणा और पंडाल परिसर में मौजूद सुरक्षा एवं प्रबंधन संबंधी गंभीर खामियों के कारण स्थिति बेकाबू हो गई, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ।
कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "अचानक हुई बारिश से इंतजार कर रहे लोग भीगने से बचने के लिए जल्दी से पंडाल के अंदर जाने की कोशिश करने लगे। पंडाल के अंदर पहले से मौजूद लोग बारिश की वजह बाहर नहीं आ रहे थे। लेकिन इसे पूजा आयोजकों की ओर से कोई बहाना नहीं माना जा सकता। पूजा आयोजकों की ओर से भारी चूक हुई थी, जिसके कारण अफरा-तफरी मच गई।"
पंडाल गिरने की घोषणा से लोगों में फैली घबराहट
जब बारिश की वजह से अफरा-तफरी शुरू हुई, तो एक भ्रामक घोषणा की गई जिसमें लोगों से कहा गया कि पंडाल का ढांचा गिरने के डर से वे तुरंत बाहर निकल जाएं। शहर के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस घोषणा से वहां मौजूद लोगों में और ज्यादा घबराहट फैल गई। लोग बाहर निकलने के लिए तेजी से भागने लगे, और कुछ लोग तो बाहर जाने के लिए प्रवेश द्वार (एंट्री गेट) की तरफ दौड़ पड़े। इसी वजह से भगदड़ मच गई और इतनी बड़ी त्रासदी हो गई।
वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी बताया कि हालात और स्थानीय निवासियों तथा चश्मदीदों के बयानों से पता चलता है कि शनिवार शाम को पंडाल परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के इंतजाम नाकाफी थे, जिसने इस दुखद घटना में बड़ी भूमिका निभाई। जांच टीम ने यह भी पाया कि घटनास्थल पर पुलिसकर्मियों और निजी सुरक्षा गार्डों की संख्या जरूरत से बहुत कम थी, जिससे स्थिति और भी बिगड़ गई।
पुलिस ने सात लोगों को किया गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 'चोरबगान सर्वजनीन दुर्गा पूजा समिति' के शीर्ष पदाधिकारी और पंडाल परिसर में भीड़ प्रबंधन व सुरक्षा के प्रभारी लोग शामिल हैं। इन सभी पर 'भारतीय न्याय संहिता' (बीएनएस) 2023 के तहत गैर-इरादतन हत्या से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार के लिए अपने पूजा-संबंधी सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए। इसके बजाय, वे शहर के एक निजी अस्पताल गए, जहां 14 घायल लोग भर्ती थे। उन्होंने वहां घायलों का हाल-चाल जाना। हालांकि, उन्होंने इस घटना के बारे में मीडिया से कोई बात नहीं की। पता चला है कि निजी अस्पताल में भर्ती 14 लोगों में से एक को छोड़कर बाकी सभी की हालत काफी हद तक स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं।