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कार्ति केस: सुप्रीम कोर्ट निर्णय लेगा कि क्या वह सीबीआई जांच दस्तावेज देख सकता है
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Thu, 12 Oct 2017 07:18 AM IST
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कार्ति चिदंबरम
- फोटो : SELF
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह अन्य मुद्दों पर गौर करने से पहले इस सवाल का निर्णय करेगा कि क्या पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम के खिलाफ एक मामले की जांच से संबंधित दस्तावेज देखने का अधिकार है।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ इस मुद्दे पर फैसला सुनाएगी कि क्या विशेष अनुमति याचिका के जरिये दायर अपील में शीर्ष अदालत जांच से संबंधित दस्तावेज देखने की हकदार है।
कार्ति से संबंधित प्रकरण में यह दिलचस्प मोड़ उस वक्त आया जब जांच ब्यूरो की ओर से एडिशनल सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को जांच से संबंधित दस्तावेज दिखाने की मंशा जाहिर की।
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वहीं कार्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस पर आपत्ति दर्ज की। जांच ब्यूरो द्वारा 15 मई को दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि जब 2007 में कार्ति के पिता पी. चिदंबरम वित्त मंत्री थे तो उस समय आईएनएक्स मीडिया को विदेश से 305 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त करने के लिए विदेश निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी में अनियमितताएं हुईं।
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ इस मुद्दे पर फैसला सुनाएगी कि क्या विशेष अनुमति याचिका के जरिये दायर अपील में शीर्ष अदालत जांच से संबंधित दस्तावेज देखने की हकदार है।
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कार्ति से संबंधित प्रकरण में यह दिलचस्प मोड़ उस वक्त आया जब जांच ब्यूरो की ओर से एडिशनल सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को जांच से संबंधित दस्तावेज दिखाने की मंशा जाहिर की।
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वहीं कार्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस पर आपत्ति दर्ज की। जांच ब्यूरो द्वारा 15 मई को दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि जब 2007 में कार्ति के पिता पी. चिदंबरम वित्त मंत्री थे तो उस समय आईएनएक्स मीडिया को विदेश से 305 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त करने के लिए विदेश निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी में अनियमितताएं हुईं।