सात महीने बाद मिलेगा इंसाफ: महिला लोको पायलट को गलत तरीके से छूता था अधिकारी, रेलवे की जांच पर उठ रहे सवाल
महिला लोको पायलट ने अधिकारी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। इसके साथ ही रेलवे की जांच पर भी कई सवाल उठाए हैं। यह घटना सात महीने पहले हुई थी।
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दक्षिणी रेलवे के सलेम डिवीजन में महिला सहायक लोको पायलट ने उत्पीड़न का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य लोको निरीक्षक पर कार्रवाई की मांग की। यह घटना पिछले साल 13 सितंबर को एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम की परीक्षा के दौरान घटी थी। महिला की प्रारंभिक शिकायत के आधार पर आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) ने आरोपी अधिकारी के केवल तबादले और चेतावनी जारी करने की सिफारिश की थी।
आईसीसी ने महिला का बयान दर्ज करते हुए कहा, 'मुख्य लोको इंस्पेक्टर टी सेल्वराज ने कथित तौर पर उसके सिर, कंधे, जांघ, कूल्हे और होंठ को छुआ।' हालांकि, महिला ने सलेम मंडल रेलवे प्रबंधक के समक्ष अपनी अपील में कहा, 'यह घटना मात्र छूना या शारीरिक संपर्क नहीं थी। बल्कि, यह बीएनएस की धारा 74 और 75 के तहत परिभाषित गंभीर उत्पीड़न और मेरी मर्यादा भंग करने के इरादे से किया गया हमला था।'
भूल जाने का अनुरोध किया
अपनी प्रारंभिक शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि ओरिएंटेशन कोर्स की परीक्षा के दौरान उसे अकेला पाकर सेल्वराज ने कथित तौर पर उसका यौन उत्पीड़न किया। इसी आधार पर सलेम के वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता ने आईसीसी (अदालत आयोग) की नियुक्ति की। पीड़िता ने समिति को बताया कि परीक्षा पूरी करने के बाद जब वह घर लौटी, तो सेल्वराज ने उसे फोन किया और अपने कार्यों के लिए माफी मांगते हुए कहा कि ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी और उससे घटना को भूल जाने का अनुरोध किया।
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महिला द्वारा प्रस्तुत कॉल रिकॉर्डिंग के माध्यम से इन दावों की पुष्टि करते हुए, समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सेल्वराज ने सभी आरोपों को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया। रिपोर्ट में कहा गया है, आईसीसी का मानना है कि टी सेल्वराज, सीएलआई/ईडी के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध हो गए हैं। आईसीसी ने सेल्वराज को सलेम डिवीजन के इरोड डिपो से स्थानांतरित करने और भविष्य में इसी तरह के दुर्व्यवहार या शिकायतों की पुनरावृत्ति होने पर कड़ी कार्रवाई की सख्त चेतावनी जारी करने की सिफारिश की।
जांच पर सवाल उठाया
समिति ने कार्यस्थल पर सुरक्षा, पारदर्शिता और निगरानी को बढ़ाने के लिए कार्यालय परिसर के भीतर उपयुक्त स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की भी सिफारिश की। अपनी अपील में, महिला ने समिति की सिफारिशों पर गंभीर आपत्तियां उठाते हुए कहा कि अपराध साबित होने के बाद ही अपराधी को चेतावनी देने वाली सिफारिशें काफी कष्टदायक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये कृत्य आपराधिक प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन हैं। आगे कहा, 'यह उनकी सुनियोजित चाल थी, उन्हें अच्छी तरह पता था कि इरोड स्थित क्रू बुकिंग कार्यालय की पहली मंजिल पर स्थित क्रू कंट्रोलर के कार्यालय में कोई नहीं होगा। उन्होंने मुझे मेरे ओरिएंटेशन सर्टिफिकेट को नवीनीकृत कराने के लिए कार्यालय में बुलाया था।' यह भी पढ़ें- Politics: 'महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने में सरकार पूरी तरह विफल', गाजीपुर की घटना पर राहुल ने साधा निशाना
गरिमा पर सीधा हमला
महिला ने यह भी बताया कि उसने भागने के लिए काफी संघर्ष किया और किसी तरह कार्यालय से बाहर निकलने में कामयाब रही। आईसीसी पर इस मामले को हल्के में लेने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें जिस उत्पीड़न का सामना करना पड़ा वह उनकी व्यक्तिगत गरिमा पर सीधा हमला था। उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि क्रू कंट्रोलर द्वारा जांच रिपोर्ट की एक प्रति उन्हें सार्वजनिक दस्तावेज की तरह खुलेआम सौंप दी गई, जिसमें गोपनीयता का ध्यान नहीं रखा गया था। उन्होंने आगे अनुरोध किया कि संबंधित अधिकारियों को ऐसे मामलों में गोपनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।