फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Khabaron Ke Khiladi Women Reservation Bill Nari Shakti Vandan Bill 2026 Lok Sabha test fail Analysts explained

Khabaron Ke Khiladi: क्या गिरने के लिए ही आया था महिला आरक्षण से जुड़ा बिल, विश्लेषकों ने बताई अंदर की कहानी

Sat, 18 Apr 2026 09:03 PM IST
Kirtivardhan Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Sat, 18 Apr 2026 09:03 PM IST
सार

इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में लोकसभा में पेश हुए नारी शक्ति वंदन विधेयक, 2026 और इसके पारित न हो पाने के मुद्दे पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अनुराग वर्मा और गुंजा कपूर मौजूद रहीं। 

विज्ञापन
Khabaron Ke Khiladi Women Reservation Bill Nari Shakti Vandan Bill 2026 Lok Sabha test fail Analysts explained
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा में पेश किया गया महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका। वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट दिया। सदन में मौजूद कुल 528 सदस्यों में से बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की जरूरत थी, जिसे सरकार हासिल नहीं कर सकी। इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अनुराग वर्मा और गुंजा कपूर मौजूद रहीं। 
विज्ञापन


विज्ञापन

गुंजा कपूर: बिल का पास नहीं होने के बाद मैं ये कह सकती हूं कि यह बिल पास हो जाता तो परिवारवाद को संस्थागत करने का मौका मिल गया। आपको अगर वाकई में सशक्त करना है तो जो मौजूदा 543 सीटें है उसमें से 33 फीसदी सीटें महिलाओं को दे दीजिए। शायद ये तीन दिन का सत्र केवल नैरेटिव बिल्डिंग के लिए ही था। अगर सच में ऐसा है तो ये बहुत ही दुखद है। 


पूर्णिमा त्रिपाठी: बिल 2023 में पास हो चुका था। दोनों सदनों ने इसकी मंजूरी दे दी थी। अगर सरकार वाकई में चाहती थी 2024 में इस पर काम  शुरू कर देती। ये बिल बैक डोर से परिसीमन को लागू करने के लिए लाया गया था। डिलिमिटेशन पर अगर आप बिल पास करना चाहते तो पहले आप विपक्ष से चर्चा करते। आपने ऐसा कुछ नहीं किया। मुझे नहीं लगता कि विपक्ष पर महिला विरोधी होने का तमगा चिपकेगा। 

राकेश शुक्ल: सबसे मूल प्रश्न ये है कि भाजपा के 12 साल के कार्यकाल में ऐसा कोई कदम नहीं उठाय जो विफल रहा हो। ये पहली बार हुआ है। ऐसा क्यों हुआ ये सबसे बड़ा प्रश्न है। इसका जवाब सिर्फ दो लोगों के पास है। पहला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरा गृह मंत्री अमित शाह। दूसरा बड़ा प्रश्न ये है कि जब हर चीज की शुरुआत या समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते थे, तो इसमें वो बीच में क्यों आए। ऐसे कई प्रश्न है जिसका जवाब नहीं मिल रहा है। 

अनुराग वर्मा: बात ये आती है कि जो पार्टी मैनेजमेंट में इतनी मजबूत बताई जाती है। उसने ऐसा कदम क्यों उठाया? एक चीज जो पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले जो मूछों का प्रश्न बन गया है। उस स्थिति में सत्ता पक्ष ने एक तरह की लैंडमाइन बिछा दी। जब तक सीटें बढे़ंगी नहीं तो नए लोगों को मौका कैसे मिलेगा। मुझे तो सीटें बढ़ाने में कोई आपत्ति नहीं दिखती है। 
विनोद अग्निहोत्री: कोई भी सरकार जब कोई संविधान संसोधन विधेयक लेकर आती है तो उसका पूरा इंतजाम करने के बाद लेकर आती है। इस सरकार ने दो तिहाई बहुमत जुटाने के लिए कोई एक्सरसाइज नहीं की। इससे लगता है कि इस पूरे मामले में छुपे हुए उद्देश्य और प्रकट उद्देश्य में कुछ न कुछ अंतर जरूर है। मुझे लगता है कि महिला आरक्षण की जहां तक बात है तो वो तो 2023 में पारित हो चुका है। कोई पुरुष सांसद अपनी सीट खोना नहीं चाहता है ये सत्य है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed