फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   it will not be easy for rahul gandhi to cross Modi-Shah

राहुल चाहे जो उछाल लें पर आसान नहीं मोदी-शाह के कौशल से पार पाना

Sat, 27 Oct 2018 07:24 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Sat, 27 Oct 2018 07:24 AM IST
विज्ञापन
it will not be easy for rahul gandhi to cross Modi-Shah

राजनीति के मौजूदा दौर को कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के नेता धारणा की लड़ाई मान रहे हैं। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर कांग्रेस के आरोपों को लेकर यही कहा था और कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का भी कहना है कि लगातार जनता में छवि बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक के बाद एक झूठ न केवल बोल रहे हैं, बल्कि अपने मंत्रियों से भी बुलवा रहे हैं। इस लड़ाई में फिलवक्त जहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बड़ी उछाल ले रहे हैं, वहीं भाजपा राजनीतिक प्रबंधन, जमीनी तैयारी और बूथ प्रबंधन पर जोर दे रही है।

विज्ञापन

राहुल की आक्रामक राजनीति बनाम भाजपा की वैकल्पिक राजनीति

50 से कम लोकसभा सीटों पर सिमटी कांग्रेस में जान डालने के लिए राहुल गांधी आक्रामक राजनीति कर रहे हैं। अपनी बात को एंग्री यंग मैन की स्टाइल में जोर से कह रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष पिछले 70 साल की कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक स्टाइल को पीछे छोड़ते दिखाई दे रहे हैं। वह राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री को अब सीधे चोर कह रहे हैं। वह सॉफ्ट हिंदुत्व के जरिए भाजपा को कहीं न कहीं चुनौती देते नजर आ रहे हैं। 

राहुल की इस राजनीतिक शैली पर भाजपा के कई नेताओं का कहना है कि इससे उन्होंने काफी कुछ पाया किया है। वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय और राहुल देव का भी यही मानना है। राहुल की छवि थोड़ी उभर कर आई है, लेकिन इसके बावजूद 2019 में राहुल गांधी की पराजय होने वाली है। भाजपा के नेताओं का भी कहना है कि राहुल आक्रामक जरूर हुए, उनकी थोड़ी छवि भी निखरी, लेकिन राज्यों के चुनाव में कांग्रेस कुछ खास नहीं कर पाई। यही लोकसभा चुनाव में होने वाला है।

कांग्रेस के सामानांतर भाजपा राजनीति में भविष्य को देखकर आंतरिक, वाह्य और जमीनी तैयारी पर पूरा जोर दे रही है। राजनीति में प्रबंधन को महत्व देकर बूथ, पन्ना प्रमुख, टिकट बंटवारा समेत सभी पहुलओं पर काफी होमवर्क करके आगे बढ़ रही है। इसके अलावा भाजपा की निगाह वैकल्पिक राजनीति पर भी है। 

नए साथी की तलाश, पुराने साथी से मेल जोल, समन्वय, सामंजस्य और पार्टी की विचारधारा के अनुरुप मुद्दों में धार की स्थिति लगातार बनाकर चल रही है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह साफ कहते हैं कि सत्ता में न होने पर हवलदार भी सैल्यूट नहीं मारेगा। इसलिए पहले सत्ता फिर आपसी मुद्दों का निपटारा। इसी को केंद्र में रखकर वह पार्टी की रीति, नीति, नेताओं की एकता के जरिए दिखाई देने वाले अनुशासन को बनाने में सफल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

नहीं हो पाया गठबंधन

कांग्रेस ने जहां 2019 के चुनाव में गठबंधन को आधार बताया और राहुल गांधी ने विपक्ष के महागठबंधन को हवा दी, वहीं भाजपा अध्यक्ष ने इस दावे की चुटकी ले ली। राहुल गांधी ने उप्र में कांग्रेस, बसपा, सपा के साथ गठबंधन को अहम बताया था, लेकिन पार्टी छत्तीसगढ़ और म.प्र. के विधानसभा चुनाव में चाहकर भी बसपा के साथ तालमेल नहीं बना पाई। 

हालांकि अभी भी कांग्रेस को भरोसा है कि लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्षी दल एकजुट होंगे। न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनेगा और भाजपा को केन्द्रीय सत्ता से उखाड़ फेंकेगे, लेकिन इसका स्वरुप बन पाना बहुत आसान नहीं है। एनसीपी के शरद पवार पहले विपक्षी एकता की हिमायत कर रहे थे, लेकिन हाल में उन्होंने भी आशंका जाहिर की कि 2019 के लोकसभा चुनाव पहले इसकी संभावना कम है। इस तरह की तमाम संभावनाओं पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह कह चुके हैं भाजपा और केंद्र सरकार सीबीआई का डर दिखाकर ऐसा नहीं होने दे रही है।

विज्ञापन

राहुल बनाम मोदी तो बल्ले-बल्ले

भाजपा नेताओं का मानना है कि जिस तरह से कांग्रेस अध्यक्ष उछाल ले रहे हैं, उससे लोकसभा चुनाव 2019 राहुल बनाम मोदी होना तय है। प्रधानमंत्री मोदी का एक स्थापित चेहरा है। जनता ने उनके काम को गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में देखा है। जबकि राहुल गांधी को अभी खुद को साबित करना है। 

छवि के मामले में मोदी के आगे राहुल कहीं नहीं ठहरते। दूसरे साढे चार साल के शासन में प्रधानमंत्री ने गरीबों, किसानों की हितैषी छवि बनाई है। उज्वला योजना समेत तमाम स्कीमें जनता के बीच में अच्छी जगह बना रही है। इसका भी लाभ मिलना तय है। 

हिंदुत्व के मुद्दे पर कमजोर पड़ेंगे राहुल

राहुल गांधी सॉफ्ट हिंदुत्व के रास्ते पर हैं। कांग्रेस के नेता कहते हैं कि राहुल गांधी की राजनीति पर चर्चा से पहले गुजरात विधानसभा चुनाव का नतीजा देखिए। प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष की पार्टी हारते-हारते बची। इसके जवाब में भाजपा के अजय अग्रवाल का कहना है कि कर्नाटक में क्या हुआ? 

राम बहादुर राय कहते हैं कि राहुल गांधी को हिंदुत्व पर चुनौती नहीं देनी चाहिए। राहुल की पार्टी जैसी परंपरागत राजनीति करती आई है, उसी पर बने रहेंगे तो फायदे में रहेंगे। वरना गड्ढे में गिरना तय है। राहुल देव की भी राय यही है। इसके सामानांतर भाजपा ने हिंदुत्व के एजेंडे को नए सिरे से धार देना शुरू कर दिया है। 

आरएसएस को साढ़े चार साल बीत जाने के बाद राम मंदिर की याद आई है और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत आक्रामक हैं। विश्व हिंदू परिषद भी इसी राह पर है। राजनीति के जानकार कॉमन सिविल कोड, राम मंदिर निर्माण और अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों पर कांग्रेस की परफार्मेंस को लेकर सशंकित नजर आते हैं। उनका मानना है कि भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार के पास पांच साल के कामकाज के साथ-साथ ये मुद्दे भी उसका आधार बढ़ाने वाले हैं। इसका मुकाबला कर पाना कांग्रेस अध्यक्ष के लिए आसान नहीं होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed