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Kerala: क्या गुजरात के कच्छ में उल्कापिंड टकराने से खत्म हुई सिंधु घाटी सभ्यता? रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

Sat, 16 Dec 2023 02:11 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 16 Dec 2023 02:11 PM IST
सार

भूवैज्ञानिक केएस सजिन कुमार ने बताया कि अभी हम सिर्फ इतना कह सकते हैं कि यह उल्कापिंड करीब 6900 साल पहले धरती से टकराया था लेकिन अभी हमें इसकी सटीक तारीख और इससे हुए प्रभाव का पता लगाना बाकी है। 

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kerala university scintist team reserch on kutch crater which ends indus valley civilisation
कच्छ का क्रेटर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केरल यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिकों की एक टीम ने अपनी रिसर्च में दावा किया है कि गुजरात के कच्छ में स्थित क्रेटर (एक बड़ा सा गड्ढा) उल्कापिंड के टकराने से बना है। रिसर्च टीम का दावा है कि धरती पर मानव सभ्यता की शुरुआत के बाद से यह संभवतः देश का सबसे बड़ा क्रेटर है। केरल के भूवैज्ञानिकों की टीम ने कच्छ में क्रेटर की जगह से मिले पत्थरों का विश्लेषण किया और जांच में पता चला है कि यह पत्थर उल्कापिंड का हिस्सा हैं। 
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रिसर्च में हुआ अहम खुलासा
माना जा रहा है कि यह उल्कापिंड करीब 6900 साल पहले धरती से टकराया और इसी दौरान सिंधु घाटी सभ्यता भी मौजूद थी। बता दें कि सिंधु घाटी सभ्यता दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुए एक शोध के मुताबिक सिंधु घाटी सभ्यता कम से कम 8000 साल पुरानी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अब इस खुलासे के बाद सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में ज्यादा बेहतर जानकारी मिल सकती है। वैज्ञानिकों की टीम का नेतृत्व करने वाले भूवैज्ञानिक केएस सजिन कुमार ने बताया कि अभी हम सिर्फ इतना कह सकते हैं कि यह उल्कापिंड करीब 6900 साल पहले धरती से टकराया था लेकिन अभी हमें इसकी सटीक तारीख और इससे हुए प्रभाव का पता लगाना बाकी है। 
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कच्छ में क्रेटर रिसर्च सेंटर स्थापित करने की मांग
सजिन कुमार ने बताया कि उन्होंने पीएम मोदी को यह प्रस्ताव भेजा है कि गुजरात के कच्छ में एक क्रेटर रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाए। यह भारत में मिलने वाला चौथा क्रेटर है और भारतीय टीम द्वारा खोजा गया पहला क्रेटर है। इससे पहले तीन क्रेटर विदेशी वैज्ञानिकों ने खोजे थे। बता दें कि जिस जगह क्रेटर मिला है, वह सिंधु घाटी सभ्यता की जगह से महज 200 किलोमीटर दूर है। हालांकि अभी इस बात को लेकर वैज्ञानिक उलझन में हैं कि क्या उल्कापिंड के धरती से टकराने के कारण ही सिंधु घाटी सभ्यता समाप्त हुई या इसकी कोई और वजह थी?
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करीब दो किलोमीटर चौड़ा है क्रेटर
क्रेटर करीब 2 किलोमीटर चौड़ा है। माना जा रहा है कि करीब 100-200 मीटर चौड़े उल्कापिंड की वजह से इतना चौड़ा गड्ढा बना होगा। इससे उड़ी धूल को बैठने में करीब एक महीने का वक्त लगा होगा। वैज्ञानिकों की यह रिसर्च साइंटिफिक जर्नल साइंस डायरेक्ट में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों ने बताया कि वह विदेशी वैज्ञानिकों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उल्कापिंड के धरती से टकराने का सही समय क्या था। सजिन कुमार ने कहा कि हमें इस जगह को बचाने की जरूरत है। अभी यह दलदली भूमि है जो धीरे धीरे तबाह हो रही है और साल के 11 महीने इसमें पानी भरा होता है। 
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