जम्मू-कश्मीर: आतंकी नेटवर्क तोड़ने के लिए खुफिया महकमे में शामिल होंगे 77 नए अधिकारी
आईबी की जम्मू इकाई में 31, लेह में 14 और श्रीनगर में 32 'एसए' तैनात किए जाएंगे। जम्मू कश्मीर प्रशासन में कथित तौर पर कई लोग संदेह के घेरे में हैं, इंटेलिजेंस एजेंसियों द्वारा समय-समय पर ऐसे इनपुट दिए जाते रहे हैं। यही ओवर ग्राउंड वर्कर होते हैं, जिन पर आतंकियों की मदद करने का आरोप है। इन्हें सीधे तौर पर पकड़ना मुश्किल होता है...
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जम्मू-कश्मीर में मौजूद सेंट्रल इंटेलिजेंस टीम (आईबी) को मजबूती प्रदान की जा रही है। इंटेलिजेंस ब्यूरो को 77 नए सिक्योरिटी असिस्टेंट मिलने जा रहे हैं। इनकी चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। खासतौर पर, यह टीम आतंकियों के अंडर ग्राउंड और ओवर ग्राउंड वर्करों का पता लगाने में मदद करेगी। इसके अलावा, घाटी में संदेह के दायरे में आए सरकारी कर्मियों पर भी नजर रखी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, कई सरकारी महकमों में भी आतंकियों की मदद करने वाले ओवर ग्राउंड वर्कर मौजूद हैं। ये जनता के बीच इस तरह से घुले मिले होते हैं कि इनकी पहचान करना बहुत मुश्किल होता है। इनका पुलिस रिकॉर्ड भी नहीं होता। टारगेट किलिंग के लिए आतंकियों को संचार से लेकर ट्रांसपोर्ट तक की सुविधा यही ग्राउंड वर्कर मुहैया कराते हैं। यही वजह है कि अब जम्मू-कश्मीर में मौजूद सुरक्षा एजेंसियां, मोबाइल फोन ट्रैकिंग एवं खुफिया नेटवर्क के जरिए ऐसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
आईबी की जम्मू इकाई में 31, लेह में 14 और श्रीनगर में 32 'एसए' तैनात किए जाएंगे। जम्मू कश्मीर प्रशासन में कथित तौर पर कई लोग संदेह के घेरे में हैं, इंटेलिजेंस एजेंसियों द्वारा समय-समय पर ऐसे इनपुट दिए जाते रहे हैं। यही ओवर ग्राउंड वर्कर होते हैं, जिन पर आतंकियों की मदद करने का आरोप है। इन्हें सीधे तौर पर पकड़ना मुश्किल होता है। वजह, इनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिलता। जम्मू-कश्मीर पुलिस में डीएसपी देविंदर सिंह का आतंकियों के साथ पकड़े जाना, सिस्टम पर कई बड़े सवाल खड़ा करता है। हाल ही में उप राज्यपाल मनोज सिन्हा के पूर्व सलाहकार के घर पर सीबीआई ने छापा मारा है। शस्त्र लाइसेंस मामले में यह कार्रवाई हुई है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने नई दिल्ली और मध्य प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में करीब 40 जगहों पर छापेमारी की है। पदोन्नत आईएएस अधिकारी खान को इस महीने की शुरुआत में एलजी के सलाहकार पद से हटा दिया गया था। वे पिछले साल मार्च में सलाहकार के पद पर नियुक्त किए गए थे। उस वक्त जीसी मुर्मू जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल थे। उनके जाने के बाद जब सिन्हा ने उप राज्यपाल का कार्यभार ग्रहण किया तो खान उनके सलाहकारों की टीम में बने रहे।
साल 2017 में शस्त्र लाइसेंस जारी करने के इस मामले में सामने आया था कि जम्मू कश्मीर में 2.78 लाख बंदूकों के फर्ज़ी लाइसेंस गैर-स्थानीय लोगों को दे दिए गए। जांच में पता चला कि यह फर्जीवाड़ा जम्मू-कश्मीर सरकार के अधिकारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया जा रहा था। इसके लिए बंदूक विक्रेताओं की तरफ से उन्हें कथित तौर पर भारी राशि मिलने की बात कही गई है। जो लाइसेंस जारी किए गए, उनमें पिस्टल जैसे हथियारों की संख्या अधिक थी। हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों को जो खुफिया अलर्ट मिला था, उसमें भी यही बात कही गई थी कि घाटी में छोटे हथियारों की मदद से ‘पिस्टल किलिंग’ जैसी वारदात को अंजाम दिया जा सकता है। पिछले दिनों अलग-अलग जगहों पर जिन सात लोगों को मारा गया है, उन सभी में पिस्टल ही इस्तेमाल की गई थी। ऐसा माना जा रहा है कि फर्जी तरीके से जारी हुए लाइसेंस से जो हथियार लिए गए, उनमें से कई हथियार आतंकियों और उनके अंडर व ओवरग्राउंड वर्कर तक भी पहुंचे हैं। वजह, अब एके-47 या उससे बड़े हथियारों का गोला-बारूद आसानी से नहीं मिल पा रहा है। नए आतंकियों की भर्ती पर भी अंकुश लगा है।
'मिलिट्री इंटेलिजेंस' इकाई में सेंध लगाने का प्रयास
एनआईए एवं दूसरी जांच एजेंसियों द्वारा यह बात कही जाती रही है कि जम्मू कश्मीर प्रशासन में आतंकियों के मददगार बैठे हैं। पिछले दिनों ऐसे कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है। सूचनाएं लीक करने वाले ओवर ग्राउंड वर्कर का पता लगाया जा रहा है। विदेशी सीक्रेट एजेंसियां, जिनमें आर्मी इंटेलिजेंस यूनिट भी शामिल हैं, वे भारतीय सेना की 'मिलिट्री इंटेलिजेंस' इकाई में सेंध लगाने का प्रयास कर रही हैं। इनका मकसद भारतीय सेना की लड़ाकू यूनिटों की अधिक से अधिक जानकारी जुटाना है। इसके लिए विदेशी एजेंसियां, भारतीय सेना के जवानों और अधिकारियों को निशाना बना रही हैं। गत दिनों डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री इंटेलिजेंस 'डीजीएमआई' और 'आईबी' ने इसके मद्देनजर आर्मी एवं दूसरे सशस्त्र बलों को सचेत किया है। फोन कॉल या सोशल मीडिया के जरिए अगर कोई स्टाफ कर्मी किसी अपरिचित के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करता है तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की बात कही गई है।
आईबी के इनपुट में कहा गया है कि विदेशी ताकतें, हमारी सैन्य कमान की जानकारी लेना चाहती हैं। देश में इस अवधारणा के विषय में क्या चल रहा है, कौन राजी है, कौन नहीं, इस संबंध में विदेशी एजेंसियां दस्तावेजों सहित सूचना निकालने का प्रयास कर रही हैं। संयुक्त सैन्य कमान, का ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी किसे मिली है। कुल कितनी रिपोर्ट तैयार होंगी। फाइनल नोट किसके द्वारा तैयार किया जाएगा। 'लैंड थिएटर कमांड' के गठन को लेकर क्या चल रहा है, इससे जुड़ी जानकारी भी विदेशी एजेंसियां हासिल करना चाहती हैं।
जम्मू कश्मीर पुलिस में आईजी के पद पर तैनात एक आईपीएस बताते हैं कि अब उनका मुख्य फोकस अंडर ग्राउंड व ओवरग्राउंड वर्कर पर है। इसके लिए आईबी, जम्मू-कश्मीर पुलिस की ख़ुफ़िया इकाई और रॉ जैसी एजेंसियाँ कारगर साबित होती हैं। सभी के बीच अच्छा तालमेल है। पाकिस्तान ने सीमा पर गोलीबारी तो बंद कर दी है, लेकिन जम्मू कश्मीर में आतंकियों के लिए अपना 'स्पोर्ट सिस्टम' जारी रखा है। ड्रोन से हथियार पहुंचाने के दर्जनभर मामले सामने आ चुके हैं। जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर विस्फोट किया गया। सैन्य परिसरों को निशाना बनाने का प्रयास हुआ। आतंकी संगठनों की छोटी तंजीमें जिसमें टीआरएफ (द रजिस्टेंस फ्रंट) शामिल है, उसके ज़रिये घाटी में कराई जा रही रेंडम किलिंग पर भी आईबी नेटवर्क रोक लगा सकता है।