कोरोना संकट के बीच बदली जम्मू-कश्मीर निवासियों की परिभाषा, अब ऐसे लोग कहलाएंगे 'कश्मीरी'
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) व 35ए हटने के लगभग आठ महीने बाद क्रेंद सरकार ने यहां के लोगों के लिए नया डोमिसाइल (निवास) कानून (Domicile Rules In Jammu and Kashmir) लागू कर दिया है। सरकार ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के 138 कानूनों में संशोधन की घोषणा करते हुए एक गजट अधिसूचना जारी की। इसके तहत राज्य/यूटी के निवासी होने की परिभाषा तय की गई है। आइए जानते हैं क्या कहता है नया कानून, अब कौन से लोग कहलाएंगे कश्मीरी।
- नए कानून के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में 15 साल तक रहने वाला कोई भी व्यक्ति अब यहां का निवासी माना जाएगा।
- कश्मीर में सात साल तक पढ़ाई करने वाला और 10वीं-12वीं की परीक्षा यहां के स्थानीय संस्थान से देने वाला व्यक्ति भी कश्मीर का निवासी माना जाएगा।
- जिन केंद्र सरकार के अधिकारियों ने घाटी में दस वर्षों की कुल अवधि के लिए यहां अपनी सेवाएं दी हैं उनके बच्चों को भी यहां का स्थायी निवासी माना जाएगा।
- नए कानून के मुताबिक कोई भी व्यक्ति ग्रुप-4 तक (25,500 रुपये से अधिक के वेतनमान) वाले पद पर नियुक्ति के लिए तब तक पात्र नहीं होगा जब तक कि वह जम्मू-कश्मीर का निवासी न हो। ग्रुप-4 पुलिस में कांस्टेबल के पद के बराबर है। यानी नए संशाेधन में ग्रुप-4 तक सरकारी नाैकरियाें काे यहां निवासियाें के लिए ही आरक्षित किया गया है।
- नए नियम में उन सभी प्रवासियों को भी शामिल किया गया है जो इस पूर्ववर्ती राज्य के राहत व पुनर्वास आयुक्त (प्रवासी) द्वारा रजिस्टर किए जा चुके हैं।
- नए नियम प्रवासियों को ग्रुप-4 की नौकरियों के लिए आवेदन करने की अनुमति देते हैं। इससे उन कश्मीरी हिंदुओं को बड़े पैमाने पर लाभ होगा जो वहां से पलायन करने के लिए मजबूर थे, यह नियम मुस्लिमों और सिख प्रवासियों पर भी लागू होता है।
- नए कानून के मुताबिक राज्य के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों को अब सरकारी खर्चे पर आवास, टेलीफोन, बिजली, पेट्रोल, वाहन चालक और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी। राज्य के ये चार पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और गुलाम नबी आजाद हैं।
- धारा 370 को खत्म किए जाने से पहले केवल पूर्ववर्ती राज्य के स्थायी निवासी माने जाने वाले लोग ही राज्य सरकार में नौकरी पा सकते थे।
- लोग अपने इलाके के तहसीलदार से मूल निवासी सर्टिफिकेट बनवा सकते हैं।
इससे पहले अनुच्छेद 35A के तहत जम्मू-कश्मीर सरकार यहां के स्थायी निवासी की परिभाषा तय करती थी। इसका मतलब था कि राज्य सरकार को ये अधिकार था कि वो यहां रह रहे नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में किस तरह की सहूलियतें दे अथवा नहीं दे। बता दें 1954 में घोषित अनुच्छेद 35ए को भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत बनाए गए राष्ट्रपति के आदेश द्वारा भारत के संविधान में शामिल किया गया था।
वहीं दूसरी ओर जम्मू और कश्मीर में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। घाटी में अब तक कोरोना वायरस से संक्रमित लोगो की संख्या 62 है। घाटी में अधिकांश सड़कों को बंद कर दिया गया है और लोगों की आवाजाही को रोकने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा कई स्थानों पर बैरियर लगाए गए हैं।