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अपनी और हाथियों की मूर्ति पर सुप्रीम कोर्ट में बोलीं मायावती, 'ये लोगों की इच्छा थी'
Tue, 02 Apr 2019 11:45 AM IST
sapna singla
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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Published by: sapna singla
Updated Tue, 02 Apr 2019 11:45 AM IST
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बसपा सुप्रीमो मायावती
- फोटो : ANI
बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी और हाथी की प्रतिमाओं पर पैसा खर्च करने के मामले में अपना हलफनामा दाखिल किया है। उन्होंने शहरों में अपने द्वारा बनाई गई मूर्तियों की स्थापना को सही ठहराया और कहा कि ये लोगों की इच्छा थी।
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She had filed the affidavit in compliance with the last order of the Supreme Court asking her that prima facie, it seems that she needs to pay back the money as she had spent a lot of public money on installation of many statutes of herself and elephants in UP. https://t.co/ipJ8dGGyMM
— ANI (@ANI) April 2, 2019
मायावती ने हलफनामे में कहा है कि विधानसभा की इच्छा का उल्लंघन कैसे करूं? इन प्रतिमाओं के माध्यम से विधानमंडल ने आदर व्यक्त किया है। बता दें मुख्यमंत्री रहते हुए इन मूर्तियों के लिए उनकी तरफ से बजट का उचित आवंटन किया गया था।
इसके साथ ही मायावती ने कहा कि ये पैसा शिक्षा पर खर्च किया जाना चाहिए या अस्पताल पर, यह एक बहस का सवाल है और इसे अदालत द्वारा तय नहीं किया जा सकता। प्रतिमाएं लोगों को प्रेरणा देने के लिए बनाई गई थीं। उन्होंने हाथियों की प्रतिमाओं पर कहा कि ये प्रतिमाएं केवल वास्तुशिल्प की बनावट हैं और ये बसपा के प्रतीक चिन्ह का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं।
मायावती ने अपने हलफनामे में कहा है कि अनुसूचित जाति के नेताओं द्वारा बनाई गई मूर्तियों पर ही सवाल क्यों? भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों द्वारा जनता का पैसा इस्तेमाल किए जाने पर सवाल क्यों नहीं? इस हलफनामे में मायावती ने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सरदार पटेल और जयललिता आदि की मूर्तियों का हवाला भी दिया है।
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई कर सकता है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहली नजर में उसका विचार है कि बसपा सुप्रीमो मायावती को प्रतिमाओं पर लगाया जनता का पैसा लौटाना चाहिए।
मायावती और उनकी पार्टी के चिन्ह हाथी की प्रतिमाएं नोएडा और लखनऊ में बनवाई गई थीं। एक वकील ने इस मामले में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया है कि नेताओं द्वारा अपनी और पार्टी के चिह्न की प्रतिमाएं बनाने पर जनता का पैसा खर्च ना करने के निर्देश दिए जाएं।