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जस्टिस कुरियन बोले- खतरे में है सुप्रीम कोर्ट का वजूद, सत्ता का हो रहा है दुरुपयोग

Fri, 13 Apr 2018 01:50 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Fri, 13 Apr 2018 01:50 AM IST
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Justice Kurien said the Supreme Court is in Non exist danger
सुप्रीम कोर्ट
कोलेजियम ने फरवरी, 2018 को उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मल्होत्रा की सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर नियुक्ति की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार ने कोलेजियम की सिफारिश पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया है। इसका जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कुरियन जोसेफ ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को लिखा है कि ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का वजूद खतरे में है। इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा। 
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जस्टिस कुरियन ने कहा, ‘शीर्ष अदालत के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी को तीन महीने बाद भी सिफारिश पर सरकार की ओर से की गई कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं है।’ उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से इस मामले पर सात वरिष्ठ जजों की पीठ बनाकर स्वत: संज्ञान लेते हुई सुनवाई की मांग की। अगर जस्टिस कुरियन की मांग मानी जाती है तो सात जजों की पीठ सरकार को कोलेजियम की सिफारिश पर फैसला लेने का आदेश दे सकती है। पीठ निश्चित समयसीमा में जजों की नियुक्ति करने को कह सकती है। ऐसा नहीं होने पर अदालत की अवमानना का मामला भी चला सकती है।
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जस्टिस कुरियन नवंबर, 2018 में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वह दोनों जजों की नियुक्ति की सिफारिश करने वाले कोलेजियम के सदस्य भी हैं। मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को भेजी इस चिट्ठी में जस्टिस कुरियन ने लिखा है, ‘कोलेजियम की ओर से सिफारिश भेजने के बाद जल्द से जल्द कार्रवाई करना सरकार की जिम्मेदारी है। प्रशासनिक कानून के तहत सिफारिश पर कार्रवाई नहीं करना सत्ता का दुरुपयोग माना जाता है।’ 
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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ दिया था फैसला

उत्तराखंड हाई कोर्ट के जस्टिस केएम जोसेफ ने अप्रैल, 2016 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के खिलाफ फैसला दिया था। माना जा रहा है कि केंद्र इसी लिए उनकी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति को टाल रहा है। सूत्रों के मुताबिक कानून मंत्रालय ने इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति पर कानूनी राय मांगी है, लेकिन जस्टिस केएम जोसेफ के मामले को लटका दिया गया है। सरकार कोलेजियम की एक या दोनों सिफारिशों को लौटा सकती है, लेकिन दोबारा वही नाम भेजने पर नियुक्ति करनी होती है। इस समय कोलेजियम में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा सहित जस्टिस जे. चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी. लोकुर और कुरियन जोसेफ शामिल हैं।


‘भौंकने वाले कुत्ते को भी काटना पड़ता है’

इससे पहले सोमवार को केरल के एक मीडिया संस्थान में जस्टिस कुरियन ने लोकतंत्र के दो चौकीदारों ‘मीडिया और न्यायपालिका’ का जिक्र करते हुए कहा था, ‘कुत्ता भौंक कर अपने मालिक को खतरे से आगाह करता है। अगर इससे मालिक नहीं चेतता और खतरा बरकरार रहता है तो उसके पास काटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। ऐसी स्थिति में यह कहावत गलत साबित होगी कि भौंकने वाले कुत्ते काटा नहीं करते।’
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