अटल सरकार ने जिन मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाला था, एक-एक कर पीएम मोदी कर रहे हैं लागू
तीन तलाक कानून, यूएपीए और एनआईए कानून में संशोधन के बाद सोमवार को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया। इससे राष्ट्रीय राजनीति की दिशा स्पष्ट हो गई है। मोदी सरकार एक-एक कर संघ और भाजपा के मूल वैचारिक बिंदुओं का अमल सुनिश्चित कर रही है।
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा में लाना भाजपा के एजेंडे में लंबे समय से था। इसीलिए मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सबसे पहले यूएपीए और एनआईए कानून में सख्त प्रावधान जोड़े गए। इसके बाद अनुच्छेद 370 को खत्म कर मोदी सरकार ने उन तीन वैचारिक मुद्दों में एक का समाधान कर दिया, जिन्हें अटल बिहारी वाजपेयी को छह साल के कार्यकाल में गठबंधन धर्म निभाने के चलते ठंडे बस्ते में डालना पड़ा था।
उधर, राम जन्मभूमि मंदिर पर फैसला अब महज तीन महीने दूर है। उम्मीद है कि 11 नवंबर को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने से पहले ही सुप्रीम कोर्ट इस पर फैसला सुना देगा। वहीं संसद के दोनों सदनों में बहुमत होने पर समान नागरिक संहिता पर कानून बनाना भी सरकार के लिए आसान हो गया है।
क्या हैं अन्य मुद्दे
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को पूरे देश में लागू कर गैरकानूनी रूप से रह रहे विदेशियों की पहचान करना और उन्हें उनके देश भेजना है। एनआरसी प्रक्रिया अभी असम में चल रही हैै। इसके अलावा पड़ोसी देशों के पीड़ित अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देना और स्कूली पाठ्यक्रमों में राष्ट्रवादी विचारधारा को शामिल करना भी सरकार के एजेंडे में है।
घाटी में हिंदू मुख्यमंत्री
केंद्र सरकार का अगला कदम जम्मू-कश्मीर में परिसीमन कराने का हो सकता है। गृहमंत्री इस पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक से पहले ही चर्चा कर चुके हैं। ऐसा होने पर कश्मीर के मुकाबले जम्मू में विधानसभा सीटें बढ़ जाएंगी। ऐसे में संभव है कि जम्मू-कश्मीर का अगला मुख्यमंत्री हिंदू भी हो सकता है।