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रोजगार के मामले में 7 सालों में सबसे खराब स्थिति, राष्ट्रपति ने जताई चिंता
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 17 Nov 2016 07:07 PM IST
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
- फोटो : ANI
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि जिस तरह से देश में नौकरियों के विपरीत माहौल बन रह हैं वह घातक हैं। शैक्षणिक संस्थाओं के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नौकरियों के सृजन की संख्या पिछले सात साल में सबसे निचले स्तर पर है। जबकि इस पर प्रमुखता से ध्यान देना चाहिए।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, शैक्षणिक संस्थाओं में छात्रों की अंशाति का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने छात्रों के लिए सौहार्द्रपूर्ण और शांति भरा वातारण बनाए रखने पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से कहा कि इन शैक्षिक नेताओं को हर संभव सुविधा मुहैया कराई जाए।
उन्होंने कहा कि देश में पर्याप्ट टैलेंट है। नौजवानों की बड़ी संख्या के साथ हम उनका प्रयोग केवल उत्पादकता बढ़ाने में कर रहे हैं। यदि देश में पर्याप्त मात्रा में नौकरियां होंगी तो देश में कंटेट, उनका शोधन और पूर्णता पर ध्यान दे सकते हैं।
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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, शैक्षणिक संस्थाओं में छात्रों की अंशाति का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने छात्रों के लिए सौहार्द्रपूर्ण और शांति भरा वातारण बनाए रखने पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से कहा कि इन शैक्षिक नेताओं को हर संभव सुविधा मुहैया कराई जाए।
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उन्होंने कहा कि देश में पर्याप्ट टैलेंट है। नौजवानों की बड़ी संख्या के साथ हम उनका प्रयोग केवल उत्पादकता बढ़ाने में कर रहे हैं। यदि देश में पर्याप्त मात्रा में नौकरियां होंगी तो देश में कंटेट, उनका शोधन और पूर्णता पर ध्यान दे सकते हैं।
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बढ़ाने होंगे नौकरी के अवसर
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उन्होंने कहा कि युवाओं में बेचैनी और व्याकुलता अशांति और उथल-पुथल प्रकट करता है। हमें इस तरह की स्थिति आने से रोकना होगा। इसे देखते हुए नौकरी के अवसर को बढ़ाना होगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि साल 2015 में नौकरी के अवसर साल 2015 में 1.35 लाख थी। यह बीते सात साल में सबसे कम है। यह एक अच्छा संकेत नहीं है।