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भारत में पाकिस्तानी उच्चायोग के संपर्क में था जमात-ए-इस्लामी
Sun, 10 Mar 2019 02:23 AM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Sun, 10 Mar 2019 02:23 AM IST
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घाटी में लंबे समय से सक्रिय संगठन जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर के लोग नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के लगातार संपर्क में थे ताकि राज्य में अलगाववाद को बढ़ावा दे सकें। अधिकारियों के मुताबिक, जमात के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ गहरे रिश्ते थे। केंद्र सरकार ने हाल ही में संगठन पर प्रतिबंध लगाया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि हुर्रियत कांफ्रेंस के सैयद अली शाह गिलानी जमात-ए-इस्लामी के अहम सदस्य हैं।
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एक समय में प्रतिबंधित संगठन गिलानी को जम्मू-कश्मीर के अमीर-ए-जिहाद (जिहाद के प्रमुख) कहता था। जमात ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ गहरे ताल्लुकात बना लिए थे ताकि वह कश्मीरी युवाओं को हथियार उपलब्ध कराने, प्रशिक्षण देने और शस्त्र आपूर्ति करा सके। चौंकाने वाली बात नहीं है कि घाटी में आतंकवाद के ढांचे का जमात के कट्टर कार्यकर्ताओं के साथ गहरा संबंध दिखता है।
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अधिकारी के मुताबिक, जमात अपने स्कूलों के नेटवर्क का इस्तेमाल घाटी के बच्चों में भारत विरोधी भावनाएं भरने के लिए करता था। संगठन की छात्र शाखा जमीयत-उल-तुल्बा के सदस्यों को जिहाद के लिए आतंकी संगठनों में जाने के लिए प्रोत्साहित करती थी। संगठन से जुड़े कई ट्रस्ट हैं जो पुरातनपंथी इस्लामी शिक्षा को फैलाने के लिए स्कूल चलाते हैं।
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हिज्बुल और हुर्रियत के गठन के पीछे जमात
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस और हिजबुल मुजाहिदीन के गठन के पीछे जमात-ए-इस्लामी का ही दिमाग था। इसके तार विदेशों में भी फैले थे, जहां से ये पैसों का इंतजाम करता था। इसके रिश्ते जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान, जमात-ए-इस्लामी पीओके और जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के साथ भी थे। यह घाटी में धार्मिक वैमनस्य भी फैलाता था ताकि इस्लाम के उदारवादी धड़ों के साथ तनाव फैसला सके।
पहले भी कई बार लग चुका है प्रतिबंध
केंद्र सरकार ने 28 फरवरी, 2019 को इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इसे दो बार प्रतिबंधित किया जा चुका है। पहली बार 1975 में राज्य सरकार ने दो साल के लिए और दूसरी बार 1990 में केंद्र सरकार ने तीन साल के लिए इस पर प्रतिबंध लगाया था।