EXIT POLL: कर्नाटक में किसी को बहुमत नहीं, 'किंगमेकर' के रोल में JDS!
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कर्नाटक में शनिवार को मतदान खत्म होने के बाद आए एग्जिट पोल के नतीजों की मानें तो राज्य में किसी भी पार्टी को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में जनता दल (एस) के ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आने की संभावना दिख रही है।
पांच टीवी चैनलों के सर्वेक्षण में भाजपा को जबकि दो में कांग्रेस को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की उम्मीद जताई गई है। टाउम्स नाउ ने दो सर्वे किए हैं, इसमें चाणक्य के साथ मिलकर किए सर्वे में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है।
रिपब्लिक टीवी-जन की बात, एबीपी-सी वोटर, टाइम्स नाउ, इंडिया न्यूज और न्यूज नेशन के एग्जिट पोल के अनुसार विधानसभा में भाजपा सबसे बड़ा दल होगा, जबकि इंडिया टीवी और आज तक-एक्सिस माई इंडिया के अनुसार कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होगी। पूर्ण बहुमत के लिए 112 सीटों की दरकार होगी।
आज तक के सर्वेक्षण में कांग्रेस और भाजपा को क्रमश: 39 फीसदी और 35 फीसदी वोट मिलने की बात कही गई है जबकि रिपब्लिक टीवी के अनुसार कांग्रेस को 36 फीसदी और भाजपा को 38.25 फीसदी वोट मिलेंगे।
बता दें कि 2013 के चुनाव में कांग्रेस को 122 और भाजपा एवं जदएस को 40-40 सीटें मिली थीं। कांग्रेस को तब भाजपा के मतों में विभाजन का फायदा मिला था क्योंकि बीएस येदियुरप्पा ने भाजपा से अलग होकर कर्नाटक जनता पक्ष का गठन किया था और अलग चुनाव लड़ा था। देखिए क्या अनुमान हैं:-
सी-वोटर
| भाजपा | 97-109 |
| कांग्रेस | 87-99 |
| जनता दल-एस | 21-30 |
| अन्य | 0 |
टाइम्स नाउ
| भाजपा | 80-93 |
| कांग्रेस | 90-103 |
| जनता दल-एस | 31-39 |
| अन्य | 2-4 |
एबीपी न्यूज
| भाजपा | 97-109 |
| कांग्रेस | 87-99 |
| जनता दल-एस | 21-30 |
| अन्य | 0 |
रिपब्लिक टीवी
| भाजपा | 95-114 |
| कांग्रेस | 73-82 |
| जनता दल-एस | 32-43 |
| अन्य | 2-3 |
इंडिया टीवी
| भाजपा | 87 |
| कांग्रेस | 97 |
| जनता दल-एस | 35 |
| अन्य | 03 |
वीएमआर
| भाजपा | 80-93 |
| कांग्रेस | 90-103 |
| जनता दल-एस | 31-39 |
| अन्य | 2-4 |
कर्नाटक विधानसभा की मौजूदा स्थिति
कर्नाटक के साढ़े चार करोड़ से भी ज्यादा मतदाता अगले पांच साल के लिए अपनी सरकार चुनने के लिए मतदान कर चुके हैं। विकास और भ्रष्टाचार के मुद्दों से शुरू हुआ चुनाव प्रचार आखिर तक आते-आते अहिंदा के जातीय समीकरण और हिंदुत्व के ध्रुवीकरण की लड़ाई में बदल गया।
अगर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अहिंदा समीकरण के अपने पक्ष में गोलबंद होने वाले लिंगायत कार्ड का दांव कामयाब हुआ तो कांग्रेस की सरकार बनने की संभावना बनती है, लेकिन अगर भाजपा अपने लिंगायत, सवर्ण जनाधार को समेटे रखते हुए हिंदुत्व के ध्रुवीकरण के दांव के जरिए अहिंदा को कमजोर करने में कामयाब रही तो कर्नाटक की गद्दी के लिए उसकी राह आसान होगी।
अगर जनता दल (एस) अपने प्रभावक्षेत्र में वोक्कालिगा के साथ अपने मुस्लिम वोटों को बनाए रखने में कामयाब हुआ तो त्रिशंकु विधानसभा में सत्ता की कुंजी देवेगौड़ा परिवार के हाथ में होगी।
चुनाव प्रचार के पहले दौर में कांग्रेस के मुकाबले भाजपा पिछड़ती दिखाई दे रही थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मैदान में उतरते ही भाजपा कार्यकर्तांओं और समर्थकों में खासा जोश आ गया और भाजपा कड़े मुकाबले में आ गई। खासकर तटीय कर्नाटक, बेंगालुरू, मध्य कर्नाटक, हैदराबाद कर्नाटक के भाजपा के प्रभावक्षेत्र में मोदी की रैलियों का काफी असर पड़ा। इन रैलियों के जरिए भाजपा ने हिंदुत्व के ध्रुवीकरण का दांव भी जमकर खेला।