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कोविड-19 संक्रमण ने बना दिया मजबूरी का करवा चौथ, मन मसोस कर रह जा रही हैं सुहागिनें

Wed, 04 Nov 2020 06:05 PM IST
संजीव कुमार झा शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 04 Nov 2020 06:05 PM IST
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Karwa Chauth 2020, women celebrating Karwa Chauth disappointed due to coronavirus infection
करवा चौथ

मनीषा ने पिछले करवाचौथ से पहले मेंहदी और ब्यूटी पार्लर पर अच्छा पैसा खर्च किया था। गुडग़ांव की एक कंपनी के लिए प्रोफाइल मैनेजमेंट प्रोफेशनल मनीषा के पति क्नॉट प्लेस में काम करते हैं और उन्होंने एक सोने की चैन और कान का टॉप्स उपहार में दिया था।

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लेकिन इस बार न तो मनीषा मन से करवा चौथ के पहले जैसा श्रृंगार करने के लिए खर्च पा रही हैं और न ही उन्हें पति राजकुमार चौधरी से किसी बड़े उपहार की उम्मीद है। मनीषा का कहना है कि कोविड-19 ने इस बार करवाचौथ के त्यौहार को फीका कर दिया है।
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यही स्थिति बुटीक चलाने वाली सीमा चौधरी और एक गेस्ट हाउस में रिसेप्शनिस्ट की जिम्मेदारी संभालने वाली मनु त्यागी की भी है। सीमा चौधरी के पति शेफ थे। वह दिल्ली की एक मशहूर रेस्तरां में काम कर रहे थे और अगस्त 2020 से बेरोजगार हैं। सीमा चौधरी कहती हैं कि इस बार तो गजरा और फूल से त्योहार मना लेंगे।
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मनु त्यागी के पति एलआईसी समेत तमाम बीमा कंपनियों में निवेश कराते हैं। मनु ने भी अपने पति से न तो कोई डिमांड रखी और न ही रखने के बारे में सोचा। वह कहती हैं कि अभी घर का और बच्चों की स्कूली पढ़ाई  का खर्च जाए तो यही काफी है।

मेंहदी है, लगाने वाले हैं, लगवाने वाली सुहागिनें आए तब न
मधुविहार में आप जाइए तो एक लाइन से 25 प्रोफेशनल मेंहदी लगाने के लिए तैयार बैठे दिख जाएंगे। मेंहदी लगवाने के लिए ग्राहकों का मोढ़ा भी रखा मिलेगा, लेकिन इनमें से केवल आधे ही भरे दिखाई दिए। मुजफ्फरपुर के विपिन कुमार बताते हैं कि पिछले साल तो यहां बड़ी लंबी लाइन लगी थी।

दो-तीन दिनों तक सुहागिनों की लाइन लगती थी और मेंहदी लगाने वाले साथ के लड़के थक जाते थे। इस बार ऐसा नहीं है। सुरेंद्र का कहना है कि एक तो कोविड-19 के संक्रमण कारण संपन्न घरों के लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। जो आ भी रहे हैं, वह सैनिटाइजर, मास्क आदि की सावधानी के बाद भी काफी सतर्क हैं।

इसके अलावा लोगों की बाजार में खर्च करने की क्षमता घटी है। सुरेंद्र का कहना है कि मध्यम वर्ग की महिलाओं की संख्या पर बड़ा असर पड़ा है। वहीं बड़े घरों में लोगों ने घर पर ही मेंहदी लगाने के लिए प्रोफेशनल्स को बुक किया है।  

हमारे यहां लाइन लग जाती थी और आज केवल तीन ग्राहक आए
लक्ष्मी नगर शकरपुर की मार्केट में भारत ज्वेलर्स के अश्विनी बग्गा की सुनिए। अश्विनी बग्गा का कहना है कि हर साल करवा चौथ से दो-तीन दिन पहले से दुकान पर ग्राहकों की लाइन लग जाती थी। जोरदार बिक्री होती थी। दीपावली तक दुकान की रौनक बनी रहती थी, लेकिन अभी ग्राहक दिखाई नहीं दे रहे हैं।

80 के दशक से सोने के कामकाज में लगे बग्गा का कहना है कि इस तरह का बाजार में सूनापन कभी दिखाई नहीं दिया था। सोने की चमक को देखकर ही बग्गा ने अपने पुत्र गौरव बग्गा को भी इसी कारोबार में उतारा। गौरव बग्गा बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद नई फर्म का पंजीकरण करके लोगों को निवेश कराते हैं। गौरव का कहना है कि 25 मार्च 2020 से इस क्षेत्र का कामधाम ठप पड़ा है।


कपड़े का कारोबार भी नहीं दिखा रहा है रौनक
कुमार साड़ी भंडार हो या रॉकी गारमेंट्स। क्नॉट प्लेस से लेकर खान मार्केट, वी3एस मॉल में नल्ली सिल्क साडियों का शो-रूम। करवा चौथ जैसा त्यौहार भी बाजार में भीड़-भाड़ और रौनक नहीं ला पा रहा है। सुनील मल्होत्रा का कहना है कि पिछले साल इस समय जो कारोबार हो रहा था, अभी उसका केवल 55-60 फीसदी कारोबार पटरी पर आ पाया है। जबकि खर्च पहले जितना ही है। पंकज त्रेहान का जयपुर से लेकर दिल्ली तक रंगीन शीशे और चित्रकारी का काम है। पंकज त्रेहान का कहना है कि उनका धंधा तो लगभग चौपट हो चुका है।

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