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EC: संविधान पीठ ने राजनीति में धनबल के बढ़ते प्रभाव और अपराधीकरण पर की टिप्पणी, जानें फैसले की 10 बड़ी बातें

Thu, 02 Mar 2023 06:30 PM IST
विवेक दास न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Thu, 02 Mar 2023 06:30 PM IST
सार

Supreme Court: संविधान पीठ ने कहा है कि चुनाव आयोग को स्वतंत्र होना ही चाहिए। वह स्वतंत्र होने का दावा करते हुए अनुचित तरीके से कार्य नहीं कर सकता। सरकार के प्रति सहानुभुति रखने वाला एक व्यक्ति स्वतंत्र मानसिक स्थिति नहीं रख सकता है। वहीं, एक स्वतंत्र व्यक्ति सत्ता में बैठे लोगों के प्रति जिम्मेदार नहीं होगा।

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Know About 10 things Supreme Court said in its Election Commission verdict
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला। - फोटो : amarujala.com

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में गुरुवार को कहा कि भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के सदस्यों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति की समिति राष्ट्रपति को सलाह देगी। अपने फैसले में संविधान पीठ ने चुनाव आयुक्तों की स्वतंत्रता, धन बल के बढ़ते प्रभाव और राजनीति में अपराधीकरण जैसे मसलों पर भी टिप्पणी की।

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आइए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले की दस बड़ी बातें क्या-क्या हैं

#1
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धनबल और राजनीति में अपराधीकरण में बहुत वृद्धि हुई है। कोर्ट ने अपने फैसले में मीडिया पर भी टिप्पणी की।

#2
कोर्ट ने कहा कि किसी मौजूदा नियम के तहत नियुक्तियों में कार्यपालिका की पूर्ण भूमिका का स्थायीकरण नहीं किया जा सकता है। राजनीतिक दलों के पास कानून की मांग नहीं करने का एक कारण होगा, जो कि स्पष्ट है। ऐसे में सत्ता में रहने वाली पार्टी के पास एक भ्रष्ट आयोग के माध्यम से सत्ता में बने रहने के मौके तलाशेगी, ऐसा संभव है।
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#3
चुनाव आयोग को स्वतंत्र होना ही चाहिए। वह स्वतंत्र होने का दावा करते हुए अनुचित तरीके से कार्य नहीं कर सकता। सरकार के प्रति सहानुभुति रखने वाला एक व्यक्ति स्वतंत्र मानसिक स्थिति नहीं रख सकता है। एक स्वतंत्र व्यक्ति सत्ता में बैठे लोगों के प्रति जिम्मेदार नहीं होगा।

#4
स्वतंत्रता क्या है? क्षमता (Competence) डर से बंधे होने के लिए नहीं है। सक्षमता के गुणों को स्वतंत्रता होकर हासिल किया जाना चाहिए। एक ईमानदार व्यक्ति आमतौर पर उच्च और शक्तिशाली लोगों का सामना करता है। लोकतंत्र की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक आम आदमी उनसे उम्मीद करता है।

#5
कोर्ट ने कहा कि एक ऐसा चुनाव आयोग जो कानून के शासन की गारंटी नहीं देता है, लोकतंत्र के खिलाफ है। यदि यह अपनी शक्तियों का अवैध रूप से या असंवैधानिक रूप से प्रयोग करता है तो इसका राजनीतिक दलों के परिणामों पर प्रभाव पड़ता है।

#6
संविधान पीठ के अनुसार गलत साधनों को सही नहीं ठहरा जा सकता। लोकतंत्र केवल तभी सफल हो सकता है जब सभी हितधारक चुनाव प्रक्रिया की शुद्धता बनाए रखने पर काम करें, ताकि लोगों की भावनाओं को प्रतिबिंबित किया जा सके। मीडिया कवरेज और अन्य साधनों में वृद्धि के साथ चुनाव मशीनरी के दुरुपयोग बातें सामने आती हैं। 

#7
कोई भी प्रक्रिया जो इस न्यायालय के समक्ष चुनाव प्रक्रिया में सुधार करना चाहती है उस पर विचार किया जाना चाहिए। एक बार परिणाम आने के बाद यह विषय काफी हद तक एक काल्पनिक विषय बन जाता है। लिंकन ने लोकतंत्र को लोगों की ओर से और लोगों के लिए शासन घोषित किया। ऐसे में सरकार को कानून के अनुसार चलना चाहिए।

#8
नियुक्ति की शक्तियों का दुरुपयोग किया जा सकता है, इसका असर पूरे देश पर हो सकता है। राजनीतिक दलों और उनके उम्मीदवारों का भाग्य चुनाव आयोग के हाथों में है। महत्वपूर्ण रूप से निर्णय उन लोगों की ओर से लिए जाते हैं जो इसके मामलों को संभालते हैं।


#9
लोकतंत्र का लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकता है जब राजनीतिक दल इसे अक्षरश: बनाए रखने का प्रयास करें। हमने पाया कि चुनाव आयोग के पास राज्यों और संसद के चुनाव कराने के लिए कर्तव्य और शक्तियां हैं। ऐसे उसमें उसकी जवादेही है कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करे।

#10
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ठोस और उदार लोकतंत्र की पहचान को हर हाल में ध्यान में रखा जाना चाहिए। लोकतंत्र लोगों की शक्ति से अटूट रूप से जुड़ा हुआ है। बैलट (मतपत्र) की शक्ति सर्वोच्च है, जो सबसे शक्तिशाली दलों को सत्ता से हटाने में सक्षम है।
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