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लद्दाख की बर्फीली चोटियों पर आईटीबीपी-सेना और वायुसेना ने इस ऑपरेशन से दी कोरोना को मात

Mon, 20 Apr 2020 07:06 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 20 Apr 2020 07:06 PM IST
सार

जैसे ही राशन सामग्री लेह पहुंची, हमारे जवानों ने वे पैकेट घर-घर तक पहुंचा दिए। इसका दोहरा फायदा हुआ, राशन के वितरण के चलते लोगों का दोबारा सर्वे हो गया। किसी व्यक्ति में कोरोना का लक्षण दिखता तो उसे क्वारंटीन में रखकर उसकी जांच कराई जाती थी। इससे कोरोना के मरीजों की चेन टूटती चली गई।

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ITBP, army and Airforce did joint relief operation in ladakh to fight coronavirus
SNM Hospital Leh, Ladakh - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में कोरोना वायरस को मात देने के लिए आईटीबीपी, भारतीय वायु सेना और आर्मी ने एक खास ऑपरेशन को अंजाम दिया था। हर घर तक मास्क, सैनिटाइजर और राशन पहुंचाने की चुनौती थी। आईटीबीपी के पास पीपीई, मास्क और क्वारंटीन सेंटर तैयार करने का खासा अनुभव था, इसलिए उसने इस ऑपरेशन में एक नोडल एजेंसी की भूमिका निभाई।
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लद्दाख की चोटियां बर्फ से ढकी हुई थीं और गांव तक पहुंचने के रास्ते भी बंद थे, ऐसे में लोगों तक पहुंचना मुश्किल था। इसके लिए भारतीय वायुसेना और सेना की मदद ली गई। इन तीनों ने मिलकर कोरोना के खिलाफ लड़ाई शुरू की। सुरक्षा बलों की टीमें हर गांव तक पहुंच गईं।

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लोगों के सेंपल लेकर उन्हें जांच के लिए दिल्ली भेजा गया। राहत एवं मेडिकल सामग्री लेकर तीन से चार हवाई जहाज लेह में उतरे। इसके बाद आईटीबीपी और सेना के जवानों ने डोर टू डोर पहुंचकर वह सामग्री वितरित की। लद्दाख के सांसद जामयांग शेरिंग व उनकी टीम ने भी इस ऑपरेशन में मदद की है।
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नतीजा, अब वहां पर कोरोना के 18 मरीजों में से 14 ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं।


लद्दाख में मार्च के पहले सप्ताह में कोरोना का मामला सामने आया था। यह संक्रमित व्यक्ति ईरान से आए थे। उनसे संबंधित आर्मी के एक जवान को भी आइसोलेशन में रखा गया। इसके बाद वहां कोरोना के पॉजिटिव केस बढ़ने लगे। इन केसों की संख्या 18 तक पहुंच गई। इससे लद्दाख में हड़कंप मच गया।


आईटीबीपी, जिसने दिल्ली के छावला में देश का सबसे बड़ा क्वारंटीन सेंटर तैयार कर चीन के वुहान, रोम और मिलान से आए एक हजार से लोगों का सफल क्वारंटीन किया था, उसे दूसरे बलों के साथ मिलकर लद्दाख को कोरोना से मुक्त करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक पांडे बताते हैं कि जब देश में लॉकडाउन का प्रथम चरण लागू हुआ, तो उससे पहले लद्दाख में ऐसे प्रतिबंध लगाए जा चुके थे। इलाकों का सर्वे कर कंटेनमेंट जोन बनाए गए। लेह स्थित एसएनएम अस्पताल में क्वारंटीन की व्यवस्था की गई।

कोरोना वायरस को लेकर वहां के मेडिकल स्टाफ को जरूरी जानकारी दी गई। बहुत से लोगों को आईटीबीपी एवं दूसरी संस्थाओं के तैयार पीपीई और मास्क मुहैया कराए गए। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक सभी लोगों की जांच की गई।

मार्च के पहले सप्ताह में आईटीबीपी और सेना ने मिलकर लद्दाख में एयरपोर्ट से लेकर गांवों तक के रास्ते में बैरियर लगा दिए।

ITBP, army and Airforce did joint relief operation in ladakh to fight coronavirus
leh, Ladakh - फोटो : Amar Ujala

बर्फ ने ऑपरेशन में बाधा डाली, लेकिन वायुसेना ने वह दिक्कत दूर कर दी ... 

लद्दाख में गत वर्षों के मुकाबले इस बार ज्यादा बर्फबारी हुई थी, इसलिए राहत कार्यों में बाधा आई। आईटीबीपी ने इसका हल निकाल लिया। आर्मी और वायुसेना की मदद से लोगों के घरों तक पहुंचने का प्लान तैयार किया गया। हवाईजहाजों की मदद से लोगों तक सामान पहुंचाया गया।

मेडिकल सामग्री भी हवाईजहाज के जरिए लेह तक लाई गई। इसके बाद आईटीबीपी, सेना और स्थानीय प्रशासन ने लोगों को कोरोना से बचाव की जानकारी और उपकरण देने शुरू कर दिए। कई फुट बर्फ में से चलकर आईटीबीपी और सेना के जवान हर घर तक पहुंचे।

ग्रामीणों से पूछकर कोरोना के संदिग्धों की सूची तैयार की गई। अनेक लोगों को क्वारंटीन में भेजा गया। हर गांव कवर कर यह सुनिश्चित किया गया कि यहां बाहर से कोई व्यक्ति बिना टेस्ट के तो नहीं आया है। इसके बाद लोगों के घरों को सैनिटाइज करने की मुहिम शुरू हुई।

उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में बताया गया। चूंकि उन लोगों के पास एक माह का राशन था, जो खत्म होने जा रहा था, इसलिए अब हर गांव तक राशन पहुंचाना भी एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। पीआरओ विवेक पांडे के अनुसार, हमने इसके लिए वायुसेना की मदद ली।

जैसे ही राशन सामग्री लेह पहुंची, हमारे जवानों ने वे पैकेट घर-घर तक पहुंचा दिए। इसका दोहरा फायदा हुआ, राशन के वितरण के चलते लोगों का दोबारा सर्वे हो गया। किसी व्यक्ति में कोरोना का लक्षण दिखता तो उसे क्वारंटीन में रखकर उसकी जांच कराई जाती थी। इससे कोरोना के मरीजों की चेन टूटती चली गई।

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