'भारतीय छात्र संसद' में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने दिए बेबाकी भरे जवाब
आरिफ मोहम्मद खान ने अपने जवाब में कहा, लड़ाई चाहे जिससे भी लड़ो मगर बैर भाव नहीं रखो। अपनी बात पर कायम रहो। जब आतंकवाद है तो उसका मुकाबला करना ही होगा। अहिंसा में भी बल प्रयोग मना नहीं है। केवल नफरत करना मना है।
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पाकिस्तान ऐसा करने से कभी पीछे नहीं हटेगा। अतीत की भांति वह आगे भी यह सब करता रहेगा। यह उसकी अधिकारिक नीति बन चुकी है। पाकिस्तान कभी मानेगा, ऐसा संभव नहीं है। यह बात केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कही है।
वे शुक्रवार को विज्ञान भवन में चल रही 'भारतीय छात्र संसद' के एक सत्र में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेने के लिए पहुंचे थे। युवाओं ने उनसे सवाल पूछा था कि पाकिस्तान आतंकवाद की घटनाओं में क्यों शामिल रहता है। क्या कभी वह अपनी इस हरकत से बाज आएगा।
नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में भारतीय छात्र संसद का शुभारंभ गुरुवार को को उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने किया था। शुक्रवार को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान दोपहर के सत्र में बतौर मुख्य अतिथि यहां पहुंचे। उनके सत्र का विषय था, 'आतंकवाद का मुकाबला, विद्रोह और नक्सलवाद, कारण और चुनौती'।
इस दौरान युवाओं ने खान से तीन प्रश्न पूछे। पहला, सवाल मीनल पाटिल ने किया। उन्होंने पूछा, सीमाओं के बाहर तो आतंकवाद है ही, मगर इसके भीतर भी आतंकवाद है। वह धार्मिक आतंकवाद है। इसमें हमारे भाई शामिल हैं, इनसे कैसे लड़े।
आरिफ मोहम्मद खान ने अपने जवाब में कहा, लड़ाई चाहे जिससे भी लड़ो मगर बैर भाव नहीं रखो। अपनी बात पर कायम रहो। जब आतंकवाद है तो उसका मुकाबला करना ही होगा। अहिंसा में भी बल प्रयोग मना नहीं है। केवल नफरत करना मना है।
आक्रमण के बढ़ते हाथ को रोकना हमारा कर्तव्य है। आतंकवाद सीमा के इस पार हो या उस पार, वह मानव जाति के लिए खतरा है। उसे खत्म करना ही होगा।
दूसरा सवाल गणेश जोशी ने किया। उन्होंने पूछा, नक्सलवाद पहले जंगलों तक सीमित था, अब शहरों की ओर आ रहा है। इसके जवाब में खान ने कहा, इसका मुकाबला दो तरह से किया जा सकता है। अगर दूसरी तरफ किसी ने कानून हाथ में लिया है तो उसका मुकाबला प्रशासनिक कदम या कार्रवाई से ही करना होगा।
दूसरा, विचार के स्तर पर मुकाबला होता है। हमारे भारत ने गुलामी देखी, गरीबी झेली और शोषण देखा है। यही भारत कभी सोने की चिड़िया कहलाता था।
आजादी मिली, हम संभले और आगे बढ़ने लगे। दुनिया के बड़े लोकतंत्र के रूप में हमने कदम रखा। विभिन्न राष्ट्रों के बेहतर संविधानों में हमारे देश का संविधान है। नक्सलवाद का विचार हर जगह एक जैसी ही रहता है। उसे समाज में जागरूकता लाकर खत्म किया जा सकता है।सरकार को भी तेजी से काम करना होगा।
तीसरा सवाल, जितेंद्र साहू ने पूछा। उनका प्रश्न था, पाकिस्तान अपनी आतंकवाद की नीति से बाज क्यों नहीं आ रहा है। खास संप्रदाय के लोग ही आतंकवादी घटनाओं में क्यों शामिल रहते हैं। आरिफ मोहम्मद खान ने जवाब देते हुए कहा, पाकिस्तान में विभिन्न फोर्स के लोग रोजाना सुबह शपथ लेते हैं कि हमें बांग्लादेश का बदला लेना है। यह उसकी नीति में शामिल है।
हम पिछले तीस साल से आतंकवाद झेल रहे हैं। हमें प्रभावी जवाब देना होगा। हम दे भी रहे हैं। अनुच्छेद 370 में आतंकवाद का भूत घुस गया था, अब उसे बाहर निकाल दिया है। कश्मीर में स्थिति सामान्य है। आने वाले दिनों में आतंकवाद पर शिकंजा कसता हुआ देखेंगे।
भारतीय छात्र संसद का समापन रविवार को होगा। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहेंगे। छात्र संसद में देवेंद्र फड़नवीस, शिवराज पाटिल, कैलाश सत्यार्थी, शेखर गुप्ता, स्मृति ईरानी, पवन खेडा, नितिन गडकरी, शकुंतला साहू, विजय दर्दा, प्रकाश करात, ज्योतिरादित्य सिंधिया, उदय सामंत, राजनाथ सिंह, आरिफ मोहम्मद खान, नाना पटोले, अनुराग ठाकुर, अर्जुन राम मेघवाल, नैना लाल किदवई, डॉ. आजाद जमान, प्रो. डॉ. नागेश्वर राव, कपिल सिब्बल, दिनेश शर्मा, रबिंद्र नाथ मेहतो, प्रहलाद जोशी, डॉ. अशोक पी हिंदूजा, प्रकाश पी हिंदूजा, डॉ. सीपी जोशी, राजेश टोपे, राज्यवर्धन सिंह राठौर, मुख्तार अब्बास नकवी, आदित्य ठाकरे, कृष्णा पूनियां और डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक आदि कई केंद्रीय मंत्री, सांसद एवं विधायक भाग ले रहे हैं। रविवार को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी के साथ जस्टिस (रिटायर) एन संतोष हेगड़े, कुंवर नटवर सिंह और कैप्टन अमरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहेंगे।