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जय शाह मानहानि मामले में न्यूज पोर्टल ‘द वायर’ की पत्रकार और संपादक को नोटिस
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Wed, 25 Oct 2017 07:30 AM IST
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह द्वारा किए गए मानहानि मुकदमे में अहमदाबाद की एक अदालत ने न्यूज पोर्टल ‘द वॉयर’ की पत्रकार और संपादकों को समन जारी किया है। पोर्टल ने एक रिपोर्ट में कहा था कि 2014 में भाजपा के केंद्र की सत्ता में आने के जय शाह की कंपनी का टर्नओवर तेजी से कई गुना बढ़ गया।
अतिरिक्त चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एसके गढवी ने पत्रकार रोहिणी सिंह, पांच संपादकों और ‘द वॉयर’ का प्रकाशन करने वाली गैर-लाभकारी कंपनी को समन जारी किया है।
इसका जवाब 13 नवंबर तक देना है। अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया कि सभी सात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 500 के तहत मानहानि का मामला बनता है। इसमें साधारण कारावास से लेकर दो साल के कारावास अथवा जुर्माना या दोनों हो सकता है।
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अदालत ने जय अमित शाह समेत तीन गवाहों की गवाही और उनके वकील की ओर पेश किए गए दस्तावेजी साक्ष्य पर विचार करने के बाद ये आदेश जारी किया। जय शाह के वकील राजू ने कोर्ट में कहा, ‘यह लेख सद्भावना के साथ प्रकाशित नहीं किया गया।
इसका मकसद उनके मुवक्किल की छवि को धूमिल करना था।’ अदालत ने समन जारी करने से पहले सीआरपीसी के सेक्शन 202 के तहत शिकायत को लेकर यह जांच कराई थी कि क्या इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही आगे बढ़ाने का पर्याप्त आधार है।
अपनी शिकायत में शाह ने अदालत से गुहार लगाई है कि ‘एक लेख प्रकाशित कर उन्हें बदनाम और प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए उत्तरदायी लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए।’
यह मामला लेख लिखने वाली पत्रकार रोहिणी सिंह, न्यूज पोर्टल के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन, सिद्धार्थ भाटिया, एमके वेणु, प्रबंध संपादक मोबिना गुप्ता, लोक संपादक पामेला फिलीपोस और ‘द वॉयर’ का प्रकाशन करने वाली गैर-लाभकारी कंपनी फाउंडेशन फॉर इंडीपेंडेंट जर्नलिज्म के खिलाफ दर्ज कराया गया है।
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अतिरिक्त चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एसके गढवी ने पत्रकार रोहिणी सिंह, पांच संपादकों और ‘द वॉयर’ का प्रकाशन करने वाली गैर-लाभकारी कंपनी को समन जारी किया है।
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इसका जवाब 13 नवंबर तक देना है। अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया कि सभी सात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 500 के तहत मानहानि का मामला बनता है। इसमें साधारण कारावास से लेकर दो साल के कारावास अथवा जुर्माना या दोनों हो सकता है।
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अदालत ने जय अमित शाह समेत तीन गवाहों की गवाही और उनके वकील की ओर पेश किए गए दस्तावेजी साक्ष्य पर विचार करने के बाद ये आदेश जारी किया। जय शाह के वकील राजू ने कोर्ट में कहा, ‘यह लेख सद्भावना के साथ प्रकाशित नहीं किया गया।
इसका मकसद उनके मुवक्किल की छवि को धूमिल करना था।’ अदालत ने समन जारी करने से पहले सीआरपीसी के सेक्शन 202 के तहत शिकायत को लेकर यह जांच कराई थी कि क्या इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही आगे बढ़ाने का पर्याप्त आधार है।
अपनी शिकायत में शाह ने अदालत से गुहार लगाई है कि ‘एक लेख प्रकाशित कर उन्हें बदनाम और प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए उत्तरदायी लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए।’
यह मामला लेख लिखने वाली पत्रकार रोहिणी सिंह, न्यूज पोर्टल के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन, सिद्धार्थ भाटिया, एमके वेणु, प्रबंध संपादक मोबिना गुप्ता, लोक संपादक पामेला फिलीपोस और ‘द वॉयर’ का प्रकाशन करने वाली गैर-लाभकारी कंपनी फाउंडेशन फॉर इंडीपेंडेंट जर्नलिज्म के खिलाफ दर्ज कराया गया है।