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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu-Kashmir Target Killing: Two high-level meetings held in North Block on Friday regarding target killing, exodus of Kashmiri Pandits and Amarnath Yatra in Jammu and Kashmir

Jammu-Kashmir Target Killing: केंद्र के गले की फांस बने टारगेट किलिंग के मामले, घाटी जाएंगे अतिरिक्त सुरक्षा बल

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 03 Jun 2022 08:05 PM IST
सार

सूत्रों का कहना है कि टारगेट किलिंग करने वाले आतंकियों को ढूंढने के लिए खास ऑपरेशन शुरू किया जाएगा। इसके लिए घाटी में अतिरिक्त सुरक्षा बल उतारे जाएंगे। कश्मीरी पंडितों, हिंदुओं या मुस्लिमों पर पिस्टल चलाने वालों का सफाया होगा...

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Jammu-Kashmir Target Killing: Two high-level meetings held in North Block on Friday regarding target killing, exodus of Kashmiri Pandits and Amarnath Yatra in Jammu and Kashmir
कश्मीर में हो रही हत्याओं पर गृह मंत्रालय, भारत सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद बाहर आते एनएसए अजीत डोभाल और रॉ प्रमुख सामंत गोयल - फोटो : Agency

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में हो रही टारगेट किलिंग की फांस केंद्र सरकार के गले में फंसती जा रही है। नॉर्थ ब्लॉक में महज 24 घंटे में तीन अहम बैठक हो चुकी हैं। इसी अवधि में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल दो बार मिल चुके हैं। जम्मू-कश्मीर में हो रही टारगेट किलिंग, कश्मीरी पंडितों का पलायन व अमरनाथ यात्रा को लेकर शुक्रवार को नॉर्थ ब्लॉक में दो उच्चस्तरीय बैठक हुई हैं। दूसरी तरफ विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार व भाजपा को घेरने का प्रयास किया है। सूत्रों का कहना है कि टारगेट किलिंग करने वाले आतंकियों को ढूंढने के लिए खास ऑपरेशन शुरू किया जाएगा। इसके लिए घाटी में अतिरिक्त सुरक्षा बल उतारे जाएंगे। कश्मीरी पंडितों, हिंदुओं या मुस्लिमों पर पिस्टल चलाने वालों का सफाया होगा।

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डेढ़ साल में 55 नागरिकों की हत्या

नॉर्थ ब्लॉक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, आर्मी चीफ मनोज पांडे, गृह सचिव अजय भल्ला, रॉ चीफ सामंत गोयल, आईबी चीफ अरविंद कुमार, सीआरपीएफ/एनआईए डीजी कुलदीप सिंह व जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजी दिलबाग सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अफसरों ने भाग लिया। इस साल कश्मीर में टारगेट किलिंग की 20 घटना हुई हैं। तीन दिन में तीन बेगुनाह लोगों को मार दिया गया। जनवरी 2021 से लेकर अब तक जम्मू कश्मीर में 55 लोगों की हत्या हो चुकी है। जम्मू-कश्मीर में इस समय लगभग डेढ़ सौ स्थानीय एवं विदेशी आतंकवादी सक्रिय हैं। पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' व 'जैश-ए-मोहम्मद' के लिए अब घाटी में आतंकियों की नई भर्ती मुश्किल हो रही है। यही वजह है कि इन आतंकी संगठनों ने अब घाटी के स्थानीय युवाओं को भाड़े पर रखने की मुहिम शुरू की है। इसके लिए उन्हें एक तय राशि दी जाती है। इनमें अंडर ग्राउंड वर्कर, ओवर ग्राउंड वर्कर और हाइब्रिड आतंकी शामिल हैं। टारगेट किलिंग की वारदातों को इन्हीं लोगों के द्वारा अंजाम दिया जा रहा है।

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कश्मीरी पंडितों को घाटी से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा

नॉर्थ ब्लॉक में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि कश्मीरी पंडितों को पलायन करने से रोका जाएगा। अगर यह पलायन जारी रहता है, तो इससे केंद्र सरकार की छवि पर विपरित असर पड़ेगा। अनुच्छेद 370 को लेकर अभी तक जहरीली बयानबाजी कर रहे घाटी के राजनीतिक दल, समुदाय विशेष के नेता और पाकिस्तान, को अब कश्मीरी पंडितों के पलायन पर सरकार कोई मौका नहीं देना चाहती। कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा, पिस्टल किलिंग करने वाले आतंकियों का खात्मा और अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए घाटी में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। सूत्रों ने बताया, घाटी में जिस तरह से टारगेट किलिंग हो रही हैं, ऐसे में अमरनाथ यात्रा भी जोखिम में पड़ सकती है। दो साल के अंतराल पर हो रही इस यात्रा को लेकर लोगों में भारी जोश है। अभी तक करीब ढाई लाख लोगों ने यात्रा के लिए पंजीकरण कराया है। ऐसी संभावना है कि 25 जून तक यात्रियों का आंकड़ा चार लाख के पार जा सकता है। कश्मीरी पंडितों को घाटी से बाहर जाने पर रोका जाएगा। उन्हें पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इसके लिए जम्मू कश्मीर प्रशासन विशेष गाइडलाइंस जारी करेगा।

हाइब्रिड आतंकियों पर कसेगा शिकंजा

जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा कई ऐसी टीमों का गठन किया जा रहा है, जो हाइब्रिड आतंकियों का पता लगाएंगी। पूर्व में पत्थरबाज रहे युवाओं का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। आईबी एवं जम्मू कश्मीर इंटेलिजेंस विंग के सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा रही है। वजह, अभी जो टारगेट किलिंग हो रही हैं, उनमें जनता की तरफ से पुलिस को सहयोग नहीं मिल रहा। हाइब्रिड आतंकियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं होता। वे दूसरे लोगों की तरह रहते हैं। उन्हें कोई ट्रेनिंग भी नहीं दी गई। केवल पिस्टल थमा दी जाती है। गुमराह हो चुके युवा थोड़े से पैसों के लालच में पिस्टल उठा लेते हैं। गुरुवार को बैंक मैनेजर की हत्या के लिए हाइब्रिड आतंकी लोगों के बीच से बैंक में आता है और गोली मारकर आराम से वापस चला जाता है। ऐसे आतंकियों का पता लगाने के लिए कश्मीर के हर जिले में टीमें गठित की जा रही हैं। सूत्रों ने बताया, प्लान की जानकारी देना ठीक नहीं है। इतना जरूर है कि जो विशेष टीम बनाई गई हैं, वे पिस्टल उठाने वाले स्थानीय आतंकियों का खात्मा कर देंगी। घाटी के संदिग्धों का डाटा जुटाने के लिए एनटीआरओ की मदद ली जाएगी।

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