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महाराष्ट्र: 'मराठा आरक्षण पर CM एकनाथ शिंदे कर रहे देर'; मनोज जरांगे ने भूख हड़ताल के चौथे दिन लगाए गंभीर आरोप
Tue, 23 Jul 2024 06:08 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 23 Jul 2024 06:08 PM IST
सार
Maharashtra: मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए कहा कि वे ओबीसी श्रेणी के तहत मराठा समुदाय को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण देने की प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं।
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मराठा आरक्षण पर CM एकनाथ शिंदे कर रहे देर- जरांगे
- फोटो : ANI
विस्तार
महाराष्ट्र के जालना जिले में आरक्षण के मुद्दे पर मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे के अनिश्चितकालीन अनशन का आज चौथा दिन है। वहीं इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ओबीसी श्रेणी के तहत मराठा समुदाय को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण देने की प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं।
20 जुलाई से फिर मनोज जरांगे का अनशन शुरू
बता दें कि मनोज जरांगे ने फिर से जालना जिले के अंतरवाली सारती गांव में 20 जुलाई से अपनी मांगों को लेकर अपना अनशन शुरू किया है। जिसमें मसौदा अधिसूचना को लागू करना शामिल है, जो कुनबी को मराठा समुदाय के सदस्यों के 'ऋषि सोयारे' (रक्त संबंधी) के रूप में मान्यता देता है और बाद में ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण प्रदान करता है।
'सीएम शिंदे मराठा समुदाय को आरक्षण दे सकते हैं'
मनोज जरांगे के अनशन के चौथे दिन, सरकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. स्वप्निल राठौड़ ने उनके स्वास्थ्य की जांच की और पाया कि पानी न पीने के कारण उन्हें कुछ इलाज की आवश्यकता है, लेकिन मराठा कार्यकर्ता ने कोई भी इलाज कराने से इनकार कर दिया। वहीं अनशन स्थल पर मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, जरांगे ने कहा, मुख्यमंत्री शिंदे मराठा समुदाय को आरक्षण दे सकते हैं, लेकिन वे देरी कर रहे हैं। केवल शिंदे साहब ही आरक्षण दे सकते हैं, लेकिन वे इसमें देरी क्यों कर रहे हैं?
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मनोज जरांगे ने सरकार को दिया प्रस्ताव
इस दौरान मनोज जरांगे ने कहा कि सरकार को उनकी मांगें पूरी होने तक मराठों को तीन आरक्षण विकल्प प्रदान करने चाहिए - आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) के तहत - 10 प्रतिशत - और कुनबी के रूप में ओबीसी कोटा (27 प्रतिशत)।
इससे पहले कई बार अनशन कर चुके हैं जरांगे
बता दें कि फरवरी में महाराष्ट्र विधानसभा ने एक विधेयक पारित किया था, जिसमें राज्य की आबादी में 30 प्रतिशत से अधिक मराठों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में एक अलग श्रेणी के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान था। हालांकि, जरांगे के नेतृत्व में मराठा समुदाय के सदस्य प्रभावशाली जाति को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने पर जोर दे रहे हैं। पिछले साल अगस्त से, मनोज जरांगे ने मराठा कोटा के समर्थन में कई बार भूख हड़ताल की है। इस कड़ी में 13 जून को, उन्होंने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल स्थगित कर दी थी और सरकार को उनकी मांगों को स्वीकार करने के लिए एक महीने का समय दिया था।
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20 जुलाई से फिर मनोज जरांगे का अनशन शुरू
बता दें कि मनोज जरांगे ने फिर से जालना जिले के अंतरवाली सारती गांव में 20 जुलाई से अपनी मांगों को लेकर अपना अनशन शुरू किया है। जिसमें मसौदा अधिसूचना को लागू करना शामिल है, जो कुनबी को मराठा समुदाय के सदस्यों के 'ऋषि सोयारे' (रक्त संबंधी) के रूप में मान्यता देता है और बाद में ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण प्रदान करता है।
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'सीएम शिंदे मराठा समुदाय को आरक्षण दे सकते हैं'
मनोज जरांगे के अनशन के चौथे दिन, सरकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. स्वप्निल राठौड़ ने उनके स्वास्थ्य की जांच की और पाया कि पानी न पीने के कारण उन्हें कुछ इलाज की आवश्यकता है, लेकिन मराठा कार्यकर्ता ने कोई भी इलाज कराने से इनकार कर दिया। वहीं अनशन स्थल पर मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, जरांगे ने कहा, मुख्यमंत्री शिंदे मराठा समुदाय को आरक्षण दे सकते हैं, लेकिन वे देरी कर रहे हैं। केवल शिंदे साहब ही आरक्षण दे सकते हैं, लेकिन वे इसमें देरी क्यों कर रहे हैं?
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मनोज जरांगे ने सरकार को दिया प्रस्ताव
इस दौरान मनोज जरांगे ने कहा कि सरकार को उनकी मांगें पूरी होने तक मराठों को तीन आरक्षण विकल्प प्रदान करने चाहिए - आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) के तहत - 10 प्रतिशत - और कुनबी के रूप में ओबीसी कोटा (27 प्रतिशत)।
इससे पहले कई बार अनशन कर चुके हैं जरांगे
बता दें कि फरवरी में महाराष्ट्र विधानसभा ने एक विधेयक पारित किया था, जिसमें राज्य की आबादी में 30 प्रतिशत से अधिक मराठों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में एक अलग श्रेणी के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान था। हालांकि, जरांगे के नेतृत्व में मराठा समुदाय के सदस्य प्रभावशाली जाति को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने पर जोर दे रहे हैं। पिछले साल अगस्त से, मनोज जरांगे ने मराठा कोटा के समर्थन में कई बार भूख हड़ताल की है। इस कड़ी में 13 जून को, उन्होंने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल स्थगित कर दी थी और सरकार को उनकी मांगों को स्वीकार करने के लिए एक महीने का समय दिया था।