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Kargil Diwas: हमारी कूटनीति से दुनिया हुई सम्मोहित, अब भारत से भिड़ने से पहले नतीजे के बारे में सोचता है दुश्मन

Sun, 26 Jul 2020 12:34 PM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अवधेश कुमार Updated Sun, 26 Jul 2020 12:34 PM IST
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Kargil War Vijay Diwas 2020: The World Becomes Fascinated By India Diplomacy
kargil vijay diwas - फोटो : अमर उजाला

1999 तक पश्चिमी देशों में भारत की ज्यादा पूछ नहीं थी। हमें कई देश सैन्य और कूटनीतिक तौर पर कमजोर समझते थे। परमाणु परीक्षण के बाद तो अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और कुछ हद तक रूस भी खिलाफ था। आर्थिक प्रतिबंध लगे। अर्थव्यवस्था कमजोर व विदेशी मुद्रा भंडार सीमित था। पूर्व विदेश सचिव और कूटनीतिज्ञ कंवल सिब्बल कहते हैं, तत्कालीन पाक सेनाध्यक्ष जनरल परवेज मुशर्रफ ने भारत की कमजोर हैसियत का फायदा उठाने की रणनीति बनाई। 

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तत्कालीन पीएम अटलबिहारी वाजपेयी के शांति प्रस्ताव को भारत की कमजोरी माना। इसके लिए सुनियोजित घुसपैठ कराकर हमारे इलाकों पर कब्जा जमा लिया। लेकिन उसने हमारी सेना की प्रतिबद्धता व कूटनीतिक क्षमता को हल्के में लेने की भूल कर दी, जिसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ा। सिब्बल के अनुसार, 21 साल में रणनीतिक और सामरिक रूप से बड़ा फर्क आया है। हमारी कमजोरियां पुरानी बात हो गई हैं। अब भारत से भिड़ना आसान नहीं है। 
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बातचीत के साथ सीमा पर दबाव बनाने की दुश्मन की रणनीति पुरानी पड़ गई है। आज पाक के प्रति नरम रहे अमेरिका से हमारे प्रगाढ़ संबंध हैं। सैन्य साझेदारियां बढ़ी हैं। फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और जापान से लॉजिस्टिक और सैन्य समझौतों में विस्तार हुआ है। यानी रक्षा और कूटनीति, दोनों में मजबूत रिश्ते बने हैं। इससे न सिर्फ पाक बल्कि चीन को भी साधने में मदद मिली है। अब भारत से भिड़ने से पहले दुश्मन नतीजे के बारे में 100 बार सोचता है।

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पाक ने चली थी मुजाहिदीन चाल  पर हुआ बुरा हाल...

Kargil War Vijay Diwas 2020: The World Becomes Fascinated By India Diplomacy

पाक ने चली थी मुजाहिदीन चाल  पर हुआ बुरा हाल

पाक के तत्कालीन जनरल परवेज मुशर्रफ का सोचना था कि पोकरण परीक्षण के कारण दुनिया भारत का साथ नहीं देगी। उसे अमेरिका से समर्थन की उम्मीद भी थी। कारगिल संघर्ष को मुजाहिदीन की घुसपैठ भी बताया, लेकिन भारत ने साबित कर दिया कि पाकिस्तान ने फौज भेजी है और हमने बचाव में ऑपरेशन शुरू किया है। इस पर दुनिया पाकिस्तान के खिलाफ हो गई।

Kargil War Vijay Diwas 2020: The World Becomes Fascinated By India Diplomacy

प्रतिबंध के बावजूद साथ आई दुनिया

1999 में भारत दुनिया को यह बताने में कामयाब रहा कि परमाणु हथियार संपन्न होने के बावजूद वह काफी जिम्मेदार देश है। किसी की जमीन पर कब्जा करने की नीयत नहीं है, लेकिन कोई आक्रमण करेगा तो उसे उसी भाषा में मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उसकी आतंकवादी और सैन्य हरकतों को दुनिया के सामने उजागर करने की रणनीति में हमें काफी सफलता मिली। अधूरी सैन्य तैयारियों के बावजूद हमने पाकिस्तान की खोखली सैन्य क्षमता की पोल खोल दी। तत्कालीन पाक पीएम नवाज शरीफ को अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से साथ नहीं मिला। चीन से भी निराशा हाथ लगी। 

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