{"_id":"5c25dfdcbdec22571b3c2743","slug":"journey-of-former-pm-manmohan-singh-media-advisor-sanjay-baru","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर : जानिए कौन हैं संजय बारू और क्या थे उनकी किताब के खुलासे","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर : जानिए कौन हैं संजय बारू और क्या थे उनकी किताब के खुलासे
Fri, 28 Dec 2018 02:13 PM IST
Shani Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shani Mishra
Updated Fri, 28 Dec 2018 02:13 PM IST
विज्ञापन
Akshaye Kumar - Sanjay Baru
- फोटो : self
द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर फिल्म इन दिनों हर तरफ चर्चा का विषय बनी हुई है। यह फिल्म संजय बारू की किताब 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टरः द मेकिंग एंड अनमेकिंग ऑफ मनमोहन सिंह' पर आधारित बताई जा रही है। ऐसे में संजय बारू के बारे में जानना भी जरुरी हो जाता है।
विज्ञापन
संजय बारू मई 2004 से अगस्त 2008 तक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार और मुख्य प्रवक्ता रह चुके हैं। अप्रैल 2018 में अपने इस्तीफे से पहले वह फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे थे। वह हैदराबाद विश्वविद्यालय, इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनैशनल इकनॉमिक रिलेशंस, दिल्ली और ली कुआन येव स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी, सिंगापुर में अर्थशास्त्र के प्रफेसर भी रह चुके हैं। पत्रकार के तौर पर वह टाइम्स ऑफ इंडिया और इकोनॉमिक टाइम्स के एसोसिएट एडिटर और बिजनेस स्टैंडर्ड के चीफ एडिटर रह चुके हैं। मनमोहन सिंह के वित्त सचिव रहने के दौरान संजय बारू के पिता बी. पी.आर विट्ठल योजना और वित्त सचिव थे।
विज्ञापन
2014 में उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुभवों को एक किताब का रूप दिया था। उनकी इस किताब ने राजनीति में भूचाल ला दिया था। किताब के जारी होने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दफ्तर ने इस किताब की आलोचना करते हुए इसे अपने पद का दुरुपयोग करके आर्थिक फायदा उठाने वाला कदम बताया था।
विज्ञापन
किताब से आया था राजनीतिक भूचाल
अपनी किताब द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टरः द मेकिंग एंड अनमेकिंग ऑफ मनमोहन सिंह में संजय बारू ने दावा किया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री सिंह ने उनसे कहा कि किसी सरकार में सत्ता के दो केंद्र नहीं हो सकते। इससे गड़बड़ी फैलती है। मुझे मानना पड़ेगा कि पार्टी अध्यक्ष सत्ता का केंद्र हैं, सरकार पार्टी के प्रति जवाबदेह है।
संजय बारू ने अपनी किताब में लिखा था कि मनमोहन सिंह की रीढ़विहीनता समझ के परे थी। अगर वो अपने ही दफ्तर में अपनी पसंद के अधिकारियों की नियुक्ति करवा पाने में अक्षम थे तो इसका मतलब ये था कि उन्होंने बहुत जल्दी ही दूसरों को जगह दे दी थी।
Trending Videos
प्रधानमंत्री मनमोहन को ब्रीफ नहीं करते थे मंत्री
manmohan singh
- फोटो : PTI
सोनिया गांधी की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद सुपर कैबिनेट की तरह काम करती थी और सभी सामाजिक सुधारों के कार्यक्रमों की पहल करने का श्रेय उसे ही दिया जाता था। मनमोहन सिंह के आलम यह था कि अमेरिका जैसे देश की यात्रा कर वापस आने के बाद विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मनमोहन सिंह को ब्रीफ करने की जरूरत नहीं समझी थी।
सोनिया गांधी का जून 2004 मे सत्ता त्याग देना अंतरआत्मा की आवाज सुनने का नतीजा नहीं था बल्कि एक राजनीतिक कदम था।
सोनिया गांधी का जून 2004 मे सत्ता त्याग देना अंतरआत्मा की आवाज सुनने का नतीजा नहीं था बल्कि एक राजनीतिक कदम था।