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उनके निर्णय...हजारों सूर्य की रोशनी देने जैसे रहे, गहरी थी दिवंगत डॉ कलाम और अटल की दोस्ती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 17 Aug 2018 04:36 AM IST
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1980 की बात है। मैं इसरो में था, हमने एसएलवी-3 को सफलता से लॉन्च कर रोहिणी उपग्रह को धुरी पर स्थापित कर दिया था। इस सफलता के जश्न में प्रो. सतीश धवन व उनकी टीम को सम्मानित करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संसदीय विज्ञान फोरम की बैठक बुला ली। बैठक में बताया गया कि कैसे भारत अपने खगोलविदों के समुदाय और उनकी उपलब्धियों पर गर्व करता है। बैठक में अटल बिहारी वाजपेयी ने देश को प्रतिष्ठित अंतरिक्ष समूह में शामिल करने के लिए बधाई देते हुए मुझे गले लगा लिया।
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यह हमारी दोस्ती की शुरुआत थी। हमारा संपर्क बना रहा, मैं 1990 के दशक में रक्षा अनुसंधान व विकास में आ गया। जनलेखा समिति के अध्यक्ष के तौर पर वाजपेयी जी ने विज्ञान, तकनीक और रक्षा कार्यक्रमों को पूरा सहयोग दिया। बाद में रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में अपने कार्यक्रम में मुझसे वे अक्सर पूछते ‘आपका पोकरण कैसा है?’ मैं जवाब देता ‘पोकरण बहुत अच्छा है।’
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मुझे भगवान कृष्ण से जुड़ी एक घटना याद आती है, जब उन्होंने ब्रह्मांड को अपना विश्वस्वरूप दर्शन दिया था। अर्जुन ने उनके इस रूप को देखा, तो बोले-‘केशव, मैं आप में हजारों सूर्य का प्रकाश देख रहा हूं।’ हमने भी यह प्रकाश 1998 के उस दिन देखा, जब सूर्यों की आकाशगंगा पृथ्वी पर उतारी गई थी। इसके बाद हमने वाजपेयी के वे निर्णय और एक्शन देखे, जिन्हाने कई मिशन को रोशनी दी। खासतौर से विकासवादी राजनीति को उन्हांने जो आयाम दिया, उसने देश को प्रगति के अग्रगामी मार्ग पर पहुंचा दिया।
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मैंने वाजपेयी के विचारों की सुंदरता उनकी कविताओं में उतरते देखी। उनकी एक कविता ‘ऊंचाई’ मुझे याद आती है, जिसने मेरे हृदय को छुआ। वे कविता में कहते हैं, व्यक्ति की उपलब्धियां उसे ऊंचाई पर ले जाती हैं, लेकिन जितनी उपब्धियां वह हासिल करता जाता है, उतना ही अकेला होता जाता है। यह अकेलापन वरदान है या श्राप, वे पूछते हैं।
कविता में ही वे जवाब भी देते हैं, व्यक्ति ईश्वर की महान कृति है। उसका दिमाग ही खुशियां पल्लवित करता है, यही खुशियां जीवन के विभिन्न स्तरों में हमारी मित्र होनी चाहिएं। वे कविता को खत्म करते हुए कहते हैं, ईश्वर उन्हें कभी इतना ऊंचाई ना देना कि वे किसी अन्य व्यक्ति को गले लगाने के लिए झुक भी न सकें। उन्हें हमेशा अहंकार से दूर रखे।
भारतरत्न स्व. एपीजे अब्दुल कलाम
पूर्व राष्ट्रपति