तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच ये है कावेरी गाथा, पढ़ें
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कावेरी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के लिए 177.25 टीएमसी पानी देने का फैसला सुनाया है वहीं कर्नाटक को 14.75 टीएमसी ज्यादा पानी को मिलेगा। बता दें कि संवैधानिक तौर पर कावेरी एक अंतराज्यीय नदी है। इस नदी के प्रमुख राज्य कर्नाटक और तमिलनाडु है। कावेरी का उद्गम कर्नाटक का कोडागु जिला है। नदीं यहां से निकलकर करीब साढ़े सात सौ किलोमीटर का सफर पूरा करने के बाद यह बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इस नदी के जल के बंटवारे को लेकर एक लंबा विवाद और इतिहास है। जिसे समझने की जरूरत है।
1. कर्नाटक और तमिलनाडु का कहना है कि उन्हें सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है। कर्नाटक ने तमिलनाडु को पानी देने से इनकार किया तो तमिलनाडु ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि उन्हें हर हाल में पानी चाहिए। कर्नाटक का कहना है कि हमारा राज्य सूखे की मार से परेशान है। हम पीने के लिए इस पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं और सिंचाई के लिए पानी बच ही नहीं पा रहा है। ऐसे में तमिलनाडु को और पानी देना संभव नहीं है।
2. यह विवाद 19वीं शताब्दी में शुरू हुआ था। उस वक्त लड़ाई कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच नहीं बल्कि ब्रिटिश राज में आने वाले मद्रास प्रेसीडेंसी और मैसूर राज के बीच में थी।
3. साल 1924 में मद्रास प्रेसीडेंसी और मैसूर राज के बीच एक समझौता हुआ। कुछ सालों बाद इस विवाद में केरल और पुडुचेरी भी शामिल हो गया। इसके बाद यह विवाद और बढ़ गया।
4. आजादी के बाद साल 1972 में इस विवाद को लेकर एक कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पेश की जिस पर लंबी बहस चली और कई सिफारिशों के बाद 1976 में कावेरी के पानी को चारों राज्यों के बीच बांटने को लेकर एक समझौता हुआ।
5. इस समझौते का ऐलान संसद के भीतर भी हुआ लेकिन इसको मानने से राज्यों ने इनकार कर दिया। समझौता का पालन नहीं हुआ और विवाद चलता रहा।
6. साल 1986 के जुलाई महीने में तमिलनाडु ने अंतराज्यीय जल विवाद अधिनियम के तहत केंद्र सरकार से सिफारिश की। उन्होंने निवेदन किया कि एक न्यायाधिकरण का गठन किया जाए।
7. केंद्र सरकार भी बातचीत के पक्ष में थी, केंद्र ने जून 1990 में न्यायधिकरण का गठन किया। 1990 में बनी ट्रिब्यूनल में 16 साल तक सुनवाई चली, 2007 में इस पर फैसला आया। जिसमें तय किया गया कि हर राज्य के हिस्से में कितना पानी आएगा। माना गया कि कावेरी नदी में 740 अरब क्यूबिक फीट पानी है। इसमें से 419 अरब क्यूबिक पानी तमिलनाडु को दिया जाए। कर्नाटक को 270 क्यूबिक पानी, केरल को 30 अरब और पुडुचेरी को 7 अरब क्यूबिक पानी मिलना चाहिए। फैसले से न तो तमिलनाडु खुश थे और न ही कर्नाटक। दोनों राज्यों ने फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर की।
8. साल 2012 में तत्कालिक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई में कावेरी नदी प्राधिकरण ने कर्नाटक को निर्देश दिया कि तमिलनाडु को रोजाना 9 हजार क्यूबिक पानी दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने भी कर्नाटक को लताड़ लगाई। कर्नाटक जैसे ही पानी देने के लिए राजी हुआ वैसे ही वहां हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए।