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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म, अब क्या बदलेगा जानिए यहां

Mon, 05 Aug 2019 08:32 PM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 05 Aug 2019 08:32 PM IST
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Know what is status of jammu kashmir after article 370 scrapped what is dhara 370
दो नए केंद्र शासित प्रदेशों में बंटा जम्मू-कश्मीर - फोटो : Amar Ujala

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में एक संकल्प पेश किया, जिसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 370 के सभी खंड जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होंगे। गृहमंत्री के अनुसार, 'राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे।'

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राज्यसभा में बहुजन समाज पार्टी के नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा है कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले पर केंद्र सरकार का समर्थन करेगी। दूसरी ओर एनडीए की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड इस फैसले पर सरकार के साथ नहीं खड़ी है। अब राज्य में क्या नए बदलाव होंगे और पहले से स्थितियां किस प्रकार से अलग होंगी। ऐसी ही सवालों के जवाब हम इस खबर के जरिये देने की कोशिश कर रहे हैं।

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कश्मीर से अनुच्छे 370 हटाने का क्या मतलब है?

अनुच्छेद 370 को हटाया नहीं गया है, बल्कि उसके अंतर्गत जो प्रतिबंध थे, उन्हें हटाया गया है। मतलब इसके तहत कश्मीर को जो स्वायत्तता मिलती थी, जो अलग अधिकार मिलते थे, वे सब हट गए हैं। अब एक देश में दो निशान, दो विधान, दो प्रधान, ये सब खत्म हो जाएंगे। अनुच्छेद 370 का खंड एक लागू रहेगा जो कहता है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।

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370 खत्म होने से जम्मू-कश्मीर में क्या बदलेगा?

अब तक केवल 'स्थायी नागरिक' का दर्जा प्राप्त कश्मीरी ही राज्य में जमीन खरीद सकते थे। लेकिन 370 हटने के बाद ऐसा नहीं होगा। उसके बाद वहां उन लोगों के जमीन खरीदने का रास्ता भी खुल जाएगा जिनके पास 'स्थायी नागरिक' का दर्जा नहीं है। राज्य में अब तक केवल 'स्थायी नागरिकों' को ही सरकारी नौकरियां मिलती थीं लेकिन अब यह सबके लिए खुल जाएगा।

कानून व्यवस्था किसके अधीन रहेगी?

राज्य के कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी अब तक मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी होती थी, लेकिन अब वह सीधे केंद्र सरकार के अधीन होगी। गृह मंत्री प्रदेश में अपने प्रतिनिधि उपराज्यपाल के जरिये कानून-व्यवस्था संभालेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले और केंद्रीय कानून कैसे लागू होंगे?

संसद की ओर से बनाए गए हर कानून अब प्रदेश की विधानसभा की मंजूरी के बिना लागू होंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भी अमल लागू हो जाएगा। प्रदेश के अलग झंडे की अहमियत नहीं रहेगी। इसका भविष्य संसद या केंद्र सरकार तय करेगी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल छह से घटकर पांच साल का हो जाएगा।

पहले और अब में क्या बदलाव दिखेगा?

कौन सा कानून लागू होगा: संसद या केंद्र सरकार फैसला करेगी कि इसके बाद भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराएं राज्य में लागू होंगी या स्थानीय रनबीर पीनल कोड (आरपीसी) लागू रहेगा। महिलाओं पर लागू स्थानीय पर्सनल कानून बेअसर हो जाएंगे। सरकार इस पर भी निर्णय लेगी कि पहले से लागू स्थानीय पंचायत कानून लागू रहेंगे या उन्हें भी बदला जाएगा।

संसद के कई संवैधानिक फैसले जो पहले कश्मीर पर लागू नहीं होते पाते थे, अब वे पूरे देश के अन्य राज्यों की तरह यहां भी लागू होंगे। सरकार के वित्तीय फैसले जो अब तक लागू नहीं होते थे, वे भी अब लागू होंगे। राष्ट्रपति के अधिसूचना में जम्मू-कश्मीर में जो संविधान सभा थी, उसका नाम विधानसभा कर दिया है। पहले उसका नाम संविधान सभा इसलिए था, क्योंकि भारत की संसद की तरह ही वह कई संवैधानिक निर्णय करती थी। 

क्या केंद्र शासित राज्य में विधानसभा की जरूरत है?

देश की राजधानी दिल्ली में और पुडुचेरी में विधानसभा है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर में भी विधानसभा होगी। यानी दिल्ली की तरह जम्मू और कश्मीर में चुनाव होंगे, जिसमें विधायक निर्वाचित होंगे और मुख्यमंत्री होगा। लेकिन राज्य की पुलिस और सुरक्षा-व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन होगी। उपराज्यपाल की सलाह पर ही राज्य सरकार का कोई भी निर्णय लागू होगा।

राज्य में पर्यटन और व्यापार बढ़ेगा

राज्य में परिवर्तन होने की उम्मीद है। अब देश के दूसरे राज्यों के रहनेवालों के लिए कश्मीर में बसने और व्यापार करने की राह खुल गई है। खास तौर पर होटल इंडस्ट्री में बड़ा उछाल आएगा। अब से पहले होटल इंडस्ट्री पर कई प्रकार की बंदिशें थीं। उद्योग और कारोबार बढ़ने से आतंकवाद में कमी आएगी। आम लोग मुख्यधारा से जुड़ेंगे तो आतंकी गतिविधियों में शामिल लोगों की मदद करनेवालों को परिश्रय नहीं देंगे। राज्य में सेना की मौजूदगी और उस पर खर्च धीरे-धीरे कम होगा। कश्मीर से लद्दाख के अलग होने से वहां विकास कार्यो में तेजी आएगी। घाटी के नेताओं ने अब तक लद्दाख पर ध्यान नहीं दिया था।

अनुच्छेद 370 को लेकर आम लोगों की भावनाएं क्या हैं?

सरकार के मुताबिक राज्य की सत्ता पर काबिज रहे तीन राजनीतिक परिवारों ने आम लोगों के बीच ऐसा भ्रम बना रखा था कि अनुच्छेद 370 से आम लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं और इससे किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं है। अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बना दिए जाने से राज्य के लोगों को फायदा पहुंचेगा। सरकार कहती है कि अनुच्छेद 370 के हटने से इन राजनीतिक परिवारों का एकाधिकार खत्म हो जाता, इसलिए इन परिवारों ने किसी को भी इस अनुच्छेद के बारे में सोचने तक नहीं दिया।

ये नए बदलाव लागू कब होंगे?

राष्ट्रपति की अधिसूचना के साथ ही अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी हो गया है। संसद में अब केवल राज्य पुनर्गठन विधेयक पारित होना है। जिसके बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बन जाएंगे। यह प्रक्रिया वैसी ही है जैसे उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड, बिहार से अलग होकर झारखंड और मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ बना था।

उपराज्यपालों की नियुक्ति होगी

केंद्र सरकार उपराज्यपाल के नाम की सिफारिश राष्ट्रपति से करती है। जिसके बाद अनुमोदित नाम पर राष्ट्रपति मुहर लगाते हैं। फिलहाल सत्यपाल मलिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल हैं।

राज्य की नौकरशाही पर केंद्र का नियंत्रण

राज्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार केंद्र सरकार यानी उपराज्यपाल के पास होगा। जम्मू-कश्मीर में चुनी गई राज्य सरकार के पास अब सामान्य प्रशासनिक सेवाओं के अलावा ज्यादा कुछ नहीं रहेगा। उपराज्यपाल केंद्र के निर्देशों के मुताबिक सुरक्षा से जुड़े निर्णय लेंगे।

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