संघ-भाजपा के एजेंडे में केरल बना नंबर वन, वामपंथ से निपटने की तैयारी
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संघ-भाजपा के एजेंडे में केरल का मामला नंबर वन पर आ गया है। केरल में संघ कार्यकर्ताओं की हो रही हत्या के खिलाफ भाजपा, संघ और केंद्र सरकार तीनों ही एकजूट होकर वहां की वाम सरकार के विरूद्ध सियासी हमला बोलेंगे।
केरल की लडाई को भगवा परिवार वाम विचारधारा के साथ अपनी अंतिम लडाई के रूप में देख रहा है। इस अंतिम लडाई को जीतने के मकसद से भाजपा और संघ के शीर्ष नेतृत्व ने साझा अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
सूत्र बताते हैं कि मंगलवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैय्या जी जोशी, सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल और दत्तात्रेय होसबोले ने बैठक कर केरल में चल रहे घटनाक्रमों को लेकर वामदलों के खिलाफ साझा अभियान चलाने की रणनीति पर मंत्रणा की थी।
जिसका असर देखने को भी मिल रहा है। गुरूवार को संसद में केरल में हो रही हत्याओं को लेकर भाजपा और वाम दलों के बीच हुई न सिर्फ तीखी गहमा-गहमी हुई बल्कि इसके वजह से लोकसभा की कार्यवाही में बार-बार व्यवधान उत्पन्न हुआ और कार्यवाही संक्षिप्त रूप से स्थगित करनी पड़ी।
इसके अलावा संघ ने अपने सबसे तेजतर्रार अधिकारी मानेें जाने वाले सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले को मीडिया के समझा मोर्चे पर उतारा है। वे शुक्रवार को राष्ट्रीय मीडिया से केरल के मामले को लेकर मुलाकात करेंगे।
तो दूसरी ओर सरकार ने तार्किक क्षमता से लैस अपने सबसे तेजतर्रार मंत्री अरूण जेटली को रविवार को केरल भेजने का निर्णय लिया है। रविवार को केरल पहुंचकर जेटली प्रदेश की वाम सरकार के खिलाफ कडा हमला बोलेंगे। तो केंद्रीय गृहमंत्रालय को भी मामले में सक्रियता दिखाने के निर्देश दिए गए हैं।
भगवा परिवार के लिए क्यों अहम है केरल की जंग
केरल की जंग भगवा परिवार के लिए इसलिए अहम बन गई है कि शुरू से ही उसका वैचारिक मुकाबला वामपंथ से ही रहा है। कांग्रेस पार्टी के साथ मुकाबले को संघ परिवार वैचारिक मुकाबले के रूप में नहीं देखता है। बल्कि कांग्रेस का उससे मुकाबला राजनैतिक है।
यही वजह है कि भगवा परिवार वैचारिक जंग में वाम को मात देना चाहता है। लोकसभा में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर भगवा परिवार ने राजनैतिक जंग तो जीत ली है। लेकिन वैचारिक जंग के रूप में वामपंथ से उसका आर-पार का मुकाबला अभी बाकी है।
यही वजह है कि सरकार और भाजपा को साथ लेकर संघ अब केरल की वामपंथी सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई छेड़ रहा है। भगवा परिवार को मालूम है कि पूरे देश में कहीं मजबूत पकड़ है तो वह केरल में ही है।
इसलिए भगवा परिवार केरल में हो रही राजनीतिक कार्यकर्ताओं के हत्या के मामले को देशभर में उभारकर वामपंथ को पटकनी देने के मूड में है। यदि केरल में वह वामपंथ को वैचारिक मात देने में सफल रहा तो उसकी सामने बची अंतिम चुनौती भी खत्म हो जाएगी।
असहिष्णुताऔर मॉब लिंचिंग सरीखे आवाजों के पीछे वाम को दोषी मानता है संघ
संघ का तर्क है कि मोदी सरकार के खिलाफ उठने वाली ये आवाजें वामबुद्धिजिवियों की कवायद का नतीजा है। संघ के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि वामपंथ उनके खिलाफ सीधी लडाई नहीं जीत सकता है।
इसलिए बौद्ध्कि जगत में व्यापत अपने लोगों के जरिए वह समय-समय पर असहिष्णुता, बीफ, गौहत्या और मॉब लिंचिंग सरीखे मुद्दों को हवा देता रहता है।
वाम को बौद्धिक टक्कर देने के लिए संघ का है तगड़ा होमवर्क
जोकि अपने-अपने क्षेत्रों में संघ की आवाज को आगे बढ़ाएंगे। इसके रणनीतिकार खुद सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले हैं। तो फ्रंट पर इस कवायद को अंजाम देने के लिए संघ ने अपने एकऔर तेजतर्रार प्रचारक जे नंद कुमार को काम में जुटा रखा है। बीते वर्ष संघ इस मामले पर एक प्रस्ताव भी पारित कर चुका है।
भगवा आरोपों को वाम ने किया खारिज