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देशभर में हिट थे रतुल पुरी की कंपनी के प्रॉडक्ट, महज एक गलती ने सब बदल दिया

Wed, 21 Aug 2019 02:45 PM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Wed, 21 Aug 2019 02:45 PM IST
सार

  • मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी को अदालत ने छह दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।
  • पुरी मोजरबेयर के पूर्व कार्यकारी निदेशक भी रह चुके हैं।
  • किसी भी देश में सीडी, डीवीडी, पेन ड्राइव और मोबाइल के मेमोरी कार्ड बनाने के मामले में मोजरबेयर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी थी।

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Know about Ratul Puri and how his company Moser baer shut down
रतुल पुरी (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी को अदालत ने छह दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है। रतुल पुरी को 354 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले के आरोप में मंगलवार सुबह गिरफ्तार किया गया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रतुल पुरी और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। ये मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। 

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मुकदमा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से दायर 354 करोड़ रुपये के बैंक घोटाला मामले में दर्ज किया गया था। जिसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 14 अगस्त को पुरी को 20 अगस्त तक गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था। 
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पुरी मोजरबेयर के पूर्व कार्यकारी निदेशक भी रह चुके हैं। बता दें किसी भी देश में सीडी, डीवीडी, पेन ड्राइव और मोबाइल के मेमोरी कार्ड बनाने के मामले में मोजरबेयर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी थी। देश में ये सभी प्रॉडक्ट काफी हिट थे, लेकिन रतुल पुरी की महज एक गलती ने कंपनी को डुबा दिया।

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क्या हुआ कंपनी के साथ?

मोजरबेयर के जो प्रॉडक्ट हिट थे, उनमें सीडी, डीवीडी, पेन ड्राइव, मोबाइल मेमोरी कार्ड और सोलर प्लांट शामिल थे। लेकिन ये कंपनी बंद हो गई। ये कंपनी नोएडा की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल थी। मोजरबेयर की 1999 में गौतमबुद्धनगर के फेस-2 और ग्रेटर नोएडा में 2002 में यूनिट की शुरुआत हुई थी।


इस कंपनी ने 2006 में उत्पादन शुरू किया और 15 हजार से अधिक लोगों को रोजगार दिया। जिसमें स्थायी और अस्थायी दोनों तरह के कर्मचारी थे। लेकिन महज एक गलती से ये कंपनी बंद हो गई। 

2012 में दिवालिया घोषित

फोर्ब्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार साल 2008 में आई आर्थिक मंदी का असर भारत सहित दुनियाभर के देशों पर पड़ा। लेकिन मोजरबेयर ने मंदी के समय में भी अपने सोलर बिजनेस पर बड़ा दांव खेला। लेकिन मंदी के दौर में उस बिजनेस से जुड़े सभी पहलू बदल गए। फोटोवोल्टिक मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री मंदी की गिरफ्त में फंसती चली गई। जिससे उसपर प्राइसिंग का दबाव बढ़ता गया।

ऐसे में कंपनी पर कर्ज का बोझ बढ़ गया और साल 2012 में कंपनी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया। विशेषज्ञ कहते हैं कि उस समय रतुल पुरी की कंपनी ने सीधे तौर पर चीनी मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री से टक्कर ले ली। उन्हें इस बात का अंजादा ही नहीं था कि इस इंडस्ट्री में चीन बादशाह की तरह है। वह बेहद कम दाम में भी बढ़िया सोलर प्रॉडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग करता है। ऐसे में चीन के सस्ते प्रॉडक्ट के आगे टिक पाना किसी के भी बस की बात नहीं थी और यही गलती रतुल पुरी ने कर दी। 

सीडी, डीवीडी के ढलते युग का असर

इसके बाद सीडी और डीवीडी का चलन खत्म होने लगा और तकनीक के बदलते युग के साथ सीडी और डीवीडी का उत्पादन खत्म हो गया। इसी तरह धीरे-धीरे कंपनी की स्थिति बिगड़ती चली गई। मोजरबेयर की 50 से अधिक वेंडर कंपनियां थीं, जिनमें हजारों लोग काम करते थे। कंपनी के बंद होने के बाद उनके जीवनयापन पर संकट आ गया। फिर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने मोजरबेयर को दिवालिया घोषित कर दिया।
 

4356 करोड़ का कर्ज

कंपनी पर इस वक्त 4356 करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि इसकी इंटरिम प्रोफेशनल रिजोल्यूशन के तहत औसत कीमत 337.45 करोड़ रुपये तय की गई है। इसके बाद रतुल पुरी ने 2012 में मोजरबेयर के निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उनके पिता दीपक पुरी और मां नीता पुरी अभी भी कंपनी के बोर्ड में शामिल हैं। सीबीआई ने मोजरबेयर से संबंधित संजय जैन और विनीत शर्मा के अलावा दीपक और नीता के खिलाफ भी केस दर्ज किया है।
 

354 करोड़ का घोटाला

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने फोरेंसिक ऑडिट के बाद अप्रैल में मोजरबेयर के खाते को फ्रॉड घोषित किया था। बैंक का कहना है कि मोजरबेयर साल 2009 से कर्ज ले रही थी। कई बार कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग भी करवाई गई है। बैंक ने आरोप लगाया है कि कंपनी के निदेशकों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक से फंड जारी करवाया। जबकि इस ऋण का मोजरबेयर, इसके निदेशकों और प्रमोटरों ने निजी तौर पर इस्तेमाल किया। कंपनी की बैलेंस शीट की भी गलत जानकारी दी गई।



बता दें रतुल पुरी 3,600 करोड़ रुपये के अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले की जांच के दायरे में भी हैं। लेकिन अब ईडी ने उन्हें बैंक घोटाला मामले में गिरफ्तार किया है। इससे पहले ईडी ने अदालत में ये बात भी कही थी रतुल पुरी अगस्ता वेस्टलैंड के मामले में जांच से बच रहे हैं। हालांकि पुरी ने अपने खिलाफ गैर जमानती वारंट रद्द करने के लिए कोर्ट में याचिका भी दायर की थी।

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