कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी सरकार को लेकर कांग्रेस को स्पीकर के फैसले का सहारा
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कर्नाटक में कांग्रेस के विधायकों के लगातार बागी रुख दिखाने के बाद भी पार्टी जद(एस) नेता और मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की सरकार बच जाने को लेकर आश्वस्त है। हालांकि कांग्रेस ने आपरेशन डैमेज कंट्रोल के लिए पूरा जोर लगा दिया है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैय्या और डीके शिवकुमार के कंधे पर पूरा जोर है। म.प्र. के मुख्यमंत्री कमलनाथ भी बंगलूरू जा रहे हैं। वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खडग़े, गुलाम नबी आजाद, बीके हरिप्रसाद और केसी वेणुगोपाल लगातार कर्नाटक के हर डेवलपमेंट पर निगाह लगाए हैं। वहीं कानूनी सलाह के लिए भी अभिषेक मनु सिंघवी, कपिल सिब्बल समेत अन्य लगातार सक्रिय हैं।
यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी कर्नाटक के डैमेज कंट्रोल को लेकर काफी संवेदनशील हैं और उन्हें अपनी टीम के नेताओं पर पूरा भरोसा है। बताते हैं इसके बाबत सोनिया गांधी लगातार फीडबैक भी ले रही हैं। सोनिया के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का सचिवालय भी कर्नाटक में हर हालात पर सीधे नजर रख रहा है।
विधायकों की अयोग्यता ही बचाएगी सरकार
कांग्रेस के रणनीतिकारों का कैलकुलेशन विधायकों की अयोग्यता पर टिका है। उनका मानना है कि कोई भी बागी विधायक अयोग्य नहीं होना चाहता। विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार विधि विशेषज्ञों से सलाह लेकर निर्णय ले रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष को संविधान की दसवीं सूची में असीमित शक्तियां प्राप्त हैं। उन्हें विधायकों के इस्तीफा देने पर यह जानने का हक है कि कहीं विधायक किसी दबाव, लालच या लोभ या सौदेबाजी में तो ऐसा नहीं कर रहे हैं। केआर रमेश इसी कानून की ढाल लेकर विधायकों का इस्तीफा स्वीकार करने से पहले उनकी सदस्यता पर निर्णय लेने के पक्ष में हैं। इसके लिए समय लेने, निर्णय न करने का उनके पास पर्याप्त कारण है। जबकि विधायक इस्तीफा मंजूर कराने के लिए हर कसरत कर रहे हैं।
दूसरे दल बदल कानून लागू हो जाने के बाद सबकुछ विधायकों के पक्ष में कम है। क्योंकि वह जिस पार्टी से चुनाव जीतकर आए हैं, उसने व्हिप जारी कर रखा है। ऐसे में चुनाव जीतकर आने वाले दल के दिशा-निर्देश के अनुसार विधायकों को चलना होगा। अन्यथा वह अयोग्य करार दिए जा सकते हैं। कांग्रेस पार्टी के नेताओं का अनुमान है कि विधायक अयोग्यता की स्थिति से बचना चाहते हैं। यही वजह है कि उन्होंने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
अखिरी दांव है मुख्यमंत्री का शक्ति परीक्षण
मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी का शक्ति परीक्षण की मांग आखिरी दांव है। कुमारस्वामी ने भ्रम की स्थिति दूर करने के लिए इसकी मंशा जताई है। विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश ने भी कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा शक्ति परीक्षण (सदन में बहुमत साबित करने) की मांग पर वह उन्हें इसका अवसर देंगे। मुख्यमंत्री की इस मांग का सिद्धारमैय्या ने समर्थन किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद का कहना है कि एक मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार अल्पमत में है या बहुमत में, इसका निर्णय तो विधानसभा में विश्वास मत से ही होने का नियम है। बीके हरिप्रसाद का कहना है कि व्हिप पहले से ही जारी है। विश्वासमत साबित करने की स्थिति आएगी तो कांग्रेस और जद(एस) के विधायकों को अयोग्यता से बचने के लिए व्हिप का पालन करना होगा।
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि विश्वासमत साबित करने की स्थिति आने तक बागी विधायकों में मौजूद भ्रम की स्थिति दूर आ जाएगी। उधर सिद्धारमैय्या और एचडी कुमारस्वामी लगातार दावा कर रहे हैं कि कुमारस्वामी ससरकार के पास विधानसभा में साबित करने के लिए पर्याप्त संख्याबल है।
कांग्रेस और भाजपा के लिए करो या मरो की स्थिति
एचडी कुमारस्वामी की सरकार बचाना कांग्रेस और भाजपा के लिए नाक का सवाल बन गया है। भाजपा के नेता चाहे जितना कहें कि यह कांग्रेस और जद(एस) का अंदरूनी मामला है और उनके विधायक छोड़कर जा रहे हैं, लेकिन इसका ठीकरा भाजपा के ही सिर पर फूट रहा है। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा का कुमारस्वामी सरकार गिराने का यह छठवां प्रयास माना जा रहा है। इसलिए पर्दे के पीछे से भाजपा के नेताओं ने सरकार को अपदस्थ करने के लिए पूरा जोर लगा दिया है। इसी तरह से कांग्रेस कर्नाटक सरकार के गिरने के बाद इसकी आंच राजस्थान, म.प्र. पर देख रही है। वैसे भी बागी विधायकों में 13 कांग्रेस के ही हैं। पार्टी राज्यसरकार का गठबंधन में साथ न दे पाने का आक्षेप नहीं लेना चाहती। इसलिए दिल्ली से लेकर बंगलूरू तक कांग्रेस के नेताओं ने पूरा जोर लगा दिया है।