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Khabaron Ke Khiladi: राम मंदिर में चंदे की चोरी लापरवाही या नीयत में खोट का नतीजा, खबरों के खिलाड़ी ने बताया

Sat, 20 Jun 2026 09:04 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 20 Jun 2026 09:04 PM IST
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Khabaron Ke Khiladi Ram Mandir Donation Issue Scam Analysis Corruption news and updates
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला/AI
राम मंदिर की दान राशि हेरफेर का मामला इस हफ्ते सुर्खियों में रहा। जिन लोगों के हाथ में मंदिर की व्यवस्था थी वो सभी सवालों के घेरे में हैं। ट्रस्ट के पदाधिकारियों और कर्मचारियों से लेकर चंदे की गणना में लगे बैंक कर्मी तक सवालों के घेरे में हैं। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पीयूष पंत, राकेश शुक्ल और श्रीनिवास मौजूद रहे।
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श्रीनिवास: सियासत को इससे दूर ही रखें तो ठीक होगा। 2021 में महिपाल सिंह नाम का एक लेखाधिकारी होता था, उसने शिकायत की थी। शिकायत के बाद वो लेखाधिकारी ही ट्रस्ट से बाहर हो गया। मुझे लगता है कि चंपत राय को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। पूरे प्रांगण में 800 कैमरे लगे हैं, उसके बाद भी चोरी कैसे हो गई। जब राम मंदिर आंदोलन चल रहा था, तब से लेकर आजतक चंदे का कोई लेखा-जोखा नहीं आया। इस मामले की एफआईआर कराकर ठीक ढंग से जांच होनी चाहिए। 
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पीयूष पंत: इस मामले में बहुत बड़े-बड़े लोगों की संलिप्तता है, लेकिन पकड़े बहुत छोटे लोग जा रहे हैं। ये सब बहुत पहले से चल रहा है। इस मामले में एसआईटी का कोई मतलब नहीं है। अब तक एफआईआर तक नहीं हुई है। ये किस तरह का प्रबंधन है। दावा तो ये भी किया जा रहा है कि कंस्ट्रक्शन में भी बहुत ज्यादा भ्रष्टाचार हुआ है। वहां लगातार चोरी हुई और उसे टालने की कोशिश की जा रही है। 

समीर चौगांवकर: ये मामला बहुत गंभीर है। अब तक ट्रस्ट क्यों बना हुआ है। उसे अब तक बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए था। अगर चंदे की चोरी हो रही थी तो खुद ट्रस्ट को इसकी एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी। उसने ऐसा क्यों नहीं कराया? एसआईटी ने इतने दिन पूछताछ की, क्या उसने अभी तक कुछ बताया? मुझे लगता है कि इन सबका बयान आना चाहिए था। इस मामले में संघ की चुप्पी ने मुझे हैरान किया है, प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी ने मुझे हैरान किया है। ये धर्म के साथ बहुत बड़ा अपराध है। सच्चाई सामने आनी चाहिए। एक हिंदू होने के नाते मैं शर्मिंदा महसूस कर रहा हूं। 

राकेश शुक्ल: चंपत राय मौन क्यों हैं? उन्हें सामने आकर बताना चाहिए। ये आस्था की चोरी हुई है। 2024 में तिरुपति के घी में चर्बी का मामला उठाया था, चंद्रबाबू नायडू ने, उसका क्या हुआ? अगर तिरुपति बालाजी में घी में चर्बी होने से धर्म भ्रष्ट हुआ था तो क्या इस चोरी से धर्म भ्रष्ट नहीं हुआ। जो लोग उस समय मुद्दा उठा रहे थे उनका मौन रहना भी सवालों के घेरे में है। सुप्रीम कोर्ट को व्यवस्था से जुड़े हर शख्स की गंभीरता से जांच करनी चाहिए। इस मामले में हटाने की और छिपाने की कोशिश नहीं होती तो एसआईटी गठित नहीं होती। एसआईटी की भूमिका आजकल जांच की जगह सुविधाजनक जांच के रूप में हो गई है। 

विनोद अग्निहोत्री: राम मंदिर आंदोलन के समय से ही पैसे का कभी कोई हिसाब नहीं दिया गया। रुपये जो गए सो गए, लोगों ने जेवर दिए, शिलाएं दान कीं, जिनमें सोने-चांदी की शिलाएं थीं वो सब कहां गईं? ये सिर्फ हिंदूओं की आस्था का मामला नहीं है। राम भारतीयता का प्रतीक हैं। ये भारतीयता को तकलीफ देने वाला मामला है। ये जो एसआईटी बनी है, वो एसआईटी है ही नहीं। एसआईटी हमेशा एफआईआर के बाद गठित होती है। ये सिर्फ एक जांच कमेटी है। यहां ऐसा कुछ नहीं है।
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